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चिंताजनक : मर रही जीने की इच्छा...एक साल में 98 ने चुना मौत का रास्ता

Tue, 24 Feb 2026 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Tue, 24 Feb 2026 01:16 AM IST
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Worrying: The will to live is dying... 98 people chose death in one year.
सिद्धार्थनगर। बेरोजगारी तो कहीं कार्यस्थल पर होने वाले मानसिक दबाव और प्रेम संबंध से युवा परेशान हैं। वहीं, परिवार की स्थिति से मिलने वाली निराशा ने जीने की इच्छा को मार दिया है। जीवन के इस संघर्ष से जूझने के बजाए लोग मौत को गले लगाना आसान समझने लगे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में बीते एक साल में 98 लोगों ने आत्मघाती कदम उठाते हुए जीवन लीला समाप्त कर ली। जान देने वालों की उम्र 14 से 40 साल के बीच है। इनमें भी 30 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।
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जिंदगी के संघर्ष से हार मान युवा महिलाएं और पुरुष जान दे रहे हैं। इनमें पुरुषों की संख्या ज्यादा है। आत्महत्या की घटनाओं की बात करें तो पूर्व में जो मामले सामने आए हैं, उनमें कहीं आर्थिक तंगी, पारिवारिक विवाद, नशे की लत असैा सामाजिक दबाव कारण रहा है, लेकिन इन सभी का परिणाम एक ही है, मौत।
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अब एक स्पेशल टीम बनेगी, पुलिस की अगुवाई में गठित यह टीम आत्महत्या के कारण और आने वाली घटनाओं को कैसे रोका जाए, इस पर काम करेगी।
काम में हुआ असफल तो उठा लिया घातक कदम : मोहाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 30 वर्षीय युवक जो निजी कामकाज में घाटे से जूझ रहा था, लंबे समय से आर्थिक दबाव में था। परिवार के अनुसार वह चुपचाप रहने लगा था। उसने किसी से अपनी परेशानी साझा नहीं की और एक दिन अचानक फंदे से झूलकर जीवन ही समाप्त कर ली।
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परिवार के लोगों ने बताया कि मानसिक रूप से परेशान था और उसकी दवा भी चल रही थी। अचानक उसने ऐसा कदम उठा लिया।
पत्नी चली गई मायके तो लगा लिया मौत को गले : शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक युवक की पत्नी किसी बात से नाराज होकर मायके चली गई। इसके बाद वह कुछ दिन गुमसुम रहा और एक दिन वह कमरे में सोने गया और सुबह तक नहीं उठा। जब परिवार के लोग कमरे में गए तो उसका शव छत के कुंडे से फंदे के सहारे लटक रहा था। परिवार के लोगों ने खुलकर तो नहीं बोला। लेकिन, उस वक्त पड़ोसियों में चर्चा थी कि पत्नी के मायके जाने के बाद से वह परेशान था और ऐसा कदम उठा लिए।
परिवारों में संवाद, विद्यालयों में परामर्श, कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और समाज में सहानुभूति का वातावरण ये सभी कदम मिलकर ही इस बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगा सकते हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट और गहराता जाएगा।

आत्महत्या करने वाले की आयु: 14 वर्ष की आयु एक मौत, 15-18 वर्ष की आयु के पांच लोगाें ने जान दी। 19 से 24 वर्ष के 11, 25 से 35 वर्ष के 13, 35 वर्ष 16 लोगों ने आत्महत्या की। इसी प्रकार महिला में 14 वर्ष की उम्र एक, 15 से 18 उम्र के आठ, 19 से 24 वर्ष के 16, 25 से 35 वर्ष की आयु की 22 और 35 वर्ष के ऊपर आत्महत्या करने वाली महिलाओं की संख्या पांच है। संवाद
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