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शहीद गणेश शंकर पंचतत्व में विलीन

Tue, 20 Sep 2016 11:58 PM IST
Sant Kabir Nagar
Sant Kabir Nagar Updated Tue, 20 Sep 2016 11:58 PM IST
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Shaheed Ganesh Shankar cremated
शहीद गणेश शंकर का पार्थिव शरीर घूरापाली पहुंचने पर सलामी देते सेना और प्रशासन के अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के उड़ी में सेना के 12 ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमले में शहीद हुए घूरापाली निवासी गणेश शंकर यादव का शव लेकर बिहार रेजीमेंट के अफसर मंगलवार दोपहर को उनके गांव पहुंचे। वहां शहीद की एक झलक पाने के लिए उनके घर पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। अपराह्न 3.55 बजे पूरे सम्मान के साथ राप्ती के सिसई घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। शहीद की अंत्येष्टि में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से उन्हें अंतिम  विदाई दी। 
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शहादत की सूचना मिलने के बाद से ही लोग शहीद जवान के शव के गांव आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस इंतजार में पूरी रात गांववालों ने जाग कर बिताई। सुबह से ही क्षेत्र के लोग शहीद के घर जुटने लगे। दोपहर 1.18 पर बिहार रेजीमेंट के अधिकारियों की सुरक्षा में शहीद का शव उनके पैतृक गांव पहुंचा तो लोगों की आंखें नम हो गईं। शव लेकर आई एंबुलेंस जैसे ही गांव के अंदर दाखिल हुई लोग इसके साथ लग लिए। 
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हर शख्स देश के लिए जान गंवाने वाले वीर के शव का दर्शन करने की कोशिश में लगा नजर आया। सेना के जवानों ने एंबुलेंस से अपने कंधों पर रखकर जब शहीद के शव को उनके दरवाजे  पर उतारा तो हर किसी के आंसू  छलक पड़े। पत्नी गुड़िया और उनके मासूम बच्चे शहीद का शव देख कर फफक पड़े। करीब चार बजे शहीद का शव गोरखपुर के सिसई घाट स्थित राप्ती नदी के तट पर ले जाया गया। जहां जीआरडी गोरखपुर के सूबेदार कृष्णा बहादुर खड़का के नेतृत्व  में 18 जवानों ने गोलियां दाग उन्हें सलामी दी। इसके बाद सेना व पुलिस के जवानों ने शस्‍त्रों के साथ्‍ा शहीद गणेश शंकर को अंतिम विदाई दी। 
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मां बोली, भारत माता की जय ः शहीद गणेश का शव देखकर एक तरफ जहां सभी की आंखों से आंसू निकल रहे थे, वहीं उनकी 65 वर्षीय मां  कलावती देवी ने अपने लाल के पार्थिव शरीर को देखकर भारत माता जय बोलकर उससे लिपटकर रो पड़ीं। उनका कहना था कि उन्होंने एक होनहार वीर बेटा खो दिया।  कुछ दिन पहले ही फोनवा पर बेटा गणेश बतिया कइले रहल। हम ना जनली की इ बेटवा से आखिरी बात होई। उन्होंने आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

 

पत्नी बोली, सुहाग छीनने वालों को सिखाएं सबक ः सुधबुध खोकर रो रही शहीद की पत्नी गुड़िया को गांव की महिलाएं संभाल रही थीं। फिर भी पति के लाश से लिपटकर बस एक ही बात कह रही थी कि एक सप्ताह पूर्व पति से बात हुई थी। उन्होंने नई पोस्टिंग होने के कारण कहा था कि जल्द ही छुट्टी पर घर आऊंगा, पर वह इस तरह आएंगे यह न मालूम था। जार-जार रोती बोलीं कि उनका सुहाग उजाड़ने वालों को कड़ा सबक सिखाना चाहिए।

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