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Sant Kabir Nagar News: स्कूली वाहन भर रहे उड़ान, बच्चों के जान की नहीं परवाह
Fri, 18 Oct 2024 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 18 Oct 2024 11:31 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। अच्छी शिक्षा देने के नाम पर जगह-जगह मोंटेसरी स्कूल तेजी के साथ संचालित हो रहे हैं। स्कूलों पर बच्चों की तादाद अच्छी हो इसके लिए वाहन का भी प्रबंध किए हैं। लेकिन जिन वाहनों से बच्चों को विद्यालय ले जाया ले आया जाता है। उन वाहनों का हालात खटारा है। उनके ब्रेक और स्टेरिंग कब कहां फेल हो जा इसका कोई नहीं होता है।
धनघटा क्षेत्र में 50 से अधिक मांटेसरी स्कूल संचालित होते हैं। तीन विद्यालय तो नियमानुसार बसों का संचालन बच्चों को विद्यालय ले आने ले जाने का करते हैं। शेष या तो टैम्पो या मैजिक चलवा रहे हैं। 10 से 15 किलोमीटर दूरी तय करने वाले यह वाहन कब और कहां जवाब दे दे। इसका कोई ठिकाना रहता है। जोखिम से बेपरवाह बच्चे इन वाहनों में यात्रा तो जरूर कर रहे हैं। लेकिन उनके परिजन और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। जब कहीं पर कोई हादसा हो जाता है। खानापूर्ति के नाम पर कुछ दिनों तक वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। उसके बाद फिर चुप्पी साध ली जाती है। ऐसा भी नहीं है खटारा वाहनों में बच्चों को ढोने वाले विद्यालय भाड़ा कम वसूल रहे हैं। एआरटीओ प्रियवंदा सिंह ने बताया कि अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को सीज किया जाएगा।
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धनघटा। अच्छी शिक्षा देने के नाम पर जगह-जगह मोंटेसरी स्कूल तेजी के साथ संचालित हो रहे हैं। स्कूलों पर बच्चों की तादाद अच्छी हो इसके लिए वाहन का भी प्रबंध किए हैं। लेकिन जिन वाहनों से बच्चों को विद्यालय ले जाया ले आया जाता है। उन वाहनों का हालात खटारा है। उनके ब्रेक और स्टेरिंग कब कहां फेल हो जा इसका कोई नहीं होता है।
धनघटा क्षेत्र में 50 से अधिक मांटेसरी स्कूल संचालित होते हैं। तीन विद्यालय तो नियमानुसार बसों का संचालन बच्चों को विद्यालय ले आने ले जाने का करते हैं। शेष या तो टैम्पो या मैजिक चलवा रहे हैं। 10 से 15 किलोमीटर दूरी तय करने वाले यह वाहन कब और कहां जवाब दे दे। इसका कोई ठिकाना रहता है। जोखिम से बेपरवाह बच्चे इन वाहनों में यात्रा तो जरूर कर रहे हैं। लेकिन उनके परिजन और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। जब कहीं पर कोई हादसा हो जाता है। खानापूर्ति के नाम पर कुछ दिनों तक वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। उसके बाद फिर चुप्पी साध ली जाती है। ऐसा भी नहीं है खटारा वाहनों में बच्चों को ढोने वाले विद्यालय भाड़ा कम वसूल रहे हैं। एआरटीओ प्रियवंदा सिंह ने बताया कि अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को सीज किया जाएगा।
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