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Sant Kabir Nagar News: दुष्कर्म के दोषी डाॅक्टर को सात वर्ष का कठोर कारावास
Thu, 31 Aug 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 31 Aug 2023 01:11 AM IST
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- 25 अप्रैल 2015 को इलाज कराने गई महिला से डॉक्टर ने की दी हैवानियत
- छेड़खानी में दर्ज हुआ था केस, विवेचना के दौरान बढ़ाई गई थी दुष्कर्म की धारा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। आठ साल पहले धनघटा क्षेत्र में क्लीनिक में मरीज से दुष्कर्म के मामले में बुधवार को कोर्ट ने डॉक्टर को सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। मामला 25 अप्रैल 2015 का है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय काशिफ शेख ने अर्थदंड अदा न करने पर आठ माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है। अर्थदंड की आधी रकम प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दी जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक अच्युतानंद शुक्ला और अधिवक्ता अखिलेश्वर राय ने बताया कि महुली क्षेत्र की पीड़ित महिला ने 25 अप्रैल 2015 को धनघटा पुलिस को तहरीर दी। उसमें कहा कि वह अपने पति के साथ इलाज कराने धनघटा क्षेत्र के लोहरैया चौराहे पर डाॅक्टर श्याम नारायन पांडेय की क्लीनिक पर गई थी। डाॅक्टर उसे चेकअप करने के लिए अंदर ले गए। वहां ले जाने के बाद दुष्कर्म का प्रयास करने लगे। जबकि उसके पति बाहर कमरे में बैठे थे। उसके रोने की आवाज सुनकर पति दौड़कर अंदर पहुंच गए। डाॅक्टर इस बात को कबूल भी करते रहे हैं। तहरीर के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर श्याम नारायन पांडेय निवासी रहदौली थाना उरुवा जनपद गोरखपुर हाल पता लोहरैया चौराहा धनघटा के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज किया।
एसआई अवधेश पांडेय ने विवेचना शुरू की। उन्होंने पीड़िता के बयान और साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता समेत चार गवाहों ने गवाही दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि सभ्य पेशे में होते हुए डाॅक्टर ने जघन्य अपराध किया है। आरोपी 70 वर्ष का वृद्ध है। कोर्ट ने दोषसिद्ध पाए जाने पर डाॅक्टर को सात वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25,000 रुपये जुर्माना लगाया।
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इंसेट
दोषी डॉक्टर को सजा मिली तो मन को मिला सुकून
कोर्ट के फैसले की जानकारी होने पर पीड़िता के पति ने खुशी जाहिर की। कहा कि दोषी डॉक्टर को सजा मिलने से मन को सुकून मिला है। उन्होंने कहा कि आठ साल तक मन कुंठित था। घटना का दृश्य मानस पटल पर घूमता रहता था। पत्नी जब भी परेशान होती थी तो उसे समझाता था कि कोर्ट से न्याय जरूर मिलेगा। कोर्ट ने न्याय किया है। इससे मन को संतोष हुआ है। इस तरह का कृत्य करने की मंशा रखने वालों के लिए यह फैसला सबक है।
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- छेड़खानी में दर्ज हुआ था केस, विवेचना के दौरान बढ़ाई गई थी दुष्कर्म की धारा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। आठ साल पहले धनघटा क्षेत्र में क्लीनिक में मरीज से दुष्कर्म के मामले में बुधवार को कोर्ट ने डॉक्टर को सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। मामला 25 अप्रैल 2015 का है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय काशिफ शेख ने अर्थदंड अदा न करने पर आठ माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है। अर्थदंड की आधी रकम प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दी जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक अच्युतानंद शुक्ला और अधिवक्ता अखिलेश्वर राय ने बताया कि महुली क्षेत्र की पीड़ित महिला ने 25 अप्रैल 2015 को धनघटा पुलिस को तहरीर दी। उसमें कहा कि वह अपने पति के साथ इलाज कराने धनघटा क्षेत्र के लोहरैया चौराहे पर डाॅक्टर श्याम नारायन पांडेय की क्लीनिक पर गई थी। डाॅक्टर उसे चेकअप करने के लिए अंदर ले गए। वहां ले जाने के बाद दुष्कर्म का प्रयास करने लगे। जबकि उसके पति बाहर कमरे में बैठे थे। उसके रोने की आवाज सुनकर पति दौड़कर अंदर पहुंच गए। डाॅक्टर इस बात को कबूल भी करते रहे हैं। तहरीर के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर श्याम नारायन पांडेय निवासी रहदौली थाना उरुवा जनपद गोरखपुर हाल पता लोहरैया चौराहा धनघटा के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज किया।
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एसआई अवधेश पांडेय ने विवेचना शुरू की। उन्होंने पीड़िता के बयान और साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता समेत चार गवाहों ने गवाही दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि सभ्य पेशे में होते हुए डाॅक्टर ने जघन्य अपराध किया है। आरोपी 70 वर्ष का वृद्ध है। कोर्ट ने दोषसिद्ध पाए जाने पर डाॅक्टर को सात वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25,000 रुपये जुर्माना लगाया।
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दोषी डॉक्टर को सजा मिली तो मन को मिला सुकून
कोर्ट के फैसले की जानकारी होने पर पीड़िता के पति ने खुशी जाहिर की। कहा कि दोषी डॉक्टर को सजा मिलने से मन को सुकून मिला है। उन्होंने कहा कि आठ साल तक मन कुंठित था। घटना का दृश्य मानस पटल पर घूमता रहता था। पत्नी जब भी परेशान होती थी तो उसे समझाता था कि कोर्ट से न्याय जरूर मिलेगा। कोर्ट ने न्याय किया है। इससे मन को संतोष हुआ है। इस तरह का कृत्य करने की मंशा रखने वालों के लिए यह फैसला सबक है।