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Sant Kabir Nagar News: शैक्षिक गतिविधियों का विश्लेषण कर जरूरी कदम उठाएगा शिक्षा विभाग
Tue, 23 Dec 2025 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 23 Dec 2025 11:36 PM IST
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मेंहदावल। बेसिक स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर करने शिक्षकों-अधिकारियों के बीच समन्वय बनाए रखने की पहल होगी। स्कूलवार सुधार का खाका तैयार किया जाएगा। इसी के आधार पर शैक्षिक गतिविधियों का विश्लेषण कर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
बीईओ मुख्यालय ज्ञानचंद्र मिश्र ने बताया कि इसका उद्देश्य स्कूलों में सीखने-सिखाने का बेहतर माहौल विकसित करना है। उन्होंने बताया कि यह सुधारात्मक उपाय पांच चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) व एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) संयुक्त रूप से हर माह विद्यालयों का भ्रमण कर साझा कार्ययोजना बनाएंगे। इसमें कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों की पहचान कर सुधार के लिए अनिवार्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दूसरे चरण में विद्यालयों में शिक्षण स्तर की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। कक्षा-कक्ष की गतिविधियों, बच्चों की सीखने की क्षमता, उपस्थिति और शिक्षण विधियों की समीक्षा की जाएगी। तीसरे चरण में आकलन के आधार पर उन बिंदुओं को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सुधार की आवश्यकता है, जैसे शिक्षण सामग्री, अध्यापन शैली या शैक्षणिक सहयोग। चौथे चरण में स्कूल, संकुल और बीईओ स्तर पर सामने आई समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को मार्गदर्शन देने के साथ आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। पांचवें और अंतिम चरण में अब तक की प्रगति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी, ताकि सुधार प्रक्रिया निरंतर चलती रहे। उन्होंने बताया कि इस पहल से विद्यालयों में जवाबदेही बढ़ेगी और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों के सीखने के स्तर को मजबूती मिलेगी।
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बीईओ मुख्यालय ज्ञानचंद्र मिश्र ने बताया कि इसका उद्देश्य स्कूलों में सीखने-सिखाने का बेहतर माहौल विकसित करना है। उन्होंने बताया कि यह सुधारात्मक उपाय पांच चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) व एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) संयुक्त रूप से हर माह विद्यालयों का भ्रमण कर साझा कार्ययोजना बनाएंगे। इसमें कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों की पहचान कर सुधार के लिए अनिवार्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दूसरे चरण में विद्यालयों में शिक्षण स्तर की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। कक्षा-कक्ष की गतिविधियों, बच्चों की सीखने की क्षमता, उपस्थिति और शिक्षण विधियों की समीक्षा की जाएगी। तीसरे चरण में आकलन के आधार पर उन बिंदुओं को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सुधार की आवश्यकता है, जैसे शिक्षण सामग्री, अध्यापन शैली या शैक्षणिक सहयोग। चौथे चरण में स्कूल, संकुल और बीईओ स्तर पर सामने आई समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को मार्गदर्शन देने के साथ आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। पांचवें और अंतिम चरण में अब तक की प्रगति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी, ताकि सुधार प्रक्रिया निरंतर चलती रहे। उन्होंने बताया कि इस पहल से विद्यालयों में जवाबदेही बढ़ेगी और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों के सीखने के स्तर को मजबूती मिलेगी।
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