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बारिश नहीं होने से धान की फसल चौपट, किसान परेशान

Wed, 24 Aug 2022 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Aug 2022 10:42 PM IST
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rain fall not done, crop become dry
छोटी सरौली गांव के सीवान में सुख रही घान की फसल।संवाद - फोटो : KHALILABAD
बारिश नहीं होने से धान की फसल चौपट, किसान परेशान
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- निजी संसाधनों से फसल बचाने को किसान कर रहे जद्दोजहद
- शासन के निर्देश पर प्रशासन कर रहा क्षति का आकलन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। बारिश नहीं होने से धान की फसल सूख रही है। फसल को बचाने के लिए किसान निजी संसाधनों से जद्दोजहद कर रहे हैं। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जनपद को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की मांग उठ रही है। शासन के निर्देश पर प्रशासन क्षति हुई फसलों का आकलन करा रहा है।
जिले में पिछले वर्ष 94 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई रोपाई हुई थी। इस साल समय से बारिश नहीं होने की वजह से चार हजार हेक्टेयर धान की रकबा घट गया। किसानों ने निजी संसाधनों से मौसम का रुख देख कर धान की बुवाई रोपाई किया, लेकिन बारिश नहीं होने से धान की फसल सूख रही है।
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परशुरामपुर गांव निवासी किसान हनुमान पटेल ने बताया कि बारिश न होने से धान की फसल चौपट हो ही रही है। इसका प्रभाव रबी की फसलों पर भी पड़ेगा। सबसे बड़ी समस्या तो तब होगी जब धान की फसल बचाने के लिए चल रहे पंपिंग सेट व अन्य मशीन भूगर्भ जल का स्तर घटा देंगे।
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भगता गांव निवासी किसान विजय कुमार ने बताया कि धान की फसल बचाने के लिए हर सप्ताह खेत में पानी चलाना पड़ रहा है। पंपिंगसेट से पानी चलाने के लिए 90 रुपये प्रति लीटर डीजल के हिसाब से एक एकड़ में करीब 1,200 रुपये खर्च पड़ रहा है। ऐसे में मशीन के सहारे धान की फसल बचाने में तैयार उपज की कीमत से ज्यादा की लागत लग जाएगी।
बैदौली गांव निवासी किसान वसीम ने बताया कि बारिश न होने से खेत में खर पतवार का बहुत अधिक प्रकोप है। खर-पतवार नाशक दवाओं से काम नहीं चल पा रहा है। खेत की सिंचाई के साथ ही मजदूर लगाकर खेत की निराई भी करानी पड़ रही है। ऐसे में बारिश न होने के कारण किसानों के ऊपर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
मुकुंदपुर गॉव निवासी किसान राजेश्वर शुक्ल का कहना है कि बारिश न होने से सूख रही धान की फसलों को बचा पाना बड़ी चुनौती है। धान की रोपाई के बाद से अबतक ऐसी बारिश नहीं हुई कि कुछ दिन खेतों में पानी भरा रहे। फसल को बचाने के लिए खेत की सिंचाई कर पाना गरीब किसानों के बस की बात नहीं है।
प्रशासन करा रहा फसल की हुई क्षति का सर्वे
शासन के निर्देश पर तहसीलवार फसल को क्षति होने का सर्वे कराया जा रहा है। अभी तक जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है उसमें खलीलाबाद में धान की फसल को 25,438 हेक्टेयर व गन्ने को 273 हेक्टेयर क्षति की आशंका है। इसके अलावा धनघटा तहसील में 34,390 हेक्टेयर धान, 2023 हेक्टेयर गन्ने की फसल, मक्का 809 हेक्टेयर, तिल 810 हेक्टेयर, अरहर 810 हेक्टेयर, मूंगफली व चरी 810-810 हेक्टेयर क्षति की आशंका है। मेंहदावल तहसील में 30,989.09 हेक्टेयर धान के क्षति की आशंका है।

बारिश नहीं होने से खासकर धान और मक्का की फसल को क्षति पहुंची है। यदि आगे भी बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार कम होगी। प्रति हेक्टेयर औसतन 32 क्विंटल पैदावार होता है, लेकिन बारिश नहीं होने की दशा में घटकर 22 क्वितंल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। किसान फसलों में नमी बनाए रखने की दिशा में प्रयास जारी रखे।
- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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