{"_id":"6a874021cc5753ba4f0306fe","slug":"testing-machine-in-pathology-department-out-of-order-10-types-of-tests-halted-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1039-155877-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: पैथोलॉजी में जांच मशीन खराब, 10 जांचें ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: पैथोलॉजी में जांच मशीन खराब, 10 जांचें ठप
विज्ञापन
सीएचसी सेमरियावां में खराब मशीन। संवाद
सेमरियावां। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां की ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में लगी बायोकेमिस्ट्री सेलेक्ट्रा मशीन मंगलवार से खराब है। मशीन खराब होने से एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, एमपी, विडाल, शुगर, बायोकेमिस्ट्री और थायराइड समेत करीब दस प्रमुख जांचें प्रभावित हैं। सीएचसी में जांच न हो पाने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर जाकर जांच कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इनमें एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट), लिपिड प्रोफाइल, एमपी (मलेरिया परजीवी), विडाल, ब्लड शुगर, विभिन्न बायोकेमिस्ट्री जांच और थायराइड जांच प्रमुख हैं। चिकित्सकों द्वारा जांच लिखे जाने के बाद मरीजों को सीएचसी में सुविधा नहीं मिलने से अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
30 शैय्या वाले सीएचसी सेमरियावां पर सेमरियावां ब्लॉक के साथ ही बघौली, बेलहर कला, सांथा तथा बस्ती जिले के साऊंघाट और रुधौली ब्लॉक के विभिन्न गांवों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज ओपीडी में आते हैं। इनमें 20 से 25 प्रतिशत मरीजों को चिकित्सक बीमारी की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभिन्न जांच कराने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन
00000000000000000
40 लाख की लागत से बनी यूनिट, फिर भी परेशानी
सीएचसी परिसर में करीब 40 लाख रुपये की लागत से ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट तैयार की गई है। इसमें मरीजों को 70 से अधिक प्रकार की निशुल्क जांचें उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इनमें सीबीसी, हीमोग्लोबिन, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, एमपी, विडाल, हार्मोनल, बायोकेमिस्ट्री और थायराइड समेत कई जांचें शामिल हैं।
0000000000000000000
मशीन खराब होने से योजना पर सवाल
बीपीएचयू में मशीनों के बार-बार खराब होने और कभी रीजेंट की कमी की समस्या से मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों का कहना है कि मशीन खराब होने से सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क जांच की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कभी रीजेंट की कमी तो कभी मशीन खराब होने की समस्या के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी की ओर जाना पड़ता है। अबूजर चौधरी, दयाराम, नसीम साहिल, अलीमुल्लाह, माशूक अहमद आदि ने बताया कि सीएचसी में जांच सुविधा शुरू होने से ग्रामीण मरीजों को काफी राहत मिली थी लेकिन मशीन खराब होने के बाद फिर से निजी केंद्रों पर निर्भरता बढ़ गई है। अभी गत जुलाई में यही मशीन खराब हुई थी। फिर मशीन खराब है।
00000000000000000000
सेलेक्ट्रा मशीन को ठीक कराने के लिए इंजीनियर आया था। मशीन में कोई पार्ट खराब है, जिसे बदलने की जरूरत है। इंजीनियर ने जल्द ही पार्ट लेकर आने को कहा है। मशीन ठीक होते ही प्रभावित सभी जांच सुविधाएं शुरू हो जाएगी।
-डाॅ. सुरेश चंद्रा, अधीक्षक, सीएचसी सेमरियावां
विज्ञापन
इनमें एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट), लिपिड प्रोफाइल, एमपी (मलेरिया परजीवी), विडाल, ब्लड शुगर, विभिन्न बायोकेमिस्ट्री जांच और थायराइड जांच प्रमुख हैं। चिकित्सकों द्वारा जांच लिखे जाने के बाद मरीजों को सीएचसी में सुविधा नहीं मिलने से अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
30 शैय्या वाले सीएचसी सेमरियावां पर सेमरियावां ब्लॉक के साथ ही बघौली, बेलहर कला, सांथा तथा बस्ती जिले के साऊंघाट और रुधौली ब्लॉक के विभिन्न गांवों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज ओपीडी में आते हैं। इनमें 20 से 25 प्रतिशत मरीजों को चिकित्सक बीमारी की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभिन्न जांच कराने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन
00000000000000000
40 लाख की लागत से बनी यूनिट, फिर भी परेशानी
सीएचसी परिसर में करीब 40 लाख रुपये की लागत से ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट तैयार की गई है। इसमें मरीजों को 70 से अधिक प्रकार की निशुल्क जांचें उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इनमें सीबीसी, हीमोग्लोबिन, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, एमपी, विडाल, हार्मोनल, बायोकेमिस्ट्री और थायराइड समेत कई जांचें शामिल हैं।
0000000000000000000
मशीन खराब होने से योजना पर सवाल
बीपीएचयू में मशीनों के बार-बार खराब होने और कभी रीजेंट की कमी की समस्या से मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों का कहना है कि मशीन खराब होने से सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क जांच की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कभी रीजेंट की कमी तो कभी मशीन खराब होने की समस्या के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी की ओर जाना पड़ता है। अबूजर चौधरी, दयाराम, नसीम साहिल, अलीमुल्लाह, माशूक अहमद आदि ने बताया कि सीएचसी में जांच सुविधा शुरू होने से ग्रामीण मरीजों को काफी राहत मिली थी लेकिन मशीन खराब होने के बाद फिर से निजी केंद्रों पर निर्भरता बढ़ गई है। अभी गत जुलाई में यही मशीन खराब हुई थी। फिर मशीन खराब है।
00000000000000000000
सेलेक्ट्रा मशीन को ठीक कराने के लिए इंजीनियर आया था। मशीन में कोई पार्ट खराब है, जिसे बदलने की जरूरत है। इंजीनियर ने जल्द ही पार्ट लेकर आने को कहा है। मशीन ठीक होते ही प्रभावित सभी जांच सुविधाएं शुरू हो जाएगी।
-डाॅ. सुरेश चंद्रा, अधीक्षक, सीएचसी सेमरियावां