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Sant Kabir Nagar News: दहशत में गुजरी रात, चौक-चौराहों पर दिनभर होती रही भूकंप की बात

Sun, 05 Nov 2023 01:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 05 Nov 2023 01:54 AM IST
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The night was spent in terror, there was talk of earthquake throughout the day at intersections.
भूकंप आने के बाद सरदार कालोनी में घर से बाहर निकलीं महिलाएं।
संतकबीरनगर। शहर में शुक्रवार की रात करीब 11.32 बजे भूकंप के झटके लगे तो जैसे-तैसे घरों से निकल पड़े। रात में दोबारा धरती हिलने की आशंका में लोगाें की रात दहशत में गुजती गई। कई लोगों ने परिवार के साथ सड़क पर घंटों चहलकदमी की। कमरे में गए तो नींद नहीं आई। करवटें बदलते-बदलते सवेरा हो गया। शनिवार की सुबह चौक-चौराहों पर सिर्फ भूकंप की बातें होती रहीं। लोगों ने कहा कि यदि तीव्रता अधिक होती तो जानमाल का नुकसान यहां पर भी होता।
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शहर के मुखलिसपुर तिराहा, गोलाबाजार, सरदार कालोनी, अंसार टोला, छापड़िया कालोनी सहित विभिन्न मोहल्लों में भूकंप के झटके लगने के बाद अफरा-तफरी देखी गई। भूकंप से लोग डर गए और आनन-फानन घरों से बाहर निकल गए। स्थिति यह रही कि जो जिस हालत में था, उसी हालत में सड़क पर आ गया। आफ्टर शॉक (दोबारा भूकंप आने की आशंका) से कुछ लोग परिवार के साथ सड़क पर घटों चहलकदमी रहे।
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मुखलिसपुर तिराहा निवासी विवेक कुमार ने बताया कि रात में अचानक सबकुछ हिलता महसूस हुआ। गहरी नींद में होने के कारण कुछ समझ में नहीं आया। इस बीच बच्चे की आवाज आई, पापा भूकंप आ गया है। ताैलिया लपेटकर परिवार के साथ घर के बाहर निकले। शास्त्री नगर निवासी अखिलेश ने कहा कि शहर से बाहर गए थे, देर से आए और भोजन करने के बाद टीवी देख रहे थे। अचानक पंखा और बेड हिलने लगे। जब तक कुछ समझते, परिवार के लोग चिल्लाने लगे जल्दी निकलो भूकंप आ गया है। किसी तरह से बाहर निकले और घर के बाहर सड़कर टहलकर रात गुजरने का इंतजार किया। दो बजे के बाद घर में वापस गए तो करवटें बदलते-बदलते सुबह हो गई।
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बड़गो निवासी गोलू भूकंप को लेकर सदमे में दिखे, बोले-अचानक सबकुछ हिलने लगा। संभलने का मौका तक नहीं मिला। जिस हालत में था, उसी हालत में पत्नी और बच्चों को जल्दी से बाहर निकाला और खुद सड़क पर आ गए। इस बात की चिंता सताती रही कि फिर भूकंप आ सकता है, इसलिए पूरी रात घर से बाहर ही रह गए। गोलाबाजार निवासी महेश कुमार ने कहा कि भूकंप के चलते रात में परेशान रहे। सुबह तक सिर चकराता रहा।
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2015 में आए भूकंप की यादें हुईं ताजा
शुक्रवार की रात आए भूकंप ने वर्ष 2015 में आए भूकंप की यादें ताजा कर दीं। उस समय इसकी तीव्रता अधिक थी। कई बार झटके लगे थे। रात में भी यदि भूकंप तेज आया होता तो संभलने का मौका नहीं मिलता। लोग दिनभर इसी चर्चा में मशगूल रहे। सबसे ज्यादा चर्चा चाय की दुकानों पर रही।
शनिवार की दोपहर 01:40 बजे हरिहरपुर कस्बे में मिश्रीलाल की दुकान पर तीन चार लोग चाय की चुस्की के साथ भूकंप की बात करते मिले। वंश विकास पांडेय ने कहा कि भूकंप का झटका तेज रहा होता तो हम लोगों को भी नेपाल की तरह से नुकसान उठाना पड़ जाता। लेकिन गनीमत रही कि नुकसानदायक स्थिति नहीं थी। तभी उमेश पाल ने कहा कि सही कह रहे हैं। काफी रात थी, लोग गहरी नींद में सो रहे थे। पता नहीं कितना नुकसान हो जाता। अनिमेश पांडेय ने कहा कि मोबाइल में इमरजेंसी अलार्म नहीं बजा। यह आश्चर्य की बात है। जबकि बार बार चेकिंग का मैसेज आता है। उनकी बात सुनकर वंश ने कहा कि तीन - चार बार भूकंप आ चुका है। यह ठीक नहीं है। लग रहा है कि कुछ बड़ी घटना होने वाली है। तभी दुकानदार ने कहा कि भैया अब जब आई तब आई। काहे पहिले से चिंता कईल जा।
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जिला अस्पताल में डरे-सहमे रहे मरीज
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज डरे-सहमे नजर आए। हड्डी रोग विभाग में भर्ती मरीज के तीमारदार भटपुरवा के संजय ने बताया कि भूकंप आने पर इतना मौका नहीं मिला कि निकल सकें। यहां भर्ती रामकवल और राम उग्रह ने कहा कि पहले तो लगा कि कुत्ता बेड ढकेल रहा है। प्लास्टर लगे होने कारण मरीज को लेकर भाग भी नहीं सकते थे। इसलिए डर के साये में पूरी रात गुजारनी पड़ी।
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घंटों इंतजार के बाद घर में गए
बखिरा। क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में लोग भूकंप आने से परेशान लोग घंटों घर से बाहर रहे। रात में लोग सो रहे थे। भूकंप आने पर महिलाएं, बच्चे भी नींद से जागकर घरों से बाहर आ गए। लोग एक दूसरे से भूकंप की चर्चा करने लगे। जानकी प्रसाद, विजय कुमार, उत्कर्ष ने बताया कि 2015 भी तेज भूकंप के झटके आए थे। तब दिन था, लेकिन रात में भी सभी लोग सो रहे थे। नींद में भूकंप के झटके लगे तो लगा कि बेड पानी में नाव की तरह से हिल रहा है। अनहोनी टलने पर लोगों ने राहत की सांस ली।

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भूकंप की दहशत हर जगह नजर आई। हम लोगों को पहले लगा कि बेड वैसे ही हिला है, लेकिन कुछ ही देर में बाहर निकलो बाहर निकलो की आवाज आने लगी। लोग तैसे तैसे घरों से निकलकर बाहर आए। दो बजे रात के बाद ही हम लोग वापस घरों में गए। -उमेश कुमार, मुखलिसपुर चौराहा
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भूकंप आया तो तत्काल कुछ समझना मुश्किल हो गया। पहली नींद होने की वजह से किसी तरह से बाहर निकले। घर से बाहर आने पर मालूम हुआ कि लोग डर गए हैं। कुछ देर के बाद सोशल मीडिया पर भूकंप को लेकर मैसेज आने लगा। इससे हम लोग काफी डर गए। -राजेश चौधरी, शास्त्री नगर
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वर्ष 2015 में भूकंप आया था। इधर कुछ दिनों से तीन चार बार झटका लग चुका है। ऐसा लग रहा है कि कोई बड़ी अनहोनी हाेने वाली है। इसलिए सजग रहना होगा। रात में जैसे ही हलचल हुई तो सभी लोग बाहर आ गए। बच्चे भी काफी देर तक नहीं सोए। -संतराम बड़गो

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कुछ लोगों ने बताया कि दोबारा भी झटके लग सकते हैं। इसलिए रात में हम लोग बाहर ही रह गए। तीन बजे के बाद हिम्मत जुटाकर घर में गए। लेकिन, नींद नहीं आई। करवट बदलते-बदलते सुबह हो गई। लेकिन एक बला टलने पर सबने राहत महसूस की। -पारसनाथ जायसवाल गोला बाजार

वीरेंद्र यादव
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