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कबीर दरबार में बही प्रेम की बयार
Mon, 14 Jan 2019 12:30 AM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 14 Jan 2019 12:30 AM IST
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कबीर दरबार में बही प्रेम की बयार
- फोटो : अमर उजाला
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मगहर(संतकबीरनगर)। महोत्सव के दूसरे दिन रविवार की शाम को मंच पर कबीर दरबार का आयोजन किया गया। विभिन्न प्रांतों से आये के कबीर पंथी संतों ने कबीर वाणी व सूफी भजन गाकर महोत्सव को कबीरमय कर दिया। लोगों से सद्भाव व प्रेम के साथ रहने की अपील की गई।
कार्यक्रम की शुरूआत बिहार प्रांत के समस्तीपुर से आये संत प्रभु साहेब ने गुरूवाणी से की। बिहार के गोपालगंज से आए संत महेन्द्र साहेब व अम्बाला से आए संत बृजेश साहेब ने संतकबीर के दोहे पढ़कर लोगों को इसका अर्थ भी समझाया। लखनऊ से संत कोमल साहेब ने गुरू गोविंद दाऊ खड़े, काके लागे पांव गाकर गुरू की महिमा समझाई। वाराणसी के संत मुक्ति साहेब व हंस दास साहेब ने कहा कि संत कबीर ने व्यक्ति को मुक्ति का मार्ग सुझाया था। उनका मार्ग आडंबर मुक्त और प्रेम युक्त मार्ग था। देवरिया के संत भगवान साहेब, गोरखुर से संत रामचंद्र साहेब व सेवा दास, राम शरण साहेब, बस्ती से राम लखन दास उर्फ लाल बाबा, राजेंद्र दास, राम सेवक दास, अरविंद दास, बाबू राम दास, राम सबद दास आदि संतों ने भी कबीर साहब के जीवन और उनकी वाणी का जीवन में महत्व समझाया। कुमारी स्नेहलता सिंह ने सूफी भजन मगहर वाले सद्गुरु दाता आई हूं तेरी बन के पुजारन की प्रस्तुति की। संचालन डॉ. हरिशरण शास्त्री ने किया।
कार्यक्रम की शुरूआत बिहार प्रांत के समस्तीपुर से आये संत प्रभु साहेब ने गुरूवाणी से की। बिहार के गोपालगंज से आए संत महेन्द्र साहेब व अम्बाला से आए संत बृजेश साहेब ने संतकबीर के दोहे पढ़कर लोगों को इसका अर्थ भी समझाया। लखनऊ से संत कोमल साहेब ने गुरू गोविंद दाऊ खड़े, काके लागे पांव गाकर गुरू की महिमा समझाई। वाराणसी के संत मुक्ति साहेब व हंस दास साहेब ने कहा कि संत कबीर ने व्यक्ति को मुक्ति का मार्ग सुझाया था। उनका मार्ग आडंबर मुक्त और प्रेम युक्त मार्ग था। देवरिया के संत भगवान साहेब, गोरखुर से संत रामचंद्र साहेब व सेवा दास, राम शरण साहेब, बस्ती से राम लखन दास उर्फ लाल बाबा, राजेंद्र दास, राम सेवक दास, अरविंद दास, बाबू राम दास, राम सबद दास आदि संतों ने भी कबीर साहब के जीवन और उनकी वाणी का जीवन में महत्व समझाया। कुमारी स्नेहलता सिंह ने सूफी भजन मगहर वाले सद्गुरु दाता आई हूं तेरी बन के पुजारन की प्रस्तुति की। संचालन डॉ. हरिशरण शास्त्री ने किया।
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