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Sant Kabir Nagar News: कांटे में शिफ्ट होगा टोल प्लाजा, लोगों की जेब पर पड़ेगा असर
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संतकबीनगर। बस्ती के बड़े वन के पास स्थापित टोल प्लाजा को जिले के कांटे में शिफ्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए एनएचएआई ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। कांटे में इसके स्थापित होने पर लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। एनएचएआई ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इसकी स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद टोल प्लाजा को शिफ्ट कर दिया जाएगा।
बस्ती के हर्रैया और बड़े वन टोल प्लाजा की दूरी 35 किलोमीटर है, जबकि दो टोल प्लाजा में 60 किलोमीटर की दूरी होनी जरूरी है। गोरखपुर से आने वाले वाहन टोल बचाने के लिए कांटे से मुंडेरवा होकर निकल जाते थे। इसके साथ ही पटेल चौक से शहर की तरफ मुड़ जाते थे। वहीं कुछ वाहन बांसी रोड से निकलकर हाईवे पर पहुंचते थे। इससे टोल की वसूली नहीं हो पा रही है।
इसके साथ ही हर्रैया से दूरी भी कम थी। इसकी वजह से बड़े वन के टोल प्लाजा को कांटे में स्थापित किए जाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) बस्ती और संतकबीरनगर के बीच होने वाली टोल चोरी को रोकने के लिए वर्तमान टोल प्लाजा को कांटे क्षेत्र में शिफ्ट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। कांटे में टोल प्लाजा शिफ्ट होने से टोल चोरी को रोका जा सकेगा।
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60 किलोमीटर के दायरे में नहीं हो सकते दो टोल
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मानें तो टोल का नियम यह है कि 60 किलोमीटर के दायरे में दो टोल नहीं हो सकते हैं, जबकि बस्ती के बड़े वन और हर्रैया में दो स्थानों पर टोल प्लाजा बना है, जिसकी दूरी सिर्फ 35 किलोमीटर है। इसलिए बड़े वन के टोल प्लाजा को वहां से हटाया जाना है। इसे कांटे के पास बनाए जाने की योजना है। नए नियमों के मुताबिक टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निजी वाहन मालिकों को मासिक पास की सुविधा मिलेगी।
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टोल प्लाजा से बचने के लिए तमाम गाड़ियां मुंडेरवा होकर निकल जा रही हैं, जिससे राजस्व की वसूली प्रभावित हो रही है। बस्ती के बड़े वन के पास टोल प्लाजा को कांटे के पास शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है और शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसकी मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
-ललित प्रताप पाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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बस्ती के हर्रैया और बड़े वन टोल प्लाजा की दूरी 35 किलोमीटर है, जबकि दो टोल प्लाजा में 60 किलोमीटर की दूरी होनी जरूरी है। गोरखपुर से आने वाले वाहन टोल बचाने के लिए कांटे से मुंडेरवा होकर निकल जाते थे। इसके साथ ही पटेल चौक से शहर की तरफ मुड़ जाते थे। वहीं कुछ वाहन बांसी रोड से निकलकर हाईवे पर पहुंचते थे। इससे टोल की वसूली नहीं हो पा रही है।
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इसके साथ ही हर्रैया से दूरी भी कम थी। इसकी वजह से बड़े वन के टोल प्लाजा को कांटे में स्थापित किए जाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) बस्ती और संतकबीरनगर के बीच होने वाली टोल चोरी को रोकने के लिए वर्तमान टोल प्लाजा को कांटे क्षेत्र में शिफ्ट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। कांटे में टोल प्लाजा शिफ्ट होने से टोल चोरी को रोका जा सकेगा।
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60 किलोमीटर के दायरे में नहीं हो सकते दो टोल
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मानें तो टोल का नियम यह है कि 60 किलोमीटर के दायरे में दो टोल नहीं हो सकते हैं, जबकि बस्ती के बड़े वन और हर्रैया में दो स्थानों पर टोल प्लाजा बना है, जिसकी दूरी सिर्फ 35 किलोमीटर है। इसलिए बड़े वन के टोल प्लाजा को वहां से हटाया जाना है। इसे कांटे के पास बनाए जाने की योजना है। नए नियमों के मुताबिक टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निजी वाहन मालिकों को मासिक पास की सुविधा मिलेगी।
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टोल प्लाजा से बचने के लिए तमाम गाड़ियां मुंडेरवा होकर निकल जा रही हैं, जिससे राजस्व की वसूली प्रभावित हो रही है। बस्ती के बड़े वन के पास टोल प्लाजा को कांटे के पास शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है और शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसकी मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
-ललित प्रताप पाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई