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पीएम आवास का हाल ः किसी ने किस्त से खरीदी बाइक, कहीं कोर्ट पेंच
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प्रधानमंत्री आवास योजना का हाल
किसी ने किस्त से खरीदी बाइक कहीं कोर्ट का पेंच
संतकबीरनगर। गरीबों को आशियाना मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना का जिले में बुरा हाल है। आलम यह है कि तीन वित्तीय वर्षों का अब तक 268 आवासों का निर्माण शुरू तक नहंी हो पाया है। इसमें आठ ऐसे लाभार्थी है, जो पहली किस्त लेकर परिवार सहित लापता हैं। एक लाभार्थी ने तो आवास की रकम लेकर बाइक खरीद ली है और परिवार समेत लापता है। ऐसे लाभार्थियों को प्रशासन ढूंढने में परेशान है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में जिले को 6586 प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण का लक्ष्य मिला था। इसमें 6502 लाभार्थियों ने आवास बना लिया। जबकि छह लाभार्थी अपात्र पाए गए। जिनकी प्रथम किस्त की धनराशि प्रशासन ने वापस कराई। जबकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6784 पीएम आवास का लक्ष्य मिला। इसके सापेक्ष 6610 लाभार्थियों का आवास बना। जबकि 15 लाभार्थी अपात्र पाए गए। जिनसे सरकारी धन की रिकवरी कराई गई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 3834 पीएम आवास का लक्ष्य था और 3794 लाभार्थियों का आवास पूर्ण हुआ। जबकि नौ लाभार्थी अपात्र पाए गए। इनकी रकम की भी रिकवरी कराई गई। इस प्रकार तीनों वित्तीय वर्षों में 298 पीएम आवास अपूर्ण रह गए, जिसमें से 30 आवासों की रकम की रिकवरी तो प्रशासन ने करा लिया। लेकिन नौ ऐसे लाभार्थी ऐसे थे जिनकी किश्त दूसरे के खाते में चली गई। सेमरियावां विकास खंड के देवरिया विजयी गांव निवासी लाभार्थी उग्रसेन, खलीलाबाद ब्लॉक के मोहम्मदपुर कठार गांव निवासी वसीउल्लाह, दिक्तौली गांव निवासी रामबहादुर की पहली किस्त की ही धनराशि गलत खाते में भेजी गई। जबकि बेलहर ब्लॉक के कुसुरु खुर्द गांव निवासी लालती, पौली ब्लॉक क्षेत्र के मुठही खुर्द गांव निवासी वीरेंद्र, मुठही कला निवासी सुभावती, लौकिया गांव निवासी सुभावती, सेवाईपार निवासी सुभावती और सांथा ब्लॉक क्षेत्र के अठेलिया गांव निवासी रामकुबेर की दूसरी किस्त की धनराशि दूसरे खाते में भेज दी गई। जबकि शेष 259 लाभार्थियों में से पांच ऐसे लाभार्थी है। जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनका कोई वारिश नहीं है। इसके अलावा आठ ऐसे लाभार्थी है जो पहली किश्त की धनराशि लेकर परिवार सहित चंपत हैं। 12 लाभार्थी ऐसे है जिनका जमीन विवाद कोर्ट में विचाराधीन है, जिससे उनका आवास नही बन पा रहा है। शेष बचे 234 आवासों में से 45 ऐसे लाभार्थी है। जिनका आवास आपसी विवाद की वजह से नहीं शुरू हो पा रहा है। कई ऐसे मामले में पति-पत्नी के बीच विवाद और भाई-भाई के बीच विवाद होने से आवास निर्माण में पेंच फंस गया है। इसके अलावा शेष बचे 189 लाभार्थियों का आवास अपूर्ण होने के पीछे वजह पैसा विलंब से मिलना बताया जा रहा है। इन लाभार्थियों को दो किस्त की धनराशि दे दी गई,लेकिन आवास शुरू नहीं किया गया है।
इंसेट
परियोजना निदेशक ने तैयार किया खाका
डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि यह सच है कि तीन वित्तीय वर्षों का 298 आवास नहीं बन पाए हैं। इसमें आठ ऐसे लाभार्थी है जो पहली किस्त लेकर फरार हैं और उनकी तलाश कराई जा रही है। बीडीओ के स्तर से जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है वह चौंकाने वाली है। जैसे तामा के लाभार्थी रामललित ने पहली किस्त प्राप्त की और उसी रकम से बाइक खरीद ली। खाजो की सरोज और सीयर खुर्द की मालती भी पहली किस्त लेकर परिवार समेत लापता हैं। बीडीओ को निर्देश दिए गए है कि जिन लाभार्थियों के पैसे गलत खाते में गए हैं बैंकों से बाउचर निकलवा कर खाता सही कराएं। फिर सही खाते में पैसा भिजवाएं। जो लाभार्थी पहली किस्त लेकर लापता हो गए हैं। उनके खिलाफ वसूली आदेश जारी कराएं। साथ ही एफआईआर दर्ज कराएं। जिन लाभार्थियों के आवास कोर्ट के स्थगन आदेश की वजह से शुरू नहीं हो पा रहे है। इनमें एसडीएम कोर्ट में चलने वाले मामलों को चिन्हित करें और एसडीएम से अनुरोध करके उसका निस्तारण जल्दी कराएं। जो आवास पारिवारिक विवाद में फंसे है,उसमें प्रधान स्तर से पंचायत करके सुलह समझौते के माध्यम से शुरू कराएं। इसके अलावा विलंब से पैसा मिलने की वजह से जो 189 आवास शुरू नहीं हुए, उन लाभार्थियों को नोटिस जारी करें। इसके साथ ही सचिवों को चेतावनी नोटिस जारी करते हुए दिसंबर तक हर हाल में इन आवासों को पूरा कराएं। इसमें जिसके स्तर पर लापरवाही बरती जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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किसी ने किस्त से खरीदी बाइक कहीं कोर्ट का पेंच
संतकबीरनगर। गरीबों को आशियाना मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना का जिले में बुरा हाल है। आलम यह है कि तीन वित्तीय वर्षों का अब तक 268 आवासों का निर्माण शुरू तक नहंी हो पाया है। इसमें आठ ऐसे लाभार्थी है, जो पहली किस्त लेकर परिवार सहित लापता हैं। एक लाभार्थी ने तो आवास की रकम लेकर बाइक खरीद ली है और परिवार समेत लापता है। ऐसे लाभार्थियों को प्रशासन ढूंढने में परेशान है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में जिले को 6586 प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण का लक्ष्य मिला था। इसमें 6502 लाभार्थियों ने आवास बना लिया। जबकि छह लाभार्थी अपात्र पाए गए। जिनकी प्रथम किस्त की धनराशि प्रशासन ने वापस कराई। जबकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6784 पीएम आवास का लक्ष्य मिला। इसके सापेक्ष 6610 लाभार्थियों का आवास बना। जबकि 15 लाभार्थी अपात्र पाए गए। जिनसे सरकारी धन की रिकवरी कराई गई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 3834 पीएम आवास का लक्ष्य था और 3794 लाभार्थियों का आवास पूर्ण हुआ। जबकि नौ लाभार्थी अपात्र पाए गए। इनकी रकम की भी रिकवरी कराई गई। इस प्रकार तीनों वित्तीय वर्षों में 298 पीएम आवास अपूर्ण रह गए, जिसमें से 30 आवासों की रकम की रिकवरी तो प्रशासन ने करा लिया। लेकिन नौ ऐसे लाभार्थी ऐसे थे जिनकी किश्त दूसरे के खाते में चली गई। सेमरियावां विकास खंड के देवरिया विजयी गांव निवासी लाभार्थी उग्रसेन, खलीलाबाद ब्लॉक के मोहम्मदपुर कठार गांव निवासी वसीउल्लाह, दिक्तौली गांव निवासी रामबहादुर की पहली किस्त की ही धनराशि गलत खाते में भेजी गई। जबकि बेलहर ब्लॉक के कुसुरु खुर्द गांव निवासी लालती, पौली ब्लॉक क्षेत्र के मुठही खुर्द गांव निवासी वीरेंद्र, मुठही कला निवासी सुभावती, लौकिया गांव निवासी सुभावती, सेवाईपार निवासी सुभावती और सांथा ब्लॉक क्षेत्र के अठेलिया गांव निवासी रामकुबेर की दूसरी किस्त की धनराशि दूसरे खाते में भेज दी गई। जबकि शेष 259 लाभार्थियों में से पांच ऐसे लाभार्थी है। जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनका कोई वारिश नहीं है। इसके अलावा आठ ऐसे लाभार्थी है जो पहली किश्त की धनराशि लेकर परिवार सहित चंपत हैं। 12 लाभार्थी ऐसे है जिनका जमीन विवाद कोर्ट में विचाराधीन है, जिससे उनका आवास नही बन पा रहा है। शेष बचे 234 आवासों में से 45 ऐसे लाभार्थी है। जिनका आवास आपसी विवाद की वजह से नहीं शुरू हो पा रहा है। कई ऐसे मामले में पति-पत्नी के बीच विवाद और भाई-भाई के बीच विवाद होने से आवास निर्माण में पेंच फंस गया है। इसके अलावा शेष बचे 189 लाभार्थियों का आवास अपूर्ण होने के पीछे वजह पैसा विलंब से मिलना बताया जा रहा है। इन लाभार्थियों को दो किस्त की धनराशि दे दी गई,लेकिन आवास शुरू नहीं किया गया है।
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परियोजना निदेशक ने तैयार किया खाका
डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि यह सच है कि तीन वित्तीय वर्षों का 298 आवास नहीं बन पाए हैं। इसमें आठ ऐसे लाभार्थी है जो पहली किस्त लेकर फरार हैं और उनकी तलाश कराई जा रही है। बीडीओ के स्तर से जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है वह चौंकाने वाली है। जैसे तामा के लाभार्थी रामललित ने पहली किस्त प्राप्त की और उसी रकम से बाइक खरीद ली। खाजो की सरोज और सीयर खुर्द की मालती भी पहली किस्त लेकर परिवार समेत लापता हैं। बीडीओ को निर्देश दिए गए है कि जिन लाभार्थियों के पैसे गलत खाते में गए हैं बैंकों से बाउचर निकलवा कर खाता सही कराएं। फिर सही खाते में पैसा भिजवाएं। जो लाभार्थी पहली किस्त लेकर लापता हो गए हैं। उनके खिलाफ वसूली आदेश जारी कराएं। साथ ही एफआईआर दर्ज कराएं। जिन लाभार्थियों के आवास कोर्ट के स्थगन आदेश की वजह से शुरू नहीं हो पा रहे है। इनमें एसडीएम कोर्ट में चलने वाले मामलों को चिन्हित करें और एसडीएम से अनुरोध करके उसका निस्तारण जल्दी कराएं। जो आवास पारिवारिक विवाद में फंसे है,उसमें प्रधान स्तर से पंचायत करके सुलह समझौते के माध्यम से शुरू कराएं। इसके अलावा विलंब से पैसा मिलने की वजह से जो 189 आवास शुरू नहीं हुए, उन लाभार्थियों को नोटिस जारी करें। इसके साथ ही सचिवों को चेतावनी नोटिस जारी करते हुए दिसंबर तक हर हाल में इन आवासों को पूरा कराएं। इसमें जिसके स्तर पर लापरवाही बरती जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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