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Sant Kabir Nagar News: कबीर आश्रम भूमि विवाद की जांच के लिए पहुंचे एसडीएम व सीओ
Thu, 11 Jun 2026 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:38 AM IST
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महुली। हरपुर स्थित कबीर दास मठ सद्गुरु कबीर आश्रम मंदिर की भूमि पर कथित अतिक्रमण और विवादित सीमांकन के मामले में मंगलवार को प्रशासनिक अमला सक्रिय नजर आया। महंत हरीश चंद्र दास की शिकायत पर एसडीएम और सीओ राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थलीय निरीक्षण कर मामले की जांच की। अधिकारियों ने संबंधित पक्षों तथा राजस्व कर्मियों से जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
महंत हरीश चंद्र दास ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि धार्मिक कार्यक्रमों के सिलसिले में बाहर रहने के दौरान तीन जून को उनकी अनुपस्थिति में राजस्व निरीक्षक द्वारा आश्रम की भूमि पर सीमा-चिन्ह (पत्थर) गाड़ दिया गया। उनका कहना है कि भूमि पहले से ही मेड़बंद और स्पष्ट रूप से सीमांकित थी, ऐसे में नए सीमा-चिह्न लगाने की आवश्यकता नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न तो इसकी कोई सूचना दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
महंत के अनुसार, लौटने पर उन्हें जानकारी मिली कि आश्रम की दक्षिण दिशा स्थित भूमि पर एक व्यक्ति द्वारा नल गाड़कर और घेराबंदी कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मंदिर की भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि विपक्षी पक्ष का एक रिश्तेदार तहसील कार्यालय में कार्यरत होने के कारण मामले को प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है। इसी आधार पर उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की थी।
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शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम और सीओ ने मौके पर पहुंचकर भूमि की स्थिति का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सीमांकन संबंधी अभिलेखों की जानकारी ली तथा राजस्व विभाग के कर्मचारियों से तथ्य जुटाए। प्रशासन अब जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
महंत हरीश चंद्र दास ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि धार्मिक कार्यक्रमों के सिलसिले में बाहर रहने के दौरान तीन जून को उनकी अनुपस्थिति में राजस्व निरीक्षक द्वारा आश्रम की भूमि पर सीमा-चिन्ह (पत्थर) गाड़ दिया गया। उनका कहना है कि भूमि पहले से ही मेड़बंद और स्पष्ट रूप से सीमांकित थी, ऐसे में नए सीमा-चिह्न लगाने की आवश्यकता नहीं थी।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न तो इसकी कोई सूचना दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
महंत के अनुसार, लौटने पर उन्हें जानकारी मिली कि आश्रम की दक्षिण दिशा स्थित भूमि पर एक व्यक्ति द्वारा नल गाड़कर और घेराबंदी कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मंदिर की भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि विपक्षी पक्ष का एक रिश्तेदार तहसील कार्यालय में कार्यरत होने के कारण मामले को प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है। इसी आधार पर उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की थी।
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शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम और सीओ ने मौके पर पहुंचकर भूमि की स्थिति का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सीमांकन संबंधी अभिलेखों की जानकारी ली तथा राजस्व विभाग के कर्मचारियों से तथ्य जुटाए। प्रशासन अब जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।