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Sant Kabir Nagar News: फेल हो गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना
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मगहर आमी नदी में गिरता गंदा पानी।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
फेल हो गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना
- खलीलाबाद व मगहर में लगाने का था प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मगहर में विकास के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं, लेकिन आमी नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। नगरीय क्षेत्र का गंदा पानी और औद्योगिक इकाइयों का कचरा आमी में गिर रहा है। इसे रोकने के लिए बनाई गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना फेल हो गई है।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित हो चुका है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से समय-समय पर आंदोलन चलता रहा है। करीब चार साल पहले इसका संज्ञान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ली।
एनजीटी के हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम छोर तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान खलीलाबाद डाक बंगले पर तत्कालीन डीएम की मौजूदगी में कमेटी ने नदी के प्रदूषण के मामले पर चर्चा की थी।
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टीम ने गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे।
इसके पीछे मंशा थी कि खलीलाबाद और मगहर कस्बे से प्रतिदिन निकलने वाला प्रदूषित जल सीधे आमी नदी में न जाए। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खुदाई आदि के भी निर्देश दिए थे, लेकिन यह योजना फेल हो गई है। अभी तक न तो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा और न ही पौधरोपण आदि के कार्य हुए।
इस संबंध में जल निगम के अधिशाषी अभियंता संजय जायसवाल ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनी थी, लेकिन अब इस योजना की जगह प्यूरीफायर लगाने की योजना है, जिसकी जिम्मेदारी दूसरी कार्यदायी संस्था को सौंपी गई है।
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- खलीलाबाद व मगहर में लगाने का था प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मगहर में विकास के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं, लेकिन आमी नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। नगरीय क्षेत्र का गंदा पानी और औद्योगिक इकाइयों का कचरा आमी में गिर रहा है। इसे रोकने के लिए बनाई गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना फेल हो गई है।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित हो चुका है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
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इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से समय-समय पर आंदोलन चलता रहा है। करीब चार साल पहले इसका संज्ञान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ली।
एनजीटी के हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम छोर तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान खलीलाबाद डाक बंगले पर तत्कालीन डीएम की मौजूदगी में कमेटी ने नदी के प्रदूषण के मामले पर चर्चा की थी।
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टीम ने गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे।
इसके पीछे मंशा थी कि खलीलाबाद और मगहर कस्बे से प्रतिदिन निकलने वाला प्रदूषित जल सीधे आमी नदी में न जाए। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खुदाई आदि के भी निर्देश दिए थे, लेकिन यह योजना फेल हो गई है। अभी तक न तो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा और न ही पौधरोपण आदि के कार्य हुए।
इस संबंध में जल निगम के अधिशाषी अभियंता संजय जायसवाल ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनी थी, लेकिन अब इस योजना की जगह प्यूरीफायर लगाने की योजना है, जिसकी जिम्मेदारी दूसरी कार्यदायी संस्था को सौंपी गई है।