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Sant Kabir Nagar News: ‘‘नीयत बदल दिया बागवां ने बाग से, शोले भड़क उठे हैं कोयल की राग से’’
Mon, 01 Apr 2024 04:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 01 Apr 2024 04:37 AM IST
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- जन साहित्यिक मंच की मासिक कवि गोष्ठी हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य अतिथि राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने ‘‘नीयत बदल दिया बागवां ने बाग से, शोले भड़क उठे हैं कोयल की राग से’’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
वहीं कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने ‘कैसे अलग-अलग हुए ये रास्ते हमारे, हम भी तो हैं तुम्हारे, तुम भी तो हो हमारे’ सुनाकर सबको प्रेम से रहने की अपील की। सूरज कुंवर सरस ने ‘होली की छुट्टी गई, चलो संभाले जाॅब...’ सुनाकर लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा पवन सबा ने ‘मन के सब बन बाग हरे हैं, अमृत के सागर गहरे हैं’ व युवा कवि राजेश मृदुल ने ‘प्यार की धुन में गीत बन गई ऐसी दुनिया झूम के गाई, रित-प्रीत की अमर कर गई क्यूं तुझको समझ न आई’ सुनाकर मंत्रमुग्ध किया।
इसके अलावा युवा शायर ओम प्रकाश गौतम ने ‘मिल गई समंदर में तो वजूद खो देगी, आ गई मुहाने तक अब नदी कहां जाए’ सुनाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। शायर महजर खलीलाबादी ने ‘ये दस्तूर जमाने का निराला देखा, घर जलाया है तो दुनिया ने उजाला देखा’ से त्याग के महत्व को बताया। इस अवसर पर जन साहित्यिक मंच के संरक्षक छविराज राज को संतकबीर सम्मान व मंच के संस्थापक सदस्य पवन सबा को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान से सम्मानित किया गया। कवि गोष्ठी में शिवा पांडेय, सुरेश यादव, राधेश्याम मिश्र, मनोज कुमार, अविनाश पांडेय, विकास नारायण आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य अतिथि राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने ‘‘नीयत बदल दिया बागवां ने बाग से, शोले भड़क उठे हैं कोयल की राग से’’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
वहीं कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने ‘कैसे अलग-अलग हुए ये रास्ते हमारे, हम भी तो हैं तुम्हारे, तुम भी तो हो हमारे’ सुनाकर सबको प्रेम से रहने की अपील की। सूरज कुंवर सरस ने ‘होली की छुट्टी गई, चलो संभाले जाॅब...’ सुनाकर लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा पवन सबा ने ‘मन के सब बन बाग हरे हैं, अमृत के सागर गहरे हैं’ व युवा कवि राजेश मृदुल ने ‘प्यार की धुन में गीत बन गई ऐसी दुनिया झूम के गाई, रित-प्रीत की अमर कर गई क्यूं तुझको समझ न आई’ सुनाकर मंत्रमुग्ध किया।
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इसके अलावा युवा शायर ओम प्रकाश गौतम ने ‘मिल गई समंदर में तो वजूद खो देगी, आ गई मुहाने तक अब नदी कहां जाए’ सुनाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। शायर महजर खलीलाबादी ने ‘ये दस्तूर जमाने का निराला देखा, घर जलाया है तो दुनिया ने उजाला देखा’ से त्याग के महत्व को बताया। इस अवसर पर जन साहित्यिक मंच के संरक्षक छविराज राज को संतकबीर सम्मान व मंच के संस्थापक सदस्य पवन सबा को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान से सम्मानित किया गया। कवि गोष्ठी में शिवा पांडेय, सुरेश यादव, राधेश्याम मिश्र, मनोज कुमार, अविनाश पांडेय, विकास नारायण आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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