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नहीं सहेंगे अत्याचार, जरूर करेंगे प्रतिकार
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अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत अल्हाज मुंशीदार फातिमा किसान इंटर कालेज में लगी पुलिस की पाठशाला
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। अमर उजाला फाउंडेशन की अपराजिता मुहिम के तहत अल्हाज मुंशीदार फातिमा किसान इंटर कालेज गणसरपार में मंगलवार को पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें महिला एसओ डॉ. शालिनी सिंह ने छात्राओं को सुरक्षा के लिए कानूनी उपायों के साथ-साथ आत्मरक्षा के व्यावहारिक तरीके भी बताए। ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार इस तरह का कार्यक्रम होने से छात्राएं बेहद खुश थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा भी एसओ से साझा की।
कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एसओ ने छात्राओं को 1090, 181, डॉयल 100 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अन्याय का प्रतिकार न होने से ही अपराधी का हौसला बढ़ता है। अगर शुरूआत में ही गलत मंशा वालों को टोक दें तो बड़ी घटना होने की आशंका कम होती है। उन्होंने छात्राओं को गुड और बैड टच के बारे में बताया और कहा कि कई बार करीबी रिश्तेदार भी गलत हरकतें कर देते हैं और घर के लोग बदनामी का डर दिखाकर चुप करा देते हैं। छात्राओं को इस विषय में घरवालों से खुलकर बात करनी चाहिए। कहीं दिक्कत हो तो सीधे पुलिस की मदद लें। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर छात्राओं को नोट कराने के साथ ही स्कूल के सूचना पट्टा पर भी अफसरों का मोबाइल नंबर चस्पा कराया। उन्होंने संकट काल में दुपट्टा, पेन या पिन से रक्षा करने के उपाय भी बताए। उन्होंने छात्राओं को अपने बैग में लाल मिर्च का पावडर भी रखने की सलाह दी। छात्राओं ने महिला एसओ के साथ नारा भी लगाया कि अब नहीं सहेंगे अत्याचार, जरूर करेंगे प्रतिकार।
प्रबंधक मोहम्मद वकील खान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस मुहिम से बेटियों का आत्मबल बढ़ा है। ऐसे कार्यक्रम अधिक से अधिक होने चाहिए जिससे छात्राएं निडर होकर पढ़ाई पूरी कर सकें। प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद खान ने आभार जताया। इस अवसर पर 220 छात्राओं ने अपराजिता मुहिम से जुड़ने की शपथ ली। कार्यक्रम में आफताब आलम, वीरेंद्र कुमार, संतोष उपाध्याय, शंभूनाथ, महफूज आलम, मोनू कुमार, अजय, अनिल, दीपारानी, सुधा, साधना, रुबी, गीता, साधना चौरसिया, राबिया खातून आदि मौजूद रहीं।
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लगाए गए 100 पौधे
कॉलेज में पुलिस की पाठशाला को यादगार बनाने के लिए प्रबंधक मोहम्मद वकील की तरफ से फलदार, छायादार और शोभाकार प्रजाति के सौ पौधे लगवाए गए। प्रबंधक, महिला एसओ और अमर उजाला परिवार की तरफ से आम के पौधे लगाए गए। अध्यापकों ने छायादार, जबकि छात्राओं ने शोभाकार प्रजाति के पौधे लगाए। एसओ ने कहा कि ये पौधे हमेशा छात्र-छात्राओं को इस विशिष्ट कार्यक्रम की याद दिलाते रहेंगे।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
अब परेशान करने वालों को जवाब मिलेगा
पुलिस की पाठशाला यहां की लड़कियों के लिए बिल्कुल नया था। अमर उजाला की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में तमाम नई जानकारियां मिलीं। महिला एसओ ने हिम्मत भी बंधाई। अब कोई परेशान करेगा तो तुरंत उसका जवाब दिया जाएगा।
- उसरा खातून
नई सीख मिली, आत्मबल भी बढ़ा
अपराजिता से जुड़कर अच्छा लगा। ऐसे कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों का आत्मबल बढ़ा है। कार्यक्रम में आत्मरक्षा के जो तरीके बताए गए वह बेहद उपयोगी हैं। ऐसे आयोजन से सभी लड़कियों को नई सीख मिली है।
- आफरीन खातून
ऐसे कार्यक्रमों से सामाजिक सोच बदलेगी
ग्रामीण क्षेत्र में अब भी लड़कियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पढ़ाई का माहौल बना है लेकिन अभी समाज की सोच में बदलाव की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम निश्चित तौर पर सामाजिक सोच बदलने में कामयाब होंगे।
- सना खातून
बदलाव की वाहक बनेगी यह मुहिम
अब बेटियों को पहले से अधिक आजादी मिली है। पढ़ाई और नौकरी में बेटियों को अवसर मिलने से घरों का माहौल तो बदल गया है लेकिन समाज की सोच में अभी पूरी तरह से बदलाव नहीं आया है। अपराजिता मुहिम इस बदलाव की वाहक बनेगी।
- नरगिस खातून
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अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। अमर उजाला फाउंडेशन की अपराजिता मुहिम के तहत अल्हाज मुंशीदार फातिमा किसान इंटर कालेज गणसरपार में मंगलवार को पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें महिला एसओ डॉ. शालिनी सिंह ने छात्राओं को सुरक्षा के लिए कानूनी उपायों के साथ-साथ आत्मरक्षा के व्यावहारिक तरीके भी बताए। ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार इस तरह का कार्यक्रम होने से छात्राएं बेहद खुश थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा भी एसओ से साझा की।
कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एसओ ने छात्राओं को 1090, 181, डॉयल 100 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अन्याय का प्रतिकार न होने से ही अपराधी का हौसला बढ़ता है। अगर शुरूआत में ही गलत मंशा वालों को टोक दें तो बड़ी घटना होने की आशंका कम होती है। उन्होंने छात्राओं को गुड और बैड टच के बारे में बताया और कहा कि कई बार करीबी रिश्तेदार भी गलत हरकतें कर देते हैं और घर के लोग बदनामी का डर दिखाकर चुप करा देते हैं। छात्राओं को इस विषय में घरवालों से खुलकर बात करनी चाहिए। कहीं दिक्कत हो तो सीधे पुलिस की मदद लें। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर छात्राओं को नोट कराने के साथ ही स्कूल के सूचना पट्टा पर भी अफसरों का मोबाइल नंबर चस्पा कराया। उन्होंने संकट काल में दुपट्टा, पेन या पिन से रक्षा करने के उपाय भी बताए। उन्होंने छात्राओं को अपने बैग में लाल मिर्च का पावडर भी रखने की सलाह दी। छात्राओं ने महिला एसओ के साथ नारा भी लगाया कि अब नहीं सहेंगे अत्याचार, जरूर करेंगे प्रतिकार।
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प्रबंधक मोहम्मद वकील खान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस मुहिम से बेटियों का आत्मबल बढ़ा है। ऐसे कार्यक्रम अधिक से अधिक होने चाहिए जिससे छात्राएं निडर होकर पढ़ाई पूरी कर सकें। प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद खान ने आभार जताया। इस अवसर पर 220 छात्राओं ने अपराजिता मुहिम से जुड़ने की शपथ ली। कार्यक्रम में आफताब आलम, वीरेंद्र कुमार, संतोष उपाध्याय, शंभूनाथ, महफूज आलम, मोनू कुमार, अजय, अनिल, दीपारानी, सुधा, साधना, रुबी, गीता, साधना चौरसिया, राबिया खातून आदि मौजूद रहीं।
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लगाए गए 100 पौधे
कॉलेज में पुलिस की पाठशाला को यादगार बनाने के लिए प्रबंधक मोहम्मद वकील की तरफ से फलदार, छायादार और शोभाकार प्रजाति के सौ पौधे लगवाए गए। प्रबंधक, महिला एसओ और अमर उजाला परिवार की तरफ से आम के पौधे लगाए गए। अध्यापकों ने छायादार, जबकि छात्राओं ने शोभाकार प्रजाति के पौधे लगाए। एसओ ने कहा कि ये पौधे हमेशा छात्र-छात्राओं को इस विशिष्ट कार्यक्रम की याद दिलाते रहेंगे।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
अब परेशान करने वालों को जवाब मिलेगा
पुलिस की पाठशाला यहां की लड़कियों के लिए बिल्कुल नया था। अमर उजाला की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में तमाम नई जानकारियां मिलीं। महिला एसओ ने हिम्मत भी बंधाई। अब कोई परेशान करेगा तो तुरंत उसका जवाब दिया जाएगा।
- उसरा खातून
नई सीख मिली, आत्मबल भी बढ़ा
अपराजिता से जुड़कर अच्छा लगा। ऐसे कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों का आत्मबल बढ़ा है। कार्यक्रम में आत्मरक्षा के जो तरीके बताए गए वह बेहद उपयोगी हैं। ऐसे आयोजन से सभी लड़कियों को नई सीख मिली है।
- आफरीन खातून
ऐसे कार्यक्रमों से सामाजिक सोच बदलेगी
ग्रामीण क्षेत्र में अब भी लड़कियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पढ़ाई का माहौल बना है लेकिन अभी समाज की सोच में बदलाव की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम निश्चित तौर पर सामाजिक सोच बदलने में कामयाब होंगे।
- सना खातून
बदलाव की वाहक बनेगी यह मुहिम
अब बेटियों को पहले से अधिक आजादी मिली है। पढ़ाई और नौकरी में बेटियों को अवसर मिलने से घरों का माहौल तो बदल गया है लेकिन समाज की सोच में अभी पूरी तरह से बदलाव नहीं आया है। अपराजिता मुहिम इस बदलाव की वाहक बनेगी।
- नरगिस खातून