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Sant Kabir Nagar News: जेल में सभी व्यवस्था, जिला अस्पताल क्यों लाना पड़ा बंदी
Sat, 27 Sep 2025 07:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 27 Sep 2025 07:59 PM IST
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संतकबीरनगर। जिला जेल में बृहस्पतिवार को एक कैदी ने हाथ की नस काट ली थी, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया। यहां पर उसे टांका लगाया गया।
सवाल उठ रहा है कि जब जेल में अस्पताल है और सारी सुविधा के साथ चिकित्सक भी हैं तो बंदी को इलाज के लिए बाहर क्यों लाना पड़ा। हालांकि मामले में जिला कारागार प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जिला प्रशासन दवा के रैपर से हाथ की नस कटने का दावा कर रहा है।
जानकारी के अुनसार बरदहिया बाजार निवासी वकील अंसारी हत्या के प्रयास के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध चल रहा है। बृहस्पतिवार को उसने अपने बैरक में ही ब्लेड से दाहिने हाथ की कलाई की नस काटने का प्रयास किया। हाथ पर कई वार किए, जिससे वह लहूलुहान हो गया।
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बैरक में मौजूद कैदियों की सूचना पर कारागार प्रशासन ने घायल कैदी को जिला अस्पताल भेजवाकर दवा उपचार कराया। दवा इलाज के बाद बंदी को वापस जेल भेज दिया गया। जबकि जिला कारागार में अपना खुद का अस्पताल है और वहां पर अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा के साथ ही चिकित्सक व अन्य स्टाफ भी तैनात हैं। जो बराबर बीमार बंदियों का दवा उपचार भी कर रहे हैं। न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के दौरे पर सबसे पहले बीमार बंदियों का हाल जाना जाता है।
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सवाल उठ रहा है कि जब जेल में अस्पताल है और सारी सुविधा के साथ चिकित्सक भी हैं तो बंदी को इलाज के लिए बाहर क्यों लाना पड़ा। हालांकि मामले में जिला कारागार प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जिला प्रशासन दवा के रैपर से हाथ की नस कटने का दावा कर रहा है।
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जानकारी के अुनसार बरदहिया बाजार निवासी वकील अंसारी हत्या के प्रयास के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध चल रहा है। बृहस्पतिवार को उसने अपने बैरक में ही ब्लेड से दाहिने हाथ की कलाई की नस काटने का प्रयास किया। हाथ पर कई वार किए, जिससे वह लहूलुहान हो गया।
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बैरक में मौजूद कैदियों की सूचना पर कारागार प्रशासन ने घायल कैदी को जिला अस्पताल भेजवाकर दवा उपचार कराया। दवा इलाज के बाद बंदी को वापस जेल भेज दिया गया। जबकि जिला कारागार में अपना खुद का अस्पताल है और वहां पर अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा के साथ ही चिकित्सक व अन्य स्टाफ भी तैनात हैं। जो बराबर बीमार बंदियों का दवा उपचार भी कर रहे हैं। न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के दौरे पर सबसे पहले बीमार बंदियों का हाल जाना जाता है।