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Sant Kabir Nagar News: कार सेवकों पर पुलिस ने ढाया था जुल्म, नहीं टूटे थे हौसले
Sat, 20 Jan 2024 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 20 Jan 2024 12:39 AM IST
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मेंहदावल के कार सेवकों की जुबानी
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन 1990 में चरम पर था। एक तरफ उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार कार सेवकों को अयोध्या पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर जेल में डालने का हुक्म दे रखी थी। दूसरी तरफ राम भक्तों की गिरफ्तारी के बाद भी विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसे संगठनों के आह्वान पर लोग 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या पहुंचने के लिए आतुर दिखे। मेंहदावल क्षेत्र में संगठन का नेतृत्व करने वाले कई ऊर्जावान साथियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। उसके बाद भी राम मंदिर आंदोलन की गति कहीं से धीमी नहीं पड़ी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ता 55 वर्षीय प्रेमचंद पंसारी ने बताया कि 23 अक्तूबर 1990 को जब वह दुकान पर बैठे थे तो मेंहदावल पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और थाने लाई। उस समय थाना परिसर में 13 से 14 कार सेवक पुलिस हिरासत में थे। थानाध्यक्ष समेत पुलिस कर्मियों का व्यवहार कार सेवकों के प्रति अच्छा नहीं था। गाली गुप्ता देने के साथ ही हिरासत में लिए गए राम भक्तों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। लेकिन राम भक्त सत्ता के दबाव में पुलिस कर्मियों के दुर्व्यवहार को नजरअंदाज कर थाना परिसर में ही धरने पर बैठकर जय श्री राम के नारे के साथ विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिए। हंगामा बढ़ते देख पुलिस कर्मियों ने हम सभी को एक वाहन में बैठक बस्ती में स्थित एक अस्थायी जेल में पहुंचा दिया गया।
व्यापारी दिलीप गुप्ता ने बताया कि 30 अक्तूबर 1990 को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने निहत्थे राम भक्तों पर अयोध्या में गोली चलवा कर मानवता को शर्मसार किया। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नेतृत्व के आह्वान पर हम सभी राम भक्त अयोध्या प्रदेश सरकार के क्रूर विचारों के विरोध में गिरफ्तारी देने पहुंचे। मणिराम छावनी, अखाड़ा परिषद समेत अयोध्या के कई स्थान पर निहत्थे राम भक्तों पर गोली चलाई जाने का अवशेष साफ दिखा। सब कुछ जानकार मन बहुत द्रवित हुआ। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े होने के कारण तत्कालीन सरकार तथा पुलिस प्रशासन के बर्बरता की कहानी अयोध्या ही नहीं बल्कि सरजू नदी भी बयां कर रही थीं। आज राम मंदिर निर्माण के साथ ही रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। हमारे घरों में इसको लेकर उत्सव का माहौल है। 22 जनवरी को घर से लेकर मोहल्ले में स्थित मंदिरों को सजाने-संवारने का काम किया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन 1990 में चरम पर था। एक तरफ उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार कार सेवकों को अयोध्या पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर जेल में डालने का हुक्म दे रखी थी। दूसरी तरफ राम भक्तों की गिरफ्तारी के बाद भी विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसे संगठनों के आह्वान पर लोग 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या पहुंचने के लिए आतुर दिखे। मेंहदावल क्षेत्र में संगठन का नेतृत्व करने वाले कई ऊर्जावान साथियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। उसके बाद भी राम मंदिर आंदोलन की गति कहीं से धीमी नहीं पड़ी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ता 55 वर्षीय प्रेमचंद पंसारी ने बताया कि 23 अक्तूबर 1990 को जब वह दुकान पर बैठे थे तो मेंहदावल पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और थाने लाई। उस समय थाना परिसर में 13 से 14 कार सेवक पुलिस हिरासत में थे। थानाध्यक्ष समेत पुलिस कर्मियों का व्यवहार कार सेवकों के प्रति अच्छा नहीं था। गाली गुप्ता देने के साथ ही हिरासत में लिए गए राम भक्तों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। लेकिन राम भक्त सत्ता के दबाव में पुलिस कर्मियों के दुर्व्यवहार को नजरअंदाज कर थाना परिसर में ही धरने पर बैठकर जय श्री राम के नारे के साथ विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिए। हंगामा बढ़ते देख पुलिस कर्मियों ने हम सभी को एक वाहन में बैठक बस्ती में स्थित एक अस्थायी जेल में पहुंचा दिया गया।
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व्यापारी दिलीप गुप्ता ने बताया कि 30 अक्तूबर 1990 को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने निहत्थे राम भक्तों पर अयोध्या में गोली चलवा कर मानवता को शर्मसार किया। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नेतृत्व के आह्वान पर हम सभी राम भक्त अयोध्या प्रदेश सरकार के क्रूर विचारों के विरोध में गिरफ्तारी देने पहुंचे। मणिराम छावनी, अखाड़ा परिषद समेत अयोध्या के कई स्थान पर निहत्थे राम भक्तों पर गोली चलाई जाने का अवशेष साफ दिखा। सब कुछ जानकार मन बहुत द्रवित हुआ। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े होने के कारण तत्कालीन सरकार तथा पुलिस प्रशासन के बर्बरता की कहानी अयोध्या ही नहीं बल्कि सरजू नदी भी बयां कर रही थीं। आज राम मंदिर निर्माण के साथ ही रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। हमारे घरों में इसको लेकर उत्सव का माहौल है। 22 जनवरी को घर से लेकर मोहल्ले में स्थित मंदिरों को सजाने-संवारने का काम किया जा रहा है।
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