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शहादत पर नाज, कोरे वादों पर मलाल

Mon, 25 Jul 2016 11:15 PM IST
शोभित कुमार पांडेय/sant kabir nagar
शोभित कुमार पांडेय/sant kabir nagar Updated Mon, 25 Jul 2016 11:15 PM IST
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Proud of martyrdom , Corey promises compunction
श्‍ाहीद एजाज अहमद अंसारी - फोटो : अमर उजाला
सेना से अवकाश प्राप्त फौजी शाह आलम अंसारी को अपने बेटे एजाज अहमद की शहादत पर फख्र है। लेकिन अफसरों और नेताओं के कोरे वादों पर उन्हें मलाल है। वादों के बाद शाह आलम को उम्मीद थी कि शहीद बेटे का स्मारक बने और वे उसे देखें, उनकी हसरत तो पूरी नहीं हुई लेकिन आंखों की रोशनी जरूर धुंधली हो गई। बमुश्किल से पेंशन के परिवार को वे पाल रहे हैं। उन्हें दिनरात एक ही चिंता सता रही है, दो बेटियों का निकाह कैसे होगा। 
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खलीलाबाद ब्लॉक के पटखौली गांव निवासी 67 वर्षीय शाह आलम कुछ बताने से पहले फफक कर रो पड़े। गीली आंखों को गमछे से पोंछते हुए उन्होंने बताया कि वे आर्मी की इंजीनियरिंग कोर में थे। वर्ष 1992 में उन्हें अवकाश प्राप्त हुआ। चार बेटियों और तीन बेटों में मझला बेटा एजाज अहमद अंसारी भी आर्मी में था। ड्यूटी के दौरान देशसेवा करते हुए एजाज 12 अगस्त 2005 को बेटा एजाज अहमद अंसारी जम्मू-कश्मीर के चोर बटला में शहीद हो गया था। शहादत के बाद शहीद के परिवार को शासन-प्रशासन की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिले। हाल यह है कि 11 साल बाद भी उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। 
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25 जून 2007 को ब्रिगेडियर विनोद कुमार भट्ट ने गैस एजेंसी दिए जाने के संबंध में शासन को पत्र लिखा था। प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री राम आसरे पासवान ने भी पैरवी की थी, बावजूद इसके अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई। शहीद बेटे के सम्मान के लिए स्मारक बनाने और बेटे के कब्र तक रास्ता बनवाने का आश्वासन पूरा नहीं हुआ। प्रदेश सरकार की तरफ से शहीद परिवार को जो मदद दी जाती है, वह भी उसके परिवार को नहीं मिल पाई। उसे जो पेंशन मिलती है,उससे परिवार का खर्च भी ठीक ढंग से नहीं चल पाता है। बड़ा बेटा अफरोज मेहनत मजदूरी करता है। 
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दो बेटियों की शादी तो हो चुकी है, लेकिन बेटी निकहत अंजुम और फिरदौस अंजुम की शादी अभी करनी बाकी है। उनके पास सिर्फ दो बीघे जमीन है और छोटा सा मकान है। गैस एजेंसी के लिए प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति तक को पत्र भेज चुके हैं लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।   घर में टंगी शहीद बेटे की तस्वीर     की तरफ जैसी निगाहें पहुंचती है, वैसे ही दर्द बढ़ जाता है और खाने-पीने की इच्छा तक नही करती है। पत्नी सकलैन उस दौरान खुदा का वास्ता देकर दुखी मन को शांत करने में मदद करती हैं।
 

सांसद शरद त्रिपाठी ने कहा कि  शहीद एजाज अहमद अंसारी के परिवार को अभी तक शासन स्तर से मदद नहीं मिलने की जानकारी है। 17 मार्च 2015 को शून्य काल में मामले को उन्होंने उठाया था। गरीब परिवार को गैस एजेंसी दिए जाने के लिए पेट्रोलियम मंत्री और रक्षा मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं। पूरी कोशिश रहेगी कि पीड़ित परिवार को शासन की तरफ से जल्द मदद मिल जाए। वहीं डीएम डॉ. सरोज कुमार शहीद सुधाकर के घरवाले कुछ दिन पूर्व मांग पत्र लेकर आए थे। पत्र को शासन को भेज दिया गया है। वहीं एजाज के घर से कोई भी पत्र उन्हें नहीं मिला। यदि कोई उनके पास आएगा तो प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। शहीदों की हर संभव मदद की जाएगी। 


 

छोटा भाई भी फौज में हुआ भर्ती ः बड़े भाई की शहादत पर छोटे भाई मोहम्मद अहमद को नाज है। उसे देश सेवा का जज्बा फौजी पिता और शहीद बड़े भाई एजाज अहमद से मिला। पूना के आर्मी स्कूल से 2013 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने फौज में नौकरी तलाशनी शुरू की। आर्मी में इंजीनियरिंग कोर में ही वर्ष 2013 में मोहम्मद अहमद को भी नौकरी मिली। वर्तमान में उनकी पुणे में तैनात है। फोन पर मो. अहमद ने बताया कि शहीद भाई और रिटायर्ड पिता की प्रेरणा से फौज में आया हूं, लेकिन मलाल सिर्फ इतना है कि पूरा परिवार देश सेवा के लिए समर्पित है और बड़े भाई देश सेवा करते शहीद हो गए, लेकिन जो मदद शहीद परिवार को मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल पाई।  

 

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