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आरक्षण ने बदला चुनावी समीकरण, कद्दावर नेता तलाश रहे दावेदार
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आरक्षण ने बदला चुनावी समीकरण, कद्दावर नेता तलाश रहे दावेदार
- आरक्षण सूची की पारदर्शिता पर भी लोगों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद संभावित दावेदार उभर कर सामने आने लगे हैं। गांव से लेकर कस्बे तक लोग पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची पर चर्चा करते सुने गए। प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख पदों पर आरक्षण की जद में आई सीटों पर पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे कद्दावर मायूस हो गए हैं। अब अपने करीबियों पर दांव आजमाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
ग्राम प्रधान पदों के लिए 754 ग्राम पंचायत की आरक्षण की स्थिति यह है कि 57 ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति महिला, 99 ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति, 71 ग्राम पंचायत पिछड़ी जाति की महिला, 134 ग्राम पंचायत पिछड़ा वर्ग, 126 ग्राम पंचायत महिला और 267 ग्राम पंचायत अनारक्षित हुई है। आरक्षण की जद में आई ग्राम पंचायत में पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे कद्दावर नेता उदास हो गए हैं।
जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों में 11 सीटें अनारक्षित है। इसमें सेमरियावां ब्लॉक की पांचों सीट और बघौली ब्लॉक की तीनों सीट आरक्षित हो गई है। खास कर इन दोनों ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी के कद्दावर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यहां अब लोग अपने करीबियों पर दांव लगाने की तैयारी शुरू कर दिए हैं।
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वहीं जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों पर चुनाव होना है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण हुआ है। सीट आरक्षित होने पर पिछड़ा वर्ग के कई चेहरे अभी से तैयारी शुरू कर दिए हैं। जबकि ब्लॉक प्रमुख पद की तीन सीटें अनारक्षित है। छह सीटें आरक्षण की जद में आई है। ऐसे में आरक्षण की जद में आई सीटों पर कद्दावर अपने चहेतों को चुनाव में उतार कर कुर्सी हथियाने की ओर जुगत लगा रहे है।
वहीं आरक्षण की सूची में गड़बड़ियों की शिकायत भी डीएम से लेकर डीपीआरओ और सीडीओ तक पहुंच रही है। निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद का आरोप है कि आरक्षण की सूची तैयार करने में नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है। वर्ष 2010 में जिस सामान्य सीट पर वह चुनाव जीते थे, उसे उसी वर्ष के आरक्षण की स्थिति में पिछड़ा वर्ग दर्शा दिया गया है। वर्ष 2010 में 27 सीटें थी, जबकि आरक्षण सूची तैयार करने के दौरान सिर्फ 22 सीटों को ही प्रदर्शित किया गया है। इसकी शिकायत पर डीएम से लेकर डीपीआरओ तक करेंगे। इतना ही नहीं वह हाईकोर्ट तक जाएंगे। सपा के वरिष्ठ नेता जयराम पांडेय ने भी आरक्षण की सूची पर सवाल उठाया है और हाईकोर्ट तक जाने का मन बना चुके हैं। कई गांवों के प्रधान पद आरक्षण पर भी लोग अंगुली उठा रहे हैं।
इस संबंध में डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र ने बताया कि नियम संगत तरीके से चक्रानुक्रम के हिसाब से पूरी पारदर्शिता के साथ आरक्षण सूची तैयार की गई है। जिसे कोई आपत्ति है तो वह आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराएं। डीएम की ओर से गठित समिति आपत्तियों का परीक्षण कर निस्तारण करेंगे। उसके बाद 14 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
आरक्षण सूची पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार कर प्रकाशित कराई गई है। यदि किसी कोई आपत्ति है तो वह आवेदन कर आपत्ति दर्ज कराएं। समिति आपत्ति का परीक्षण करके शिकायत का निस्तारण करेंगी। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।
- दिव्या मित्तल, डीएम।
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- आरक्षण सूची की पारदर्शिता पर भी लोगों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद संभावित दावेदार उभर कर सामने आने लगे हैं। गांव से लेकर कस्बे तक लोग पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची पर चर्चा करते सुने गए। प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख पदों पर आरक्षण की जद में आई सीटों पर पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे कद्दावर मायूस हो गए हैं। अब अपने करीबियों पर दांव आजमाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
ग्राम प्रधान पदों के लिए 754 ग्राम पंचायत की आरक्षण की स्थिति यह है कि 57 ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति महिला, 99 ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति, 71 ग्राम पंचायत पिछड़ी जाति की महिला, 134 ग्राम पंचायत पिछड़ा वर्ग, 126 ग्राम पंचायत महिला और 267 ग्राम पंचायत अनारक्षित हुई है। आरक्षण की जद में आई ग्राम पंचायत में पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे कद्दावर नेता उदास हो गए हैं।
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जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों में 11 सीटें अनारक्षित है। इसमें सेमरियावां ब्लॉक की पांचों सीट और बघौली ब्लॉक की तीनों सीट आरक्षित हो गई है। खास कर इन दोनों ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी के कद्दावर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यहां अब लोग अपने करीबियों पर दांव लगाने की तैयारी शुरू कर दिए हैं।
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वहीं जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों पर चुनाव होना है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण हुआ है। सीट आरक्षित होने पर पिछड़ा वर्ग के कई चेहरे अभी से तैयारी शुरू कर दिए हैं। जबकि ब्लॉक प्रमुख पद की तीन सीटें अनारक्षित है। छह सीटें आरक्षण की जद में आई है। ऐसे में आरक्षण की जद में आई सीटों पर कद्दावर अपने चहेतों को चुनाव में उतार कर कुर्सी हथियाने की ओर जुगत लगा रहे है।
वहीं आरक्षण की सूची में गड़बड़ियों की शिकायत भी डीएम से लेकर डीपीआरओ और सीडीओ तक पहुंच रही है। निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद का आरोप है कि आरक्षण की सूची तैयार करने में नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है। वर्ष 2010 में जिस सामान्य सीट पर वह चुनाव जीते थे, उसे उसी वर्ष के आरक्षण की स्थिति में पिछड़ा वर्ग दर्शा दिया गया है। वर्ष 2010 में 27 सीटें थी, जबकि आरक्षण सूची तैयार करने के दौरान सिर्फ 22 सीटों को ही प्रदर्शित किया गया है। इसकी शिकायत पर डीएम से लेकर डीपीआरओ तक करेंगे। इतना ही नहीं वह हाईकोर्ट तक जाएंगे। सपा के वरिष्ठ नेता जयराम पांडेय ने भी आरक्षण की सूची पर सवाल उठाया है और हाईकोर्ट तक जाने का मन बना चुके हैं। कई गांवों के प्रधान पद आरक्षण पर भी लोग अंगुली उठा रहे हैं।
इस संबंध में डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र ने बताया कि नियम संगत तरीके से चक्रानुक्रम के हिसाब से पूरी पारदर्शिता के साथ आरक्षण सूची तैयार की गई है। जिसे कोई आपत्ति है तो वह आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराएं। डीएम की ओर से गठित समिति आपत्तियों का परीक्षण कर निस्तारण करेंगे। उसके बाद 14 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
आरक्षण सूची पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार कर प्रकाशित कराई गई है। यदि किसी कोई आपत्ति है तो वह आवेदन कर आपत्ति दर्ज कराएं। समिति आपत्ति का परीक्षण करके शिकायत का निस्तारण करेंगी। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।
- दिव्या मित्तल, डीएम।