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Sant Kabir Nagar News: राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे से गूंज उठा मेंहदावल
Wed, 10 Jan 2024 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 10 Jan 2024 11:42 PM IST
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फोटो सहित
-गिरफ्तारी देने के लिए सड़क पर निकला लोगों का रेला, पुलिस रह गई अवाक
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। अयोध्या में रामलला की 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा है। इसको लेकर मेंहदावल में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ ही आम जनमानस में खुशी का माहौल है। साथ ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की यादें ताजा हो गईं। 30 अक्तूबर 1990 को सुबह से ही मेंहदावल की सड़कों पर राम भक्तों की चहल-पहल शुरू हो गई थी। विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर कार सेवा के लिए जाने वाले राम भक्त सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते हुए गिरफ्तारी देने पहुंचे। राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे से थाना परिसर गूंज उठा था।
कस्बे के नायक टोला निवासी रविंद्र लोहिया बताते हैं कि जिस समय राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ, उसे समय मेरे पास विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री का दायित्व था। मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश में सरकार थी। राम भक्त कार सेवा के लिए अयोध्या न पहुंचें, इसके लिए शासन तथा पुलिस प्रशासन ने कमर कस रखी थी। तमाम साथी जेल में थे। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, भाजपा, संघ आदि संगठनों के निर्देश थे कि जो कार सेवक अयोध्या 30 अक्तूबर को नहीं पहुंच पा रहे हैं वे अपने थाने में गिरफ्तारी देकर विरोध-प्रदर्शन दर्ज कराएंगे।
नेतृत्व के निर्देश पर बड़ी संख्या में नगर तथा ग्रामीण क्षेत्र के लोग एकत्रित हुए और मुख्य बाजार में नारेबाजी करते हुए थाने में पहुंचकर गिरफ्तारी देने लगे। आम जनमानस गिरफ्तारी देने के लिए इतनी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गई कि एसओ समेत सभी पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर खड़े हो गए और कहा कि हम सभी की गिरफ्तारी कर रहे हैं। अब आप लोग गिरफ्तारी देने आने वाली भीड़ को रोक दीजिए। पूरा थाना परिसर रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे से गूंज उठा।
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उस समय के विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष श्रीपत विश्वकर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर 30 अक्तूबर 1990 को स्थानीय थाने में गिरफ्तारी को लेकर 28 व 29 अक्तूबर को कार सेवकों से जनसंपर्क किया गया। गोपनीय तरीके से बैठक आयोजित की गई। जिस दिन गिरफ्तारी देनी थी, अंजाहिया बाजार नरसिंहगढ़ी मंदिर से थाना परिसर तक जन सैलाब उमड़ पड़ा था। पुलिस कर्मी भी भीड़ और राम भक्तों का जुनून देखकर भौचक रह गए थे। आज राम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। यह हम लोगों के लिए उत्साहित व गौरव की बात है।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मोतीलाल जायसवाल भी राममंदिर आंदोलन से जुड़े थे। राम मंदिर आंदोलन को लेकर कार सेवकों के साथ अलग-अलग बैठक चल रही थी। साइकिल से अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य बना, लेकिन ठीक दीपावली के तीसरे दिन आधी रात को पुलिस ने घर पर छापेमारी कर हमारे साथ-साथ ही कई लोगों की गिरफ्तारी कर ली।
पूर्व मंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह, स्वर्गीय दल बहादुर चौबे समेत कई लोगों की गिरफ्तारी होने के बाद भी मेंहदावल क्षेत्र में राम मंदिर आंदोलन की गति धीमी नहीं पड़ी। करीब 28 दिन जेल में बीता। अंत में जब हम लोगों की रिहाई हुई तो जेल से रिहा होने के बाद अयोध्या गए। राम मंदिर व हनुमानगढ़ के दर्शन किए। आज राम मंदिर निर्माण भारतीय सनातन संस्कृति के गौरव की पहचान बनने जा रही है।
कस्बा निवासी हरिश्चंद्र गुप्ता राम मंदिर आंदोलन के दौरान बजरंग दल का दायित्व संभाल रहे थे। रात भर नगर के विभिन्न मोहल्लों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते थे। कार सेवा के लिए लोगों का अलग-अलग जत्था तैयार किया जाता था। जब कार्यकर्ताओं को अयोध्या कार सेवा से रोका जाने लगा, तब गिरफ्तारियां होने लगीं। बड़ी संख्या में गिरफ्तारी देने के लिए कार्यकर्ताओं के बीच जनसंपर्क कर योजना बनाई गई। जनमानस इस कदर उमड़ा कि भीड़ देखकर पुलिस के होश उड़ गए। जब अयोध्या में कार सेवा के दौरान निहत्थे लोगों पर पुलिस प्रशासन की ओर से गोली चलाए जाने की जानकारी हुई तो सभी गुस्से में आ गए। तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के विरुद्ध लोग सड़कों पर उतरे और जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आज राम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है। यह पूरे देश के लिए नए युग का आरंभ है।
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-गिरफ्तारी देने के लिए सड़क पर निकला लोगों का रेला, पुलिस रह गई अवाक
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। अयोध्या में रामलला की 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा है। इसको लेकर मेंहदावल में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ ही आम जनमानस में खुशी का माहौल है। साथ ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की यादें ताजा हो गईं। 30 अक्तूबर 1990 को सुबह से ही मेंहदावल की सड़कों पर राम भक्तों की चहल-पहल शुरू हो गई थी। विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर कार सेवा के लिए जाने वाले राम भक्त सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते हुए गिरफ्तारी देने पहुंचे। राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे से थाना परिसर गूंज उठा था।
कस्बे के नायक टोला निवासी रविंद्र लोहिया बताते हैं कि जिस समय राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ, उसे समय मेरे पास विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री का दायित्व था। मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश में सरकार थी। राम भक्त कार सेवा के लिए अयोध्या न पहुंचें, इसके लिए शासन तथा पुलिस प्रशासन ने कमर कस रखी थी। तमाम साथी जेल में थे। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, भाजपा, संघ आदि संगठनों के निर्देश थे कि जो कार सेवक अयोध्या 30 अक्तूबर को नहीं पहुंच पा रहे हैं वे अपने थाने में गिरफ्तारी देकर विरोध-प्रदर्शन दर्ज कराएंगे।
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नेतृत्व के निर्देश पर बड़ी संख्या में नगर तथा ग्रामीण क्षेत्र के लोग एकत्रित हुए और मुख्य बाजार में नारेबाजी करते हुए थाने में पहुंचकर गिरफ्तारी देने लगे। आम जनमानस गिरफ्तारी देने के लिए इतनी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गई कि एसओ समेत सभी पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर खड़े हो गए और कहा कि हम सभी की गिरफ्तारी कर रहे हैं। अब आप लोग गिरफ्तारी देने आने वाली भीड़ को रोक दीजिए। पूरा थाना परिसर रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे से गूंज उठा।
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उस समय के विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष श्रीपत विश्वकर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर 30 अक्तूबर 1990 को स्थानीय थाने में गिरफ्तारी को लेकर 28 व 29 अक्तूबर को कार सेवकों से जनसंपर्क किया गया। गोपनीय तरीके से बैठक आयोजित की गई। जिस दिन गिरफ्तारी देनी थी, अंजाहिया बाजार नरसिंहगढ़ी मंदिर से थाना परिसर तक जन सैलाब उमड़ पड़ा था। पुलिस कर्मी भी भीड़ और राम भक्तों का जुनून देखकर भौचक रह गए थे। आज राम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। यह हम लोगों के लिए उत्साहित व गौरव की बात है।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मोतीलाल जायसवाल भी राममंदिर आंदोलन से जुड़े थे। राम मंदिर आंदोलन को लेकर कार सेवकों के साथ अलग-अलग बैठक चल रही थी। साइकिल से अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य बना, लेकिन ठीक दीपावली के तीसरे दिन आधी रात को पुलिस ने घर पर छापेमारी कर हमारे साथ-साथ ही कई लोगों की गिरफ्तारी कर ली।
पूर्व मंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह, स्वर्गीय दल बहादुर चौबे समेत कई लोगों की गिरफ्तारी होने के बाद भी मेंहदावल क्षेत्र में राम मंदिर आंदोलन की गति धीमी नहीं पड़ी। करीब 28 दिन जेल में बीता। अंत में जब हम लोगों की रिहाई हुई तो जेल से रिहा होने के बाद अयोध्या गए। राम मंदिर व हनुमानगढ़ के दर्शन किए। आज राम मंदिर निर्माण भारतीय सनातन संस्कृति के गौरव की पहचान बनने जा रही है।
कस्बा निवासी हरिश्चंद्र गुप्ता राम मंदिर आंदोलन के दौरान बजरंग दल का दायित्व संभाल रहे थे। रात भर नगर के विभिन्न मोहल्लों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते थे। कार सेवा के लिए लोगों का अलग-अलग जत्था तैयार किया जाता था। जब कार्यकर्ताओं को अयोध्या कार सेवा से रोका जाने लगा, तब गिरफ्तारियां होने लगीं। बड़ी संख्या में गिरफ्तारी देने के लिए कार्यकर्ताओं के बीच जनसंपर्क कर योजना बनाई गई। जनमानस इस कदर उमड़ा कि भीड़ देखकर पुलिस के होश उड़ गए। जब अयोध्या में कार सेवा के दौरान निहत्थे लोगों पर पुलिस प्रशासन की ओर से गोली चलाए जाने की जानकारी हुई तो सभी गुस्से में आ गए। तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के विरुद्ध लोग सड़कों पर उतरे और जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आज राम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है। यह पूरे देश के लिए नए युग का आरंभ है।