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Sant Kabir Nagar News: टेक्सटाइल पार्क और बखिरा बर्तन उद्योग को पंख लगने की उम्मीद
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संतकबीरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को जिले में रहेंगे। मुख्यमंत्री कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के जरिए जिले के विकास के लिए कई सौगात दे सकते हैं। टेक्सटाइल पार्क और बखिरा बर्तन उद्योग को भी पंख लगने की उम्मीद है।
बंद पड़ी कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा शासन ने करीब एक साल पहले की थी। यहां सर्वे का कार्य पूरा हो गया है और जमीन के रजिस्ट्री की तैयारी चल रही है लेकिन अभी तक इसके लिए शासन स्तर से बजट की मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री के आने से यह उम्मीद जगी है कि टेक्सटाइल पार्क के निर्माण के लिए कदम आगे बढ़ सकते हैं। वहीं जिले में स्थित बखिरा का पीतल, फूल और तांबे का बर्तन उद्योग लगभग 150 साल पुराना है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। जिसके तहत इसे मुरादाबाद की तर्ज पर विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यहां के कुशल कारीगर लोटा, गिलास, थाल, कड़ाही, भगोना और गगरा जैसे पारंपरिक धातु बर्तन बनाते हैं। एक समय में यहां के बर्तनों की देश-विदेश में बहुत मांग थी और पीतल की खनक से पूरा कस्बा आबाद था। वर्तमान स्थिति में कच्चे माल की कमी, महंगाई और पूंजी के अभाव के कारण यह उद्योग पिछले कुछ दशकों से मंदी और बदहाली का सामना कर रहा है। हालांकि उद्योग को फिर से जिंदा करने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा आधुनिक सुविधाओं व फाइनेंस प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। यदि मुख्यमंत्री बखिरा बर्तन उद्योग के लिए कुछ घोषणा कर दे तो बूस्ट मिल सकता है।
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बंद पड़ी कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा शासन ने करीब एक साल पहले की थी। यहां सर्वे का कार्य पूरा हो गया है और जमीन के रजिस्ट्री की तैयारी चल रही है लेकिन अभी तक इसके लिए शासन स्तर से बजट की मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री के आने से यह उम्मीद जगी है कि टेक्सटाइल पार्क के निर्माण के लिए कदम आगे बढ़ सकते हैं। वहीं जिले में स्थित बखिरा का पीतल, फूल और तांबे का बर्तन उद्योग लगभग 150 साल पुराना है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। जिसके तहत इसे मुरादाबाद की तर्ज पर विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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यहां के कुशल कारीगर लोटा, गिलास, थाल, कड़ाही, भगोना और गगरा जैसे पारंपरिक धातु बर्तन बनाते हैं। एक समय में यहां के बर्तनों की देश-विदेश में बहुत मांग थी और पीतल की खनक से पूरा कस्बा आबाद था। वर्तमान स्थिति में कच्चे माल की कमी, महंगाई और पूंजी के अभाव के कारण यह उद्योग पिछले कुछ दशकों से मंदी और बदहाली का सामना कर रहा है। हालांकि उद्योग को फिर से जिंदा करने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा आधुनिक सुविधाओं व फाइनेंस प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। यदि मुख्यमंत्री बखिरा बर्तन उद्योग के लिए कुछ घोषणा कर दे तो बूस्ट मिल सकता है।
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