{"_id":"58c97e2b4f1c1b4c7d32a430","slug":"shivamoorats-cabbage-seeds-are-being-spread-in-many-regions","type":"story","status":"publish","title_hn":" शिवमूरत के गोभी के बीज कई प्रदेशों में मचा रहे हैं धूम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिवमूरत के गोभी के बीज कई प्रदेशों में मचा रहे हैं धूम
श्ााेभ्ात कुमार पांडेय//Sant Kabir Nagar
Updated Wed, 15 Mar 2017 11:17 PM IST
विज्ञापन
शिवमूरत मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेती से मुंह मोड़ रहे युवाओं और किसानों के लिए 72 वर्षीय शिवमूरत मौर्य नजीर हैं। इनके द्वारा देशी विधि से तैयार गोभी के बीज छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम और मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों में धूम मचा रहे हैं।
धनघटा तहसील क्षेत्र के नावन कला गांव निवासी किसान शिवमूरत के पास महज डेढ़ एकड़ खेती है। वे इसी में गोभी बीजों को तैयार करते हैं। शिवमूरत के अनुसार अगैती, मध्यम और पिछेती तीनों तरह के गोभी बीजों का उत्पादन करते हैं। वर्ष 1990 में उन्होंने धनघटा निवासी रामबचन मौर्य की प्रेरणा से यह कार्य शुरू किया था। बीज उत्पादन के लिए पहले वे पाली टर्नल के माध्यम से छाया की व्यवस्था करते हैं। फिर एक मीटर चौड़ी बेड बनाते है। मिट्टी भुरभुरी होने पर बीज बिखेरकर आधी इंच गहराई की मिट्टी मिलाते हैं। पांच दिन में बीज अंकुरित हो जाता है। अगैती फूलगोभी 35-40 दिन में तैयार हो जाती है।
यह स्वाद में उम्दा होने के साथ-साथ ही कीटनाशक और सेहत के लिए लाभकारी भी है। लेट वैरायटी गोभी 25 से 30 दिन में तैयार हो जाती है। एक साल में वह 60 से 80 किलोग्राम तक गोभी बीज का उत्पादन करते हैं। बिक्री के लिए वे शिवमूरत मौर्य सीड्स के नाम से 50-50 ग्राम के पैकेट बनाते हैं। इसे वे 2000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री करते हैं। जबकि बाजार में गोभी के 1200 से 3000 रुपये के बीच हैं। बीज का एक खेप तैयार करने में करीब आठ माह लगता है। इस बार छत्तीसगढ़, उड़ीसा और मध्य प्रदेश से करीब 70 किलोग्राम फूलगोभी बीज का डिमांड आयी थी। शुरूआती दौर में वे घूम-घूम कर निशुल्क किसानों में बांटते थे।
विज्ञापन
वर्ष 2000 तक वे नागालैंड और आसाम जाकर किसानों को बीज देते थे और फिर वहां से डिमांड आने लगी। उनके दो बेटे निरंजन देव और यज्ञदेव हैं। ये दोनों देव रिपेयरिंग नाम से कंप्यूटर, लैपटॉप आदि का सर्विस सेंटर संचालित करते हैं। खाली समय में ये दोनों भी पिता का सहयोग करते हैं। प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार दूबे बताते हैं कि एक ओर जहां देसी बीजों का तेजी से लोप हो रहा है, उनकी जगह टरमिनेटेड सीड ले रहे हैं। इससे पारंपरिक बीजों के साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र को भी खतरा पैदा हो रहा है।
बीज खरीदने में किसानों की लागत भी बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में नावन कला गांव के किसान शिवमूरत जिस तरह देसी बीजों के ताकत का एहसास करा रहे हैं, वह किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उद्यान विभाग की तरफ से उन्हें 1995 में सर्वश्रेष्ठ बीज उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया था। जबकि 2010 में डीएम ने भी इस कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया था। साथ ही उद्यान निदेशालय के द्वारा शिवमूरत मौर्य को बीज उत्पादन के लिए लाइसेंस भी जारी हुआ है।
विज्ञापन
धनघटा तहसील क्षेत्र के नावन कला गांव निवासी किसान शिवमूरत के पास महज डेढ़ एकड़ खेती है। वे इसी में गोभी बीजों को तैयार करते हैं। शिवमूरत के अनुसार अगैती, मध्यम और पिछेती तीनों तरह के गोभी बीजों का उत्पादन करते हैं। वर्ष 1990 में उन्होंने धनघटा निवासी रामबचन मौर्य की प्रेरणा से यह कार्य शुरू किया था। बीज उत्पादन के लिए पहले वे पाली टर्नल के माध्यम से छाया की व्यवस्था करते हैं। फिर एक मीटर चौड़ी बेड बनाते है। मिट्टी भुरभुरी होने पर बीज बिखेरकर आधी इंच गहराई की मिट्टी मिलाते हैं। पांच दिन में बीज अंकुरित हो जाता है। अगैती फूलगोभी 35-40 दिन में तैयार हो जाती है।
विज्ञापन
यह स्वाद में उम्दा होने के साथ-साथ ही कीटनाशक और सेहत के लिए लाभकारी भी है। लेट वैरायटी गोभी 25 से 30 दिन में तैयार हो जाती है। एक साल में वह 60 से 80 किलोग्राम तक गोभी बीज का उत्पादन करते हैं। बिक्री के लिए वे शिवमूरत मौर्य सीड्स के नाम से 50-50 ग्राम के पैकेट बनाते हैं। इसे वे 2000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री करते हैं। जबकि बाजार में गोभी के 1200 से 3000 रुपये के बीच हैं। बीज का एक खेप तैयार करने में करीब आठ माह लगता है। इस बार छत्तीसगढ़, उड़ीसा और मध्य प्रदेश से करीब 70 किलोग्राम फूलगोभी बीज का डिमांड आयी थी। शुरूआती दौर में वे घूम-घूम कर निशुल्क किसानों में बांटते थे।
विज्ञापन
वर्ष 2000 तक वे नागालैंड और आसाम जाकर किसानों को बीज देते थे और फिर वहां से डिमांड आने लगी। उनके दो बेटे निरंजन देव और यज्ञदेव हैं। ये दोनों देव रिपेयरिंग नाम से कंप्यूटर, लैपटॉप आदि का सर्विस सेंटर संचालित करते हैं। खाली समय में ये दोनों भी पिता का सहयोग करते हैं। प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार दूबे बताते हैं कि एक ओर जहां देसी बीजों का तेजी से लोप हो रहा है, उनकी जगह टरमिनेटेड सीड ले रहे हैं। इससे पारंपरिक बीजों के साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र को भी खतरा पैदा हो रहा है।
बीज खरीदने में किसानों की लागत भी बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में नावन कला गांव के किसान शिवमूरत जिस तरह देसी बीजों के ताकत का एहसास करा रहे हैं, वह किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उद्यान विभाग की तरफ से उन्हें 1995 में सर्वश्रेष्ठ बीज उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया था। जबकि 2010 में डीएम ने भी इस कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया था। साथ ही उद्यान निदेशालय के द्वारा शिवमूरत मौर्य को बीज उत्पादन के लिए लाइसेंस भी जारी हुआ है।