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घाघरा का जल स्तर स्थिर, राहत में लोग
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:13 PM IST
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घाघरा का जल स्तर स्थिर।
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी का जल स्तर शनिवार को स्थिर रहा। इससे गांव के लोग राहत की सांस तो लिए, लेकिन संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ जाने के कारण लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी में डूबी फसलो और पशुओं के चारा पर आया संकट किसानों को चिंता में डाल दिया है।
कंचनपुर , गायघाट संपर्क मार्ग पर शुक्रवार के शाम पानी चढ़ गया। जिससे गायघाट, चनगहा, ढोलबजा, गुनवतिया, सरैया, खरैया समेत दियारा में बसे कई गांव के लोगों को पानी में घुस कर आना जाना पड़ रहा है। दियारा में बोई गई फसल डूब जाने से किसान चिंतित है। किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी भले ही हट जाए, लेकिन फसल जो एक सप्ताह से डूबी हुई है वह तो बर्बाद हो ही गई। सबसे बड़ी परेशानी पशुओं के चारा को लेकर है। गांव वालों का कहना है कि दियारा में बसे सभी गांव बाढ़ से प्रभावित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के लोग अभी तक हाल चाल लेने तक नही पहुंचे। यही हाल पशुओं के डॉक्टर का है उनका भी कही अता पता नही है। जबकि बाढ़ के समय पशुओं को हर वर्ष टीका लगाया जाता रहा है। एसडीएम इंद्रभान तिवारी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ से घिरे गांव में पहुंच कर लोगों की हर संभव मदद करे।
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कंचनपुर , गायघाट संपर्क मार्ग पर शुक्रवार के शाम पानी चढ़ गया। जिससे गायघाट, चनगहा, ढोलबजा, गुनवतिया, सरैया, खरैया समेत दियारा में बसे कई गांव के लोगों को पानी में घुस कर आना जाना पड़ रहा है। दियारा में बोई गई फसल डूब जाने से किसान चिंतित है। किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी भले ही हट जाए, लेकिन फसल जो एक सप्ताह से डूबी हुई है वह तो बर्बाद हो ही गई। सबसे बड़ी परेशानी पशुओं के चारा को लेकर है। गांव वालों का कहना है कि दियारा में बसे सभी गांव बाढ़ से प्रभावित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के लोग अभी तक हाल चाल लेने तक नही पहुंचे। यही हाल पशुओं के डॉक्टर का है उनका भी कही अता पता नही है। जबकि बाढ़ के समय पशुओं को हर वर्ष टीका लगाया जाता रहा है। एसडीएम इंद्रभान तिवारी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ से घिरे गांव में पहुंच कर लोगों की हर संभव मदद करे।
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