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एक ही कार्य का नाम बदल कर दो बार लिया भुगतान
वीरेंद्र यादव/sant kabir nagar
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:04 AM IST
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विकास खंड बेलहर कला के गंगौरा गांव में राज्य वित्त से कराए गए कार्य की शिकायत पर हुई जांच में 4,90,116 रुपये का घपला उजागर हुआ है। एक ही कार्य का नाम बदल कर दो बार भुगतान लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई। जबकि माप पुस्तिका पूर्व सचिव द्वारा चार्ज में न देने की वजह से तीन सालों में मनरेगा योजना से कराए गए कार्यों की जांच नहीं हो पाई। डीपीआरओ रामअग्रे सिंह ने पूर्व प्रधान और पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो दोनों के खिलाफ कार्रवाई कर दी जाएगी।
ग्राम प्रधान गंगौरा दिवाकर उपाध्याय ने डीएम और मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर गांव में कराए गए विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया था। डीएम ने मामले की जांच डीपीआरओ रामअग्रे सिंह और जेई आरईडी की संयुक्त टीम से कराई। सात मई को जांच टीम मौके पर पहुंच कर गांव में कराए गए विकास कार्यों की जांच की। जांच टीम ने वर्ष 2015- 16 में राज्य वित्त योजना से भग्गल के घर से पिच रोड तक खड़ंजा कार्य का स्थलीय सत्यापन किया। कार्य का मिलान माप पुस्तिका तथा मौके पर कराए गए कार्य से किया।
मूल्यांकन रिपोर्ट तथा माप पुस्तिका के रिपोर्ट से 24845 रुपये का कम काम होना पाया गया। वर्ष 2014-15 में राम आसरे यादव के घर के पास कूप मरम्मत कार्य का मूल्यांकन 7890 रुपये और राम आसरे चौधरी के घर के पास कूप मरम्मत का अनुमानित लागत 8173 रुपये है। जबकि विजय पाल के घर के पास कूप मरम्मत कार्य होना नहीं पाया गया। विजय पाल ने स्वयं कूप मरम्मत कराए जाने की जानकारी जांच टीम को दी। जबकि इंडिया मार्क टू हैंड पंप की मरम्मत कराया जाना मिला। जांच टीम ने इन कार्यो का मूल्यांकन रिपोर्ट ,माप पुस्तिका रिपोर्ट से मिलान किया तो 57984 रुपये का कम काम होना पाया गया।
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वर्ष 2014-15 में ही राज्य वित्त से चार कार्य कराया जाना दर्शाया गया था। जिसमें मनिराम पांडेय और वंशराज के घर के पास कूप मरम्मत कार्य में 87702 रुपये का कम काम मिला। जग्गल के खेत से जनक के खेत तक खड़ंजा मरम्मत कार्य की जांच में 117639 रुपये का कम कार्य पाया गया। वर्ष 2013 में गाड़ापोखर में रामशंकर के घर से गड्ढे तक नाली निर्माण कार्य में 67040 रुपये का कम काम होना मिला। वित्तीय वर्ष 2013-14 में राज्य वित्त योजना से कराए गए दो और कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि उक्त कार्य को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जरिए समग्र गांव चयनित होने पर वित्तीय वर्ष 2014-15 और 15-16 में सीसीरोड निर्माण कराया गया था।
जिसका सत्यान कर पाना जांच टीम ने संभव नहीं बताया। डीपीआरओ रामअग्रे सिंह ने बताया कि जग्गल के घर से जनक के खेत तक फिर जग्गल के खेत से जनक के खेत तक खड़ंजा मरम्मत कार्य कराया जाना दिखाया गया है। एक ही कार्य का नाम बदल कर दो बार भुगतान लिया गया। 134906 रुपये का कम काम पाया गया। सभी परियोजनाआं पर जांच में 490116 रुपये का कम कार्य मिला। माप पुस्तिका पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी ने वर्तमान ग्राम पंचायत अधिकारी को जांच में नहीं देने की वजह से मनरेगा से कराए तीन सालों के कार्य की जांच नहीं हो पाई, जो अत्यंत आपत्तिजनक स्थिति है।
पूर्व प्रधान जगनरायन और ग्राम पंचायत अधिकारी अब्दुल लतीफ को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। समय से स्पष्टीकरण न मिलने अथवा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में पूर्व प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर दी जाएगी।
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ग्राम प्रधान गंगौरा दिवाकर उपाध्याय ने डीएम और मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर गांव में कराए गए विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया था। डीएम ने मामले की जांच डीपीआरओ रामअग्रे सिंह और जेई आरईडी की संयुक्त टीम से कराई। सात मई को जांच टीम मौके पर पहुंच कर गांव में कराए गए विकास कार्यों की जांच की। जांच टीम ने वर्ष 2015- 16 में राज्य वित्त योजना से भग्गल के घर से पिच रोड तक खड़ंजा कार्य का स्थलीय सत्यापन किया। कार्य का मिलान माप पुस्तिका तथा मौके पर कराए गए कार्य से किया।
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मूल्यांकन रिपोर्ट तथा माप पुस्तिका के रिपोर्ट से 24845 रुपये का कम काम होना पाया गया। वर्ष 2014-15 में राम आसरे यादव के घर के पास कूप मरम्मत कार्य का मूल्यांकन 7890 रुपये और राम आसरे चौधरी के घर के पास कूप मरम्मत का अनुमानित लागत 8173 रुपये है। जबकि विजय पाल के घर के पास कूप मरम्मत कार्य होना नहीं पाया गया। विजय पाल ने स्वयं कूप मरम्मत कराए जाने की जानकारी जांच टीम को दी। जबकि इंडिया मार्क टू हैंड पंप की मरम्मत कराया जाना मिला। जांच टीम ने इन कार्यो का मूल्यांकन रिपोर्ट ,माप पुस्तिका रिपोर्ट से मिलान किया तो 57984 रुपये का कम काम होना पाया गया।
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वर्ष 2014-15 में ही राज्य वित्त से चार कार्य कराया जाना दर्शाया गया था। जिसमें मनिराम पांडेय और वंशराज के घर के पास कूप मरम्मत कार्य में 87702 रुपये का कम काम मिला। जग्गल के खेत से जनक के खेत तक खड़ंजा मरम्मत कार्य की जांच में 117639 रुपये का कम कार्य पाया गया। वर्ष 2013 में गाड़ापोखर में रामशंकर के घर से गड्ढे तक नाली निर्माण कार्य में 67040 रुपये का कम काम होना मिला। वित्तीय वर्ष 2013-14 में राज्य वित्त योजना से कराए गए दो और कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि उक्त कार्य को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जरिए समग्र गांव चयनित होने पर वित्तीय वर्ष 2014-15 और 15-16 में सीसीरोड निर्माण कराया गया था।
जिसका सत्यान कर पाना जांच टीम ने संभव नहीं बताया। डीपीआरओ रामअग्रे सिंह ने बताया कि जग्गल के घर से जनक के खेत तक फिर जग्गल के खेत से जनक के खेत तक खड़ंजा मरम्मत कार्य कराया जाना दिखाया गया है। एक ही कार्य का नाम बदल कर दो बार भुगतान लिया गया। 134906 रुपये का कम काम पाया गया। सभी परियोजनाआं पर जांच में 490116 रुपये का कम कार्य मिला। माप पुस्तिका पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी ने वर्तमान ग्राम पंचायत अधिकारी को जांच में नहीं देने की वजह से मनरेगा से कराए तीन सालों के कार्य की जांच नहीं हो पाई, जो अत्यंत आपत्तिजनक स्थिति है।
पूर्व प्रधान जगनरायन और ग्राम पंचायत अधिकारी अब्दुल लतीफ को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। समय से स्पष्टीकरण न मिलने अथवा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में पूर्व प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर दी जाएगी।