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दुष्कर्म के आरोपी को दस साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो/ संतकबीरनगर
Updated Tue, 19 Jan 2016 12:00 AM IST
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भैंसहीजोत कला गांव में एक पांच वर्षीय मासूम के साथ 28 अगस्त 2010 को गांव के ही एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया था। पीड़िता की मां का आरोप था कि वह खेत में काम करने गई थी।
घर के अंदर कोई मौजूद नहीं था। सुबह करीब नौ बजे उसे बुलाने के लिए उसकी मासूूम बेटी खेत की तरफ जा रही थी। पड़ोस का रहने वाला रामनौकर उर्फ बाढ़ू बेटी को पकड़ कर अपने घर में उठा ले गया और बेटी संग दुष्कर्म किया। बेटी के चिल्लाने पर आस-पास के लोग एकत्र हो गए।
बेटी खून से लथपथ थी। लोगों के जरिए बताने पर वह भी खेत से आई। बेटी से पूछताछ की तो उसने आपबीती सुनाई। पीड़ित मां की तहरीर पर महुली पुलिस ने आरोपी रामनौकर उर्फ बाढ़ू के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज किया। विवेचक ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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अधीनस्थ न्यायालय ने आठ दिसंबर 2010 को मामले को विचारण के लिए सेशन कोर्ट को सुपुर्द कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद मोकर्रम ने बताया कि सेशन कोर्ट ने 24 सितंबर 2011 को आरोपी के खिलाफ बलात्कार का आरोप निर्धारित किया।
मामले में पीड़िता की मां ,विवेचक तथा अन्य गवाहों के बयान तथा जिरह हुए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीले रखी। 16 जनवरी 2016 को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज अशोक कुमार सक्सेना ने आरोपी रामनौकर को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए आदेश में कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र की स्त्री के साथ उसकी सहमति के बिना बलात्कार किया गया है।
सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए आरोपी को सोमवार को न्यायालय ने जेल से तलब किया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दुष्कर्म के आरोप में दस वर्ष की सजा और 50,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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घर के अंदर कोई मौजूद नहीं था। सुबह करीब नौ बजे उसे बुलाने के लिए उसकी मासूूम बेटी खेत की तरफ जा रही थी। पड़ोस का रहने वाला रामनौकर उर्फ बाढ़ू बेटी को पकड़ कर अपने घर में उठा ले गया और बेटी संग दुष्कर्म किया। बेटी के चिल्लाने पर आस-पास के लोग एकत्र हो गए।
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बेटी खून से लथपथ थी। लोगों के जरिए बताने पर वह भी खेत से आई। बेटी से पूछताछ की तो उसने आपबीती सुनाई। पीड़ित मां की तहरीर पर महुली पुलिस ने आरोपी रामनौकर उर्फ बाढ़ू के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज किया। विवेचक ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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अधीनस्थ न्यायालय ने आठ दिसंबर 2010 को मामले को विचारण के लिए सेशन कोर्ट को सुपुर्द कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद मोकर्रम ने बताया कि सेशन कोर्ट ने 24 सितंबर 2011 को आरोपी के खिलाफ बलात्कार का आरोप निर्धारित किया।
मामले में पीड़िता की मां ,विवेचक तथा अन्य गवाहों के बयान तथा जिरह हुए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीले रखी। 16 जनवरी 2016 को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज अशोक कुमार सक्सेना ने आरोपी रामनौकर को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए आदेश में कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र की स्त्री के साथ उसकी सहमति के बिना बलात्कार किया गया है।
सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए आरोपी को सोमवार को न्यायालय ने जेल से तलब किया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दुष्कर्म के आरोप में दस वर्ष की सजा और 50,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।