{"_id":"6ad3d95eccc1242bef027573","slug":"the-audience-was-spellbound-while-watching-the-tableau-of-the-wedding-of-ram-and-sita-khalilabad-news-c-209-1-kld1017-159143-2026-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: राम सीता विवाह की झांकी देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शको","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: राम सीता विवाह की झांकी देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शको
विज्ञापन
पौली के गोबिंदगंज में बाल रामलीला में राम सीता के विवाह की झांकी का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
रोसयाबाजार। पौली क्षेत्र के गोविंदगंज में नवरात्र पर चल रही रामलीला में श्रीराम-सीता विवाह और परशुराम संवाद का प्रसंग मनमोहक रहा।
मंचन के दौरान दिखाया गया कि श्रीराम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ जनकपुरी में पहुंचकर एक आम के बगीचे में ठहरे। इसकी सूचना जनक को मिली और उन्होंने अपने राज्यसभा के विद्वानों और ऋषियों को विश्वामित्र ऋषि के स्वागत के लिए भेजा और उन्हें यथोचित स्थान दिया गया।
वहीं श्रीराम ने जनक नंदिनी को देखा। इसके बाद यज्ञ मंडप में कई देशों के भूपति बैठे थे। जनक जी की शर्तों का उन्हें पता लगा तो कुछ लोगों ने कहा कि सीता भू पुत्री है। जनक ने कहा कि पृथ्वी वीरों से खाली है। इस पर लक्ष्मण भड़क गए और उन्होंने कहा कि पूरी धरती को गेंद की तरह उछाल दूं।
इस पर विश्वामित्र के मना करने पर लक्ष्मण शांत हुए और श्रीराम को विश्वामित्र ने धनुष उठाने का आदेश दिया। प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। इसके बाद जानकी ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उनका वरण किया।
विज्ञापन
इस मौके पर न्यू आदर्श दुर्गा समिति के मोहन वर्मा, राहुल, विकास, नितेश, राजेन्द्र, मस्त राम वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।व
विज्ञापन
रोसयाबाजार। पौली क्षेत्र के गोविंदगंज में नवरात्र पर चल रही रामलीला में श्रीराम-सीता विवाह और परशुराम संवाद का प्रसंग मनमोहक रहा।
मंचन के दौरान दिखाया गया कि श्रीराम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ जनकपुरी में पहुंचकर एक आम के बगीचे में ठहरे। इसकी सूचना जनक को मिली और उन्होंने अपने राज्यसभा के विद्वानों और ऋषियों को विश्वामित्र ऋषि के स्वागत के लिए भेजा और उन्हें यथोचित स्थान दिया गया।
वहीं श्रीराम ने जनक नंदिनी को देखा। इसके बाद यज्ञ मंडप में कई देशों के भूपति बैठे थे। जनक जी की शर्तों का उन्हें पता लगा तो कुछ लोगों ने कहा कि सीता भू पुत्री है। जनक ने कहा कि पृथ्वी वीरों से खाली है। इस पर लक्ष्मण भड़क गए और उन्होंने कहा कि पूरी धरती को गेंद की तरह उछाल दूं।
विज्ञापन
इस पर विश्वामित्र के मना करने पर लक्ष्मण शांत हुए और श्रीराम को विश्वामित्र ने धनुष उठाने का आदेश दिया। प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। इसके बाद जानकी ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उनका वरण किया।
विज्ञापन
इस मौके पर न्यू आदर्श दुर्गा समिति के मोहन वर्मा, राहुल, विकास, नितेश, राजेन्द्र, मस्त राम वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।व