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Sant Kabir Nagar News: सुदामा चरित्र और परीक्षित मोह की कथा सुनाई
Sat, 04 Oct 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 04 Oct 2025 11:56 PM IST
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जोरवा गांव में श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए धनंजय जी महाराज । संवाद
मेंहदावल। राप्ती तट पर स्थित जोरवा गांव में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन शनिवार को कथा वाचक पं धनंजय जी ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोह की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा के मुख्य यजमान वीरेन्द्र पांडेय, केवला देवी व आरती पांडेय को कथा रस का अमृतपान कराते हुए धनंजय जी ने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते। पत्नी सुशीला सुदामा से आग्रह करतीं कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह मदद कर दें।
सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा आए है तो वह नंगे पैर दौड़कर आते हैं, उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से आंसू निकलते हैं और उन्हीं आसूओं से वह सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा जी से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा जी विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी पूस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं।
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अगले प्रसंग में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। तक्षक नाग आता है और राजा परीक्षित को डस लेता है। राजा परीक्षित कथा श्रवण करने के कारण भगवान के परमधाम को पहुंचते हैं।
इस दौरान राजेंद्र पांडे, लालजी पांडे, श्रीधर, रविंद्रनाथ पांडे रमाकांत, लाहौरी यादव, राम यादव ग्राम प्रधान रतन, सोनू आदि माैजूद रहे। संवाद
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कथा के मुख्य यजमान वीरेन्द्र पांडेय, केवला देवी व आरती पांडेय को कथा रस का अमृतपान कराते हुए धनंजय जी ने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते। पत्नी सुशीला सुदामा से आग्रह करतीं कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह मदद कर दें।
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सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा आए है तो वह नंगे पैर दौड़कर आते हैं, उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से आंसू निकलते हैं और उन्हीं आसूओं से वह सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा जी से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा जी विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी पूस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं।
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अगले प्रसंग में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। तक्षक नाग आता है और राजा परीक्षित को डस लेता है। राजा परीक्षित कथा श्रवण करने के कारण भगवान के परमधाम को पहुंचते हैं।
इस दौरान राजेंद्र पांडे, लालजी पांडे, श्रीधर, रविंद्रनाथ पांडे रमाकांत, लाहौरी यादव, राम यादव ग्राम प्रधान रतन, सोनू आदि माैजूद रहे। संवाद