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गोपालन में नई आशा के शिल्पकार बने राहुल

Fri, 05 Mar 2021 10:47 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 10:47 PM IST
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Rahul became the architect of new hope in Gopalan
बिधियानी मोहल्ला निवासी राहुल डेरी में गाय के साथ। - फोटो : KHALILABAD
गोपालन में नई आशा के शिल्पकार बने राहुल
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संतकबीरनगर। बचपन से गोसेवा और कृषि के प्रति लगाव की वजह से इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर राहुल राय ने डेयरी का संचालन शुरू कर दिया। अच्छी नस्ल की 40 गाय इनकी डेयरी में उपलब्ध हैं। रोज 125 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। खलीलाबाद शहर में डोर-डोर दूध की आपूर्ति कराते हैं। इस काम में छह लोगों को रोजगार भी दे रखा है। इसके अलावा तीन लोगों को बर्मी कंपोस्ट यूनिट में रोजगार दे रखा है।
शहर के बिधियानी मोहल्ले के रहने वाले 46 वर्षीय राहुल राय पुत्र त्रिशूलधर राय मैकेनिकल से बीटेक हैं। वर्ष-2000 में उन्हें इंजीनियर पद पर नौकरी मिली। विभिन्न कंपिनयों में दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान और विदेश में कुवैत, इटली, अबूधाबी में नौकरी की। वर्ष-2017 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और घर आ गए। तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके भाई रोहित राय दिल्ली में टैक्स सलाहकार और दूसरे भाई कुंदन राय हाईकोर्ट इलाहाबाद में अधिवक्ता हैं। पिता त्रिशूलधर राय रतनसेन डिग्री कॉलेज बांसी से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं। राहुल राय बताते हैं कि उन्हें बचपन से पड़े-पौधों से लगाव और गायों की सेवा करने का शौक है। शौक को पूरा करने के लिए इसी को कॅरियर बना लिया और इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी है। नेशनल डेयरी इंस्टीट्यूट करनाल हरियाणा और पुणे के बारामरी में 15-15 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष-2018 में डेयरी खोली। पहले चार गाय खरीदी और काम को समझा। उसके बाद धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाते गए। वर्तमान में होल्स्टीन फ्रिजियन, गिर और साहीवॉल नस्ल की छोटी-बड़ी 40 गाय उनकी डेयरी में हैं। देसी गायों का संबंद्ध करना उनका उद्देश्य है। गायों को हरा चारा खिलाते हैं। इसके अलावा जौ का आटा, मकई का आटा और अरहर का खंडा भी गरम कराकर आहार में देेते हैं। डयेरी से प्रति महीने डेढ़ लाख की आय होती है। उसमें खर्च निकालने के बाद औसतन 40 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनके यहां जो लोग काम करते है उन्हें भी सात से आठ हजार रुपये महीने देते है। उनका कहना है कि खुद के रोजगार में चुनौतियां तो सामने आती हैं, लेकिन मेहनत और ईनानदारी से काम करें तो सफलता जरूर मिलती है।
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बर्मी कंपोस्ट को भी बढ़ावा देने पर जोर
राहुल राय डेयरी के साथ जो गोबर निकलता है, उससे बर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कराते हैं। खुद के खेत में प्रयोग के साथ जरूरतमंदों को 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच देते हैं। उनकी सोच है कि यूरिया का प्रयोग कम करने के लिए बर्मी कंपोस्ट को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और उत्पन्न अनाज सेहत के लिए लाभकारी होगा।
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बगीचे में औषधीय और फलदार वृक्ष भी लगाएं
राहुल राय के बडे़ पिता त्रियुगी नारायण राय खलीलाबाद के चेयरमैन रहे हैं। बड़े पिता का पेड़-पौधों के प्रति लगाव था। उन्हीं की प्रेरणा से राहुल राय की रुझान भी इस दिशा में बढ़ी है। वह बताते हैं कि उनके पास दस बीघे का एक और छह-छह बीघे के दो बगीचे हैं, जिसमें आम, लीची, बेल, आंवला, अमरूद लगे हैं। लखनऊ और बस्ती के पौधशाला से औषधीय पौधों को लाकर वह बगीचे को सुसज्जित करने की कोशिश कर रहे हैं। बगीचे की देखरेख के लिए दो लोगों को रख रखा है और उन्हें अच्छी पगार देते हैं।
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