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Sant Kabir Nagar News: गांव वालों ने चंदा लगाकर पकड़वाए 208 बंदर
Mon, 15 Dec 2025 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 15 Dec 2025 01:21 AM IST
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माधोपुर गांव में पकड़े गए बंदरों को देखते हुए लोग । संवाद
संतकबीरनगर। धनघटा तहसील क्षेत्र के माधोपुर गांव के लोगों ने चंदा लगवाकर पिछले तीन दिनों में 208 बंदरों को पकड़वाया और उनको वन विभाग के कर्मियों की देखरेख में कुस्मही जंगल में छोड़वाया। बस्ती के मुजहना से आए शिकारियों की टीम ने बंदरों को पकड़ा है।
धनघटा तहसील क्षेत्र के ग्राम माधोपुर और उसके आसपास के गांवों में बीते एक दशक से काले बंदरों का आतंक व्याप्त था। सैकड़ों की संख्या में मौजूद काले बंदर टोलियां बनाकर ग्रामीणों के घरों और फसलों पर हमला बोल देते थे। बंदरों के डर से लोग छतों पर कपड़े और खाद्यान्न सुखाना तक छोड़ दिये थे। किसानों के खेतों में मौजूद आलू, सरसों, चना, मटर, अरहर समेत सब्जियों की सारी फसलें चौपट कर देते थे। बंदरों के आतंक से किसानों ने सब्जियां, दलहन और तिलहन आदि की फसलें उगाना तक बंद कर दी।
ये बंदर बच्चों, महिलाओं और मोटरसाइकिल सवारों को देखते ही हमलावर हो जाते हैं। बंदरों के हमले में 20 से अधिक लोगों को गम्भीर चोटें भी आई हैं। बंदरों के उत्पात से आजिज ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को तमाम बार पत्र सौंपकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और बीडीओ को पत्र देकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा मिली। थक-हार कर ग्रामीणों ने चंदा लगाकर पैसा इकट्ठा किया और बस्ती से शिकारियों को बुलवाया।
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गांव के अमित कुमार पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को शिकारियों की टीम ने 75 तो शनिवार को 98 और रविवार को 55 बंदरों को पकड़ा। गांव के विश्वनाथ पांडेय, पवन कुमार पांडेय, घनश्याम मिश्र, घिराऊ यादव, छोटेलाल यादव, संतोष कुमार पांडेय, राकेश पांडेय, रामप्रताप पांडेय, अनिल त्रिपाठी आदि ने बताया कि बंदरों को पकड़ने लिए जाने के बाद लोगों को काफी सुकून मिलेगा। किसानों को खेती किसानी करने में सहूलियत मिलेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों का जीवन भी सुरक्षित हो जाएगा।
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धनघटा तहसील क्षेत्र के ग्राम माधोपुर और उसके आसपास के गांवों में बीते एक दशक से काले बंदरों का आतंक व्याप्त था। सैकड़ों की संख्या में मौजूद काले बंदर टोलियां बनाकर ग्रामीणों के घरों और फसलों पर हमला बोल देते थे। बंदरों के डर से लोग छतों पर कपड़े और खाद्यान्न सुखाना तक छोड़ दिये थे। किसानों के खेतों में मौजूद आलू, सरसों, चना, मटर, अरहर समेत सब्जियों की सारी फसलें चौपट कर देते थे। बंदरों के आतंक से किसानों ने सब्जियां, दलहन और तिलहन आदि की फसलें उगाना तक बंद कर दी।
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ये बंदर बच्चों, महिलाओं और मोटरसाइकिल सवारों को देखते ही हमलावर हो जाते हैं। बंदरों के हमले में 20 से अधिक लोगों को गम्भीर चोटें भी आई हैं। बंदरों के उत्पात से आजिज ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को तमाम बार पत्र सौंपकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और बीडीओ को पत्र देकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा मिली। थक-हार कर ग्रामीणों ने चंदा लगाकर पैसा इकट्ठा किया और बस्ती से शिकारियों को बुलवाया।
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गांव के अमित कुमार पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को शिकारियों की टीम ने 75 तो शनिवार को 98 और रविवार को 55 बंदरों को पकड़ा। गांव के विश्वनाथ पांडेय, पवन कुमार पांडेय, घनश्याम मिश्र, घिराऊ यादव, छोटेलाल यादव, संतोष कुमार पांडेय, राकेश पांडेय, रामप्रताप पांडेय, अनिल त्रिपाठी आदि ने बताया कि बंदरों को पकड़ने लिए जाने के बाद लोगों को काफी सुकून मिलेगा। किसानों को खेती किसानी करने में सहूलियत मिलेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों का जीवन भी सुरक्षित हो जाएगा।

माधोपुर गांव में पकड़े गए बंदरों को देखते हुए लोग । संवाद