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Sant Kabir Nagar News: शहर से गांव तक छुट्टा पशु बन रहे मुसीबत
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शहर के मुखलिसपुर चौराहे पर घूम रहे छुट्टा पशु। संवाद
- फोटो : KHALILABAD
शहर से गांव तक छुट्टा पशु बन रहे मुसीबत
जिले में 72 पशु आश्रय केंद्र, इनमें 2926 पशु रखने की व्यवस्था
प्रभावित हो रही यातायात व्यवस्था, फसल को पहुंचा रहे नुकसान
संतकबीरनगर। शासन ने छुट्टा पशुुुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्रों में रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु विचरण करते दिख जाएंगे। इससे शहर में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है तो ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशु फसल को बर्बाद कर रहे हैं। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में छुट्टा पशुओं को रखने के लिए 72 पशु आश्रय केंद्र हैं। इनमें 2926 पशुओं को रखने की क्षमता है। इसके सापेक्ष 3162 पशु केंद्रों में हैं। अब पशु आश्रय केंद्रों में छुट्टा पशुओं की रखने की जगह नहीं रह गई है।
छुट्टा पशु सड़क पर कहीं भी बैठ जा रहे हैं। इन्हें हटाने का प्रयास करने पर हमलावार हो जाते हैं। सब्जी लगाने वाले व ठेला वाले इनसे काफी परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल को झुंड में घूम रहे छुट्टा पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को ठंड के मौसम में रातभर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
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पिछले दिनों मेंहदावल कस्बे में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। पशुओं को बढ़या ठाठर स्थित पशु आश्रय केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन वहां की व्यवस्था देखने वाले अब और पशुुओं को रखने से मना कर दिया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय यादव ने बताया कि पशु आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु पहले से हैं। ऐसे में पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र में रखने में दिक्कत आ रही है। फिर भी छुट्टा पशुओं के कारण हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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जिले में 72 पशु आश्रय केंद्र, इनमें 2926 पशु रखने की व्यवस्था
प्रभावित हो रही यातायात व्यवस्था, फसल को पहुंचा रहे नुकसान
संतकबीरनगर। शासन ने छुट्टा पशुुुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्रों में रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु विचरण करते दिख जाएंगे। इससे शहर में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है तो ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशु फसल को बर्बाद कर रहे हैं। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में छुट्टा पशुओं को रखने के लिए 72 पशु आश्रय केंद्र हैं। इनमें 2926 पशुओं को रखने की क्षमता है। इसके सापेक्ष 3162 पशु केंद्रों में हैं। अब पशु आश्रय केंद्रों में छुट्टा पशुओं की रखने की जगह नहीं रह गई है।
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छुट्टा पशु सड़क पर कहीं भी बैठ जा रहे हैं। इन्हें हटाने का प्रयास करने पर हमलावार हो जाते हैं। सब्जी लगाने वाले व ठेला वाले इनसे काफी परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल को झुंड में घूम रहे छुट्टा पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को ठंड के मौसम में रातभर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
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पिछले दिनों मेंहदावल कस्बे में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। पशुओं को बढ़या ठाठर स्थित पशु आश्रय केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन वहां की व्यवस्था देखने वाले अब और पशुुओं को रखने से मना कर दिया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय यादव ने बताया कि पशु आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक पशु पहले से हैं। ऐसे में पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र में रखने में दिक्कत आ रही है। फिर भी छुट्टा पशुओं के कारण हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।