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Sant Kabir Nagar News: राम भक्तों पर चली गोली पर नहीं टूटा हौसला
Thu, 11 Jan 2024 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 11 Jan 2024 11:36 PM IST
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फोटो सहित
गोली कांड के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर बड़ी संख्या में गिरफ्तारी देने पहुंचे थे अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मेहदावल। राम मंदिर आंदोलन लोगों के लिए जुनून बन गया था। 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या में निहत्थे राम भक्तों पर पुलिस ने गोली चलाई। इससे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रति जन आक्रोश था। गोलीकांड के बाद विश्व हिंदू परिषद समेत सभी संगठनों ने विरोध दर्ज करने के लिए आह्वान किया कि कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचे और गिरफ्तारी दें। इसमें मेंहदावल क्षेत्र के कार सेवक भी पीछे नहीं थे।
मेहदावल नगर के बहवोलिया निवासी अमरनाथ चौबे ने बताया कि उस समय विश्व हिंदू परिषद का संयोजक का दायित्व मेरे ऊपर था। राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। 30 अक्तूबर 1990 को मेहदावल क्षेत्र से बड़ी संख्या में कार सेवक विभिन्न मार्गों से प्रशासन से बचते बचते अयोध्या पहुंचने की तैयारी में जुटे थे।
दीपावली से पूर्व ही राम भक्तों की गिरफ्तारी शुरू हो गई। लोगों को जेल भेजा जाने लगा, लेकिन राम मंदिर का जुनून इस कदर था कि कार्यकर्ता शासन प्रशासन के दमन के बाद भी झुकने को तैयार नहीं थे। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर गोली कांड के विरोध में अयोध्या पहुंचकर गिरफ्तारी देने का आह्वान हुआ।
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उस समय मेंहदावल नगर से पांच बसों में राम भक्त देर शाम अयोध्या पहुंचे। सरयू नदी के किनारे लोगों के रुकने की व्यवस्था थी। दूसरे दिन बजरंग दल प्रमुख विनय कटिहार के संबोधन को सुनने के बाद कार्यकर्ताओं का जत्था राम मंदिर की तरफ बढ़ा। जहां पुलिस प्रशासन ने सभी को हिरासत में लेकर परिवहन निगम की बसों से उन्हें वापस अपने क्षेत्र में भेज दिया।
वहीं, कस्बे के प्रमुख व्यवसायी अवनींद्र जायसवाल ने बताया कि 1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा होने के कारण मोहल्ले में लोगों के साथ बैठक कर आंदोलन की चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस आई और हिरासत में लेने के साथ ही मोहल्ले के ही बृजेश कुमार, बबलू, अनिल कुमार, गोपाल कांदू, रामकुमार शुक्ला को भी थाने लाई। मेंहदावल कस्बे से कुल 14 लोगों की गिरफ्तारी की गई। सारे लोगों को रात में ही बस्ती स्थित अस्थायी जेल पहुंचाया गया। जहां जगह न होने के कारण सुबह 14 राम भक्तों को गोरखपुर राप्ती नगर डिपो स्थित वर्कशॉप जो अस्थायी जेल बनाई गई थी। वहां पहुंचा दिया गया।
बताया कि जेल में ही हम राम भक्त राम मंदिर के पक्ष में नारेबाजी के साथ ही सुबह शाम भजन-कीर्तन कर एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते थे। पुलिस व शासन के जुल्म के बाद भी राम भक्तों के हौसले बुलंद थे। आज राम मंदिर निर्माण का युग चल रहा है भगवान राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। अक्षत के माध्यम से अयोध्या आने का निमंत्रण भी मिला है। अब तो केवल भव्य राम मंदिर दिव्या राम मंदिर देखने का अरमान हर दिन हिलोरे ले रहा है।
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गोली कांड के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर बड़ी संख्या में गिरफ्तारी देने पहुंचे थे अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मेहदावल। राम मंदिर आंदोलन लोगों के लिए जुनून बन गया था। 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या में निहत्थे राम भक्तों पर पुलिस ने गोली चलाई। इससे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रति जन आक्रोश था। गोलीकांड के बाद विश्व हिंदू परिषद समेत सभी संगठनों ने विरोध दर्ज करने के लिए आह्वान किया कि कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचे और गिरफ्तारी दें। इसमें मेंहदावल क्षेत्र के कार सेवक भी पीछे नहीं थे।
मेहदावल नगर के बहवोलिया निवासी अमरनाथ चौबे ने बताया कि उस समय विश्व हिंदू परिषद का संयोजक का दायित्व मेरे ऊपर था। राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। 30 अक्तूबर 1990 को मेहदावल क्षेत्र से बड़ी संख्या में कार सेवक विभिन्न मार्गों से प्रशासन से बचते बचते अयोध्या पहुंचने की तैयारी में जुटे थे।
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दीपावली से पूर्व ही राम भक्तों की गिरफ्तारी शुरू हो गई। लोगों को जेल भेजा जाने लगा, लेकिन राम मंदिर का जुनून इस कदर था कि कार्यकर्ता शासन प्रशासन के दमन के बाद भी झुकने को तैयार नहीं थे। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर गोली कांड के विरोध में अयोध्या पहुंचकर गिरफ्तारी देने का आह्वान हुआ।
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उस समय मेंहदावल नगर से पांच बसों में राम भक्त देर शाम अयोध्या पहुंचे। सरयू नदी के किनारे लोगों के रुकने की व्यवस्था थी। दूसरे दिन बजरंग दल प्रमुख विनय कटिहार के संबोधन को सुनने के बाद कार्यकर्ताओं का जत्था राम मंदिर की तरफ बढ़ा। जहां पुलिस प्रशासन ने सभी को हिरासत में लेकर परिवहन निगम की बसों से उन्हें वापस अपने क्षेत्र में भेज दिया।
वहीं, कस्बे के प्रमुख व्यवसायी अवनींद्र जायसवाल ने बताया कि 1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा होने के कारण मोहल्ले में लोगों के साथ बैठक कर आंदोलन की चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस आई और हिरासत में लेने के साथ ही मोहल्ले के ही बृजेश कुमार, बबलू, अनिल कुमार, गोपाल कांदू, रामकुमार शुक्ला को भी थाने लाई। मेंहदावल कस्बे से कुल 14 लोगों की गिरफ्तारी की गई। सारे लोगों को रात में ही बस्ती स्थित अस्थायी जेल पहुंचाया गया। जहां जगह न होने के कारण सुबह 14 राम भक्तों को गोरखपुर राप्ती नगर डिपो स्थित वर्कशॉप जो अस्थायी जेल बनाई गई थी। वहां पहुंचा दिया गया।
बताया कि जेल में ही हम राम भक्त राम मंदिर के पक्ष में नारेबाजी के साथ ही सुबह शाम भजन-कीर्तन कर एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते थे। पुलिस व शासन के जुल्म के बाद भी राम भक्तों के हौसले बुलंद थे। आज राम मंदिर निर्माण का युग चल रहा है भगवान राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। अक्षत के माध्यम से अयोध्या आने का निमंत्रण भी मिला है। अब तो केवल भव्य राम मंदिर दिव्या राम मंदिर देखने का अरमान हर दिन हिलोरे ले रहा है।