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भूमिहीनों में बांट दी बाढ़ राहत की रकम
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भूमिहीनों में बांट दी बाढ़ राहत की रकम
धनघटा (संतकबीरनगर)। भूमिहीनों में बाढ़ राहत का मुआवजा राशि बांटे जाने पर एक बार फिर धनघटा तहसील चर्चा में आ गया है। तहसीलदार की जांच में एक लेखपाल के क्षेत्र में पांच लाख से अधिक रकम बगैर खेत वालों को बाढ़ राहत का मुआवजा देने का मामला उजागर हुआ है। इससे लेखपालों के बीच हड़कंप मच हुआ है।
अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण 131 गांवों के किसानों की धान की फसल नष्ट हो गई थी। पीड़ित किसानों को मुआवजा राशि देने के लिए शासन ने तहसील को धन उपलब्ध कराया था। तहसील प्रशासन हल्का लेखपाल से किसानों की कितनी फसल बर्बाद हुई, इसकी रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके आधार पर प्रभावित किसानों में मुआवजे की राशि बांटी गई। मुआवजा राशि वितरण के दौरान ही किसानों ने यह बात जिम्मेदार अधिकारियों के सामने रखा था कि जिनके पास एक विस्वा भूमि नही है, उन्हें भी सहायता राशि दी जा रही। हकीकत में जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उनका नाम सूची में नहीं है, लेकिन किसानों की बात को अनसुना कर दी गई। अब जब एक हल्का लेखपाल के क्षेत्र में उन किसानों को राहत राशि देने का मामला सामने आया, जिनके पास एक विस्वा जमीन नहीं है तो तहसील प्रशासन के पांव तले से जमीन खिसक गई। बृहस्पतिवार को तहसील में यह चर्चा आम रही कि अगर राहत राशि वितरण और कोरोना काल में प्रवासियों को कराए गए भोजन की जांच की जाए तो फर्जीवाडे़ का पर्दाफाश हो सकता है।
गायघाट, रामपुर, जिगिना, सियर कला आदि गांव के किसान मुआवजा राशि वितरण की जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि जिस हल्का लेखपाल के क्षेत्र में शिकायत मिली थी, उसकी जांच कराई गई तो वहां पर भूमिहीन लोगों को राहत राशि देने का मामला प्रकाश में आया। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजकर लेखपाल को अभिलेख के साथ तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन-जिन गांवों से शिकायत मिलेगी, वहां जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई भी जरूर होगी।
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धनघटा (संतकबीरनगर)। भूमिहीनों में बाढ़ राहत का मुआवजा राशि बांटे जाने पर एक बार फिर धनघटा तहसील चर्चा में आ गया है। तहसीलदार की जांच में एक लेखपाल के क्षेत्र में पांच लाख से अधिक रकम बगैर खेत वालों को बाढ़ राहत का मुआवजा देने का मामला उजागर हुआ है। इससे लेखपालों के बीच हड़कंप मच हुआ है।
अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण 131 गांवों के किसानों की धान की फसल नष्ट हो गई थी। पीड़ित किसानों को मुआवजा राशि देने के लिए शासन ने तहसील को धन उपलब्ध कराया था। तहसील प्रशासन हल्का लेखपाल से किसानों की कितनी फसल बर्बाद हुई, इसकी रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके आधार पर प्रभावित किसानों में मुआवजे की राशि बांटी गई। मुआवजा राशि वितरण के दौरान ही किसानों ने यह बात जिम्मेदार अधिकारियों के सामने रखा था कि जिनके पास एक विस्वा भूमि नही है, उन्हें भी सहायता राशि दी जा रही। हकीकत में जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उनका नाम सूची में नहीं है, लेकिन किसानों की बात को अनसुना कर दी गई। अब जब एक हल्का लेखपाल के क्षेत्र में उन किसानों को राहत राशि देने का मामला सामने आया, जिनके पास एक विस्वा जमीन नहीं है तो तहसील प्रशासन के पांव तले से जमीन खिसक गई। बृहस्पतिवार को तहसील में यह चर्चा आम रही कि अगर राहत राशि वितरण और कोरोना काल में प्रवासियों को कराए गए भोजन की जांच की जाए तो फर्जीवाडे़ का पर्दाफाश हो सकता है।
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गायघाट, रामपुर, जिगिना, सियर कला आदि गांव के किसान मुआवजा राशि वितरण की जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि जिस हल्का लेखपाल के क्षेत्र में शिकायत मिली थी, उसकी जांच कराई गई तो वहां पर भूमिहीन लोगों को राहत राशि देने का मामला प्रकाश में आया। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजकर लेखपाल को अभिलेख के साथ तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन-जिन गांवों से शिकायत मिलेगी, वहां जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई भी जरूर होगी।
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