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Sant Kabir Nagar News: दूध की धार खत्म हुई तो स्थापित हो गया समय माता मंदिर
Tue, 09 Apr 2024 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 09 Apr 2024 11:25 PM IST
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समय माता मंदिर।
- मंदिर स्थापना के बाद से शुरू हो गए मांगलिक कार्य
- भव्य बना मंदिर लोगों को कर रहा आकर्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद में स्थित समय जी का मंदिर जिले के लोगों के लिए आस्था व श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है। देवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सभी मुरादें पूरी होती हैं। प्राचीनकाल का यह मंदिर अब भव्य रूप में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
मान्यता के मुताबिक देवी की प्रतिमा दूध की धार के साथ सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी क्षेत्र से लाई जा रही थी। जिसे कहीं स्थापित किया जाना था, लेकिन दूध की धार यहां तक आते-आते समाप्त हो गई तो इसे अन्य स्थान पर ले जाना संभव नहीं हो सका। तब देवी मां की प्रतिमा को खलीलाबाद के मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दिया गया। तभी से श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के प्रति बढ़ गई।
एक अन्य मान्यता के अनुसार छह सौ साल पहले मुगल काल में खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद नगर को बसाया था, वे अपने किले के पास समय जी की प्रतिमा स्थापित करना चाहते था। इस तरह माता की प्रतिमा यहां पर स्थापित कर दी गईं। समय के साथ खलीलाबाद की आबादी बढ़ती गई और यह कस्बे के रूप में विकसित होता गया। इस मंदिर को सद्भाव के प्रतीक रूप में भी देखा जाता है। समय माता की प्रतिमा का पूजन-अर्चन तभी से प्रारंभ हो गई। इसे मंदिर का रूप दे दिया गया। लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन इस मंदिर के प्रति और प्रगाढ़ होती गई। श्रद्धालुओं की मनौती पूरी होने लगी। साल भर यहां पूजा-पाठ, कथा, मुंडन, शादी आदि मांगलिक कार्य होते रहते हैं। सुबह-शाम होने वाली मां की आरती दर्शनीय होती है।
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मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश कुमार मिश्र ने बताया कि समय माता मंदिर में श्रद्धा से जो भी यहां आता है। समय माता की कृपा उस पर बनी रहती है। भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। इस दरबार से कोई खाली नहीं जाता।
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- भव्य बना मंदिर लोगों को कर रहा आकर्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद में स्थित समय जी का मंदिर जिले के लोगों के लिए आस्था व श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है। देवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सभी मुरादें पूरी होती हैं। प्राचीनकाल का यह मंदिर अब भव्य रूप में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
मान्यता के मुताबिक देवी की प्रतिमा दूध की धार के साथ सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी क्षेत्र से लाई जा रही थी। जिसे कहीं स्थापित किया जाना था, लेकिन दूध की धार यहां तक आते-आते समाप्त हो गई तो इसे अन्य स्थान पर ले जाना संभव नहीं हो सका। तब देवी मां की प्रतिमा को खलीलाबाद के मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दिया गया। तभी से श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के प्रति बढ़ गई।
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एक अन्य मान्यता के अनुसार छह सौ साल पहले मुगल काल में खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद नगर को बसाया था, वे अपने किले के पास समय जी की प्रतिमा स्थापित करना चाहते था। इस तरह माता की प्रतिमा यहां पर स्थापित कर दी गईं। समय के साथ खलीलाबाद की आबादी बढ़ती गई और यह कस्बे के रूप में विकसित होता गया। इस मंदिर को सद्भाव के प्रतीक रूप में भी देखा जाता है। समय माता की प्रतिमा का पूजन-अर्चन तभी से प्रारंभ हो गई। इसे मंदिर का रूप दे दिया गया। लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन इस मंदिर के प्रति और प्रगाढ़ होती गई। श्रद्धालुओं की मनौती पूरी होने लगी। साल भर यहां पूजा-पाठ, कथा, मुंडन, शादी आदि मांगलिक कार्य होते रहते हैं। सुबह-शाम होने वाली मां की आरती दर्शनीय होती है।
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मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश कुमार मिश्र ने बताया कि समय माता मंदिर में श्रद्धा से जो भी यहां आता है। समय माता की कृपा उस पर बनी रहती है। भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। इस दरबार से कोई खाली नहीं जाता।