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Sant Kabir Nagar News: रेडियोलाॅजिस्ट ने भेजा इस्तीफा, सीएमएस पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
Sun, 27 Aug 2023 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 27 Aug 2023 11:21 PM IST
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- पांच अगस्त से नहीं आ रहे थे रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी, अस्पताल प्रशासन ने जारी किया था नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल के रेडियोलाॅजिस्ट नहीं आएंगे। उन्होंने अपना इस्तीफा सीएमएस समेत महानिदेशक स्वास्थ्य को भेज दिया है। उन्होंने सीएमएस पर उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है। सीएमएस ने उनका इस्तीफा महानिदेशक स्वास्थ्य को भेज दिया है। साथ ही नए रेडियोलाॅजिस्ट के तैनाती की मांग की है।
जिला अस्पताल में दो रेडियोलाॅजिस्ट तैनात हैं। एक रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड करते हैं तो दूसरे रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. गोपाल जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करते हैं। एमसीएच विंग के रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी पिछले पांच अगस्त से अनुपस्थित चल रहे थे। सीएमएस ने उन्हें तत्काल कार्य करने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए। सीएमएस ने 17 अगस्त को नोटिस जारी किया तो रेडियाेलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीएमएस और महानिदेशक स्वास्थ्य को भेजा है। उन्होंने इस्तीफे में उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि कार्य अधिक है और शरीर में परेशानी है। इसकी वजह से वह अल्ट्रासाउंड नहीं कर पा रहे हैं। रेडियोलाॅजिस्ट के न आने से जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज परेशान हो रहे हैं। प्रतिदिन 100 से 120 अल्ट्रासांउड जांच होती है, लेकिन एक रेडियोलाॅजिस्ट के न आने से समस्या बढ़ गई है।
अस्पताल में प्रतिदिन 18 से 19 मेडिकोलीगल करते हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक मरीज उनके पास ही अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं। काम को बोझ अधिक है, अस्पताल प्रशासन भी दबाव बनाता है। इसके साथ ही उनकी कमर के राइट में दर्द होता है, जिसकी वजह से अल्ट्रासाउंड में दिक्कत है, जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। -डॉ. शैलेंद्र चौधरी, रेडियोलाॅजिस्ट
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रेडियोलाॅजिस्ट से काम करने के लिए कहा गया तो उन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है, जबकि नियमानुसार ही कार्य कराया जाता है। अगर उनको कोई दिक्कत थी तो उसके बारे में बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस्तीफा भेज दिया है। उसको स्वीकृति के लिए महानिदेशक स्वास्थ्य को भेजा गया है। साथ ही नए रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है, जिससे अल्ट्रासाउंड का कार्य प्रभावित न हो। -डॉ महेश प्रसाद, सीएमएस
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल के रेडियोलाॅजिस्ट नहीं आएंगे। उन्होंने अपना इस्तीफा सीएमएस समेत महानिदेशक स्वास्थ्य को भेज दिया है। उन्होंने सीएमएस पर उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है। सीएमएस ने उनका इस्तीफा महानिदेशक स्वास्थ्य को भेज दिया है। साथ ही नए रेडियोलाॅजिस्ट के तैनाती की मांग की है।
जिला अस्पताल में दो रेडियोलाॅजिस्ट तैनात हैं। एक रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड करते हैं तो दूसरे रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. गोपाल जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करते हैं। एमसीएच विंग के रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी पिछले पांच अगस्त से अनुपस्थित चल रहे थे। सीएमएस ने उन्हें तत्काल कार्य करने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए। सीएमएस ने 17 अगस्त को नोटिस जारी किया तो रेडियाेलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीएमएस और महानिदेशक स्वास्थ्य को भेजा है। उन्होंने इस्तीफे में उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि कार्य अधिक है और शरीर में परेशानी है। इसकी वजह से वह अल्ट्रासाउंड नहीं कर पा रहे हैं। रेडियोलाॅजिस्ट के न आने से जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज परेशान हो रहे हैं। प्रतिदिन 100 से 120 अल्ट्रासांउड जांच होती है, लेकिन एक रेडियोलाॅजिस्ट के न आने से समस्या बढ़ गई है।
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अस्पताल में प्रतिदिन 18 से 19 मेडिकोलीगल करते हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक मरीज उनके पास ही अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं। काम को बोझ अधिक है, अस्पताल प्रशासन भी दबाव बनाता है। इसके साथ ही उनकी कमर के राइट में दर्द होता है, जिसकी वजह से अल्ट्रासाउंड में दिक्कत है, जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। -डॉ. शैलेंद्र चौधरी, रेडियोलाॅजिस्ट
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रेडियोलाॅजिस्ट से काम करने के लिए कहा गया तो उन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है, जबकि नियमानुसार ही कार्य कराया जाता है। अगर उनको कोई दिक्कत थी तो उसके बारे में बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस्तीफा भेज दिया है। उसको स्वीकृति के लिए महानिदेशक स्वास्थ्य को भेजा गया है। साथ ही नए रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है, जिससे अल्ट्रासाउंड का कार्य प्रभावित न हो। -डॉ महेश प्रसाद, सीएमएस