{"_id":"62a8cf81f402d65d667167c6","slug":"programmes-held-on-kabir-birthday-khalilabad-news-gkp440323099","type":"story","status":"publish","title_hn":"ध्वजारोहण व बीजक पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ध्वजारोहण व बीजक पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
विज्ञापन
कबीर के 623वें प्रकट दिवस पर हवन करते महंत विचार दास और अन्य।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ध्वजारोहण व बीजक पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
सद्गुरु कबीर के 624वें प्राकट्य दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। कबीर चौरा मगहर स्थित कबीर समाधि परिसर में मंगलवार को सद्गुरु कबीर के 624वें प्राकट्य दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत महंत विचारदास के नेतृत्व में हुई। इस दौरान ध्वजारोहण, बीजक पाठ, सत्संग व भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें दूरदराज से आए कबीर पंथी साधुओं और कबीर के अनुयायियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत महंत विचारदास ने ध्वजारोहण से की। इसके बाद संतों ने बीजक पाठ के साथ वातावरण की शुद्धि के लिए हवन भी किया। साथ ही सत्संग का कार्यक्रम भी हुआ। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने कबीर की समाधि व मजार के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत विचार दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। सदैव मानव सेवा का दर्श दिया। कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों, वैमनस्यता को दूर करने का प्रयास करते हुए आपसी सौहार्द, प्रेम, एकता का संदेश दिया है। सत्संग में पहुंचे पटना साहेब जत्थेदार रणजीत सिंह ने इसकी शोभा बढ़ाई और सद्गुरु कबीर को शहंशाह बताया। पटना साहेब जत्थेदार रणजीत सिंह ने कहा कि कबीर को दोनों वर्गों ने अपना माना। यह स्थली अद्भुत व बेमिसाल है। देश में दो ऐसे संत गुरु नानक और कबीर हुए, जिनका शरीर नहीं मिला। ऐसी विभूतियां संसार में बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम का कोई समय नहीं होता। कबीर के जन्म को लेकर कहा जाता है न वह पैदा हुए न मरे और न कभी मरेंगे। सद्गुरु कबीर ने मगहर के बारे में भ्रम को तोड़ा। डॉ. राम कुबेर यादव ने कहा कि संत कबीर कर्म योग के समर्थक थे। कबीर ऐसे संत थे, जिन्होंने परमात्मा को प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान अवतार सिंह प्रधान पटना, सुदीप सिंह, आरएस खुराना, अरविंद शास्त्री, संत केशव दास, शांति दास, राम शरन दास, संतराम लखन दास उर्फ लाल बाबा, डॉ. हरिशरण शास्त्री, राम सेवक दास, प्रधानाचार्य डॉ. राकेश सिंह, रामशंकर यादव, डॉ. एके पांडेय, संत केशव दास, मोतवल्ली खादिम हुसेन, अवधेश सिंह, अवधेश दास, कार्यक्रम अधिकारी प्रयागराज विनोद शुक्ल, विनोद दास, वैद्य रामसरन दास, कल्पनाथ दास, पारसनाथ दास, रविप्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
भंडारे में श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद
मगहर। कबीर समाधि परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन महंत विचारदास के नेतृत्व में किया गया। यह देर शाम तक चलता रहा। इसमें स्थानीय लोगों के अलावा कबीर पंथी साधु, संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर महंत विचारदास, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी, मोतवल्ली खादिम हुसेन समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सद्गुरु कबीर के 624वें प्राकट्य दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। कबीर चौरा मगहर स्थित कबीर समाधि परिसर में मंगलवार को सद्गुरु कबीर के 624वें प्राकट्य दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत महंत विचारदास के नेतृत्व में हुई। इस दौरान ध्वजारोहण, बीजक पाठ, सत्संग व भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें दूरदराज से आए कबीर पंथी साधुओं और कबीर के अनुयायियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत महंत विचारदास ने ध्वजारोहण से की। इसके बाद संतों ने बीजक पाठ के साथ वातावरण की शुद्धि के लिए हवन भी किया। साथ ही सत्संग का कार्यक्रम भी हुआ। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने कबीर की समाधि व मजार के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत विचार दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। सदैव मानव सेवा का दर्श दिया। कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों, वैमनस्यता को दूर करने का प्रयास करते हुए आपसी सौहार्द, प्रेम, एकता का संदेश दिया है। सत्संग में पहुंचे पटना साहेब जत्थेदार रणजीत सिंह ने इसकी शोभा बढ़ाई और सद्गुरु कबीर को शहंशाह बताया। पटना साहेब जत्थेदार रणजीत सिंह ने कहा कि कबीर को दोनों वर्गों ने अपना माना। यह स्थली अद्भुत व बेमिसाल है। देश में दो ऐसे संत गुरु नानक और कबीर हुए, जिनका शरीर नहीं मिला। ऐसी विभूतियां संसार में बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम का कोई समय नहीं होता। कबीर के जन्म को लेकर कहा जाता है न वह पैदा हुए न मरे और न कभी मरेंगे। सद्गुरु कबीर ने मगहर के बारे में भ्रम को तोड़ा। डॉ. राम कुबेर यादव ने कहा कि संत कबीर कर्म योग के समर्थक थे। कबीर ऐसे संत थे, जिन्होंने परमात्मा को प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान अवतार सिंह प्रधान पटना, सुदीप सिंह, आरएस खुराना, अरविंद शास्त्री, संत केशव दास, शांति दास, राम शरन दास, संतराम लखन दास उर्फ लाल बाबा, डॉ. हरिशरण शास्त्री, राम सेवक दास, प्रधानाचार्य डॉ. राकेश सिंह, रामशंकर यादव, डॉ. एके पांडेय, संत केशव दास, मोतवल्ली खादिम हुसेन, अवधेश सिंह, अवधेश दास, कार्यक्रम अधिकारी प्रयागराज विनोद शुक्ल, विनोद दास, वैद्य रामसरन दास, कल्पनाथ दास, पारसनाथ दास, रविप्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भंडारे में श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद
मगहर। कबीर समाधि परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन महंत विचारदास के नेतृत्व में किया गया। यह देर शाम तक चलता रहा। इसमें स्थानीय लोगों के अलावा कबीर पंथी साधु, संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर महंत विचारदास, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी, मोतवल्ली खादिम हुसेन समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन