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Sant Kabir Nagar News: प्रबंधतंत्र करता रहा गुमराह...2014 से 23 तक ब्रिटिश मौलाना बना रहा सरपरस्त
Mon, 12 Jan 2026 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:04 AM IST
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संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के खलीलाबाद के गोश्त मंडी रोड स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया का रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मान्यता निलंबित कर दी है।
रजिस्ट्रार की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि प्रबंध तंत्र अधिकारियों को शुरू से लेकर अंत तक गुमराह करता रहा। जबकि मदरसा शुरू होने से लेकर वर्ष 2013 से लेकर 2023 तक मौलाना शमशुल हुदा खान प्रबंध कमेटी के कागजात में बतौर सरपरस्त मौजूद रहा। विभागीय व अन्य जांच में यह भी उजागर हुआ है कि प्रबंध कमेटी के लोग उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा विनियमावली में दी गई व्यवस्था का मखौल उड़ाते रहे।
मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया खलीलाबाद की रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद से आलिया स्तर (कक्षा 1 से 10 तक) की स्थायी मान्यता 31 मार्च 2017 को प्रदान की गई थी। डीएमओ के 13 जनवरी 2025 की जांच में पाया गया कि जिस जमीन व भवन पर मदरसे की मान्यता दी गई थी, उसे डीएम ने 12 फरवरी 2024 को ही राज्य सरकार के खाते में निहित कर लिया था। मदरसा भवन से सटे ही अन्य जमीन पर बने भवन में मदरसा संचालित किया जा रहा था।
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उस जमीन को मदरसा प्रबंधन ने 7 सितंबर 2018 को बैनामा लिया था। इससे स्पष्ट था कि उस भूमि व भवन पर मदरसे की मान्यता प्राप्त नहीं की गई थी। डीएमओ ने प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा। जांच में पाया गया कि संबंधित मदरसा न केवल मदरसा नियमावली में अनिवार्य मानक का उल्लंघन किया गया है, बल्कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त किए बिना स्वनिर्धारित एवं अमान्य भवन में मदरसे का संचालन कर नियमों की अवहेलना की गई है। संस्था की प्रबंध समिति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े सरपरस्त शमशुल हुदा की गतिविधियां एटीएस जांच में उजागर हुई हैं। इससे संस्था की विश्वसनीयता, उद्देश्य एवं वैधानिक चरित्र पर प्रश्न चिह्न खड़ा हो गया है। इन सब तथ्यों को देखते हुए रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया खलीलाबाद की मान्यता निलंबित कर दी है।
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रजिस्ट्रार की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि प्रबंध तंत्र अधिकारियों को शुरू से लेकर अंत तक गुमराह करता रहा। जबकि मदरसा शुरू होने से लेकर वर्ष 2013 से लेकर 2023 तक मौलाना शमशुल हुदा खान प्रबंध कमेटी के कागजात में बतौर सरपरस्त मौजूद रहा। विभागीय व अन्य जांच में यह भी उजागर हुआ है कि प्रबंध कमेटी के लोग उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा विनियमावली में दी गई व्यवस्था का मखौल उड़ाते रहे।
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मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया खलीलाबाद की रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद से आलिया स्तर (कक्षा 1 से 10 तक) की स्थायी मान्यता 31 मार्च 2017 को प्रदान की गई थी। डीएमओ के 13 जनवरी 2025 की जांच में पाया गया कि जिस जमीन व भवन पर मदरसे की मान्यता दी गई थी, उसे डीएम ने 12 फरवरी 2024 को ही राज्य सरकार के खाते में निहित कर लिया था। मदरसा भवन से सटे ही अन्य जमीन पर बने भवन में मदरसा संचालित किया जा रहा था।
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उस जमीन को मदरसा प्रबंधन ने 7 सितंबर 2018 को बैनामा लिया था। इससे स्पष्ट था कि उस भूमि व भवन पर मदरसे की मान्यता प्राप्त नहीं की गई थी। डीएमओ ने प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा। जांच में पाया गया कि संबंधित मदरसा न केवल मदरसा नियमावली में अनिवार्य मानक का उल्लंघन किया गया है, बल्कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त किए बिना स्वनिर्धारित एवं अमान्य भवन में मदरसे का संचालन कर नियमों की अवहेलना की गई है। संस्था की प्रबंध समिति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े सरपरस्त शमशुल हुदा की गतिविधियां एटीएस जांच में उजागर हुई हैं। इससे संस्था की विश्वसनीयता, उद्देश्य एवं वैधानिक चरित्र पर प्रश्न चिह्न खड़ा हो गया है। इन सब तथ्यों को देखते हुए रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया खलीलाबाद की मान्यता निलंबित कर दी है।