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पति की दीर्घायु, सुख शांति व परिवार के कल्याण की प्रार्थना की
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करवा चौथ पर चंद्रमा को देखने के बाद पूजा करतीं महिलाएं।
- फोटो : KHALILABAD
पति की दीर्घायु, सुख शांति व परिवार के कल्याण की प्रार्थना की
गौरी-शिव गणेश, कार्तिकेय के पूजन के बाद चंद्रमा को दिया अर्घ्य
संतकबीरनगर। करवाचौथ पर जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रहकर सायंकाल शिव गौरी, गणेश, कार्तिकेय का पूजन किया। उसके बाद देव मंदिरों में जाकर भगवान का दर्शन करने के बाद रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।
खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में शाम को एकत्र हुई अनुराधा खन्ना, पल्लवी, रानी, सलोनी, सोनी सिंह, पूजा छाबड़ा, नीतू, अनुराधा, अन्नू रूंगटा, पूजा रूंगटा, मनीषा रूंगटा, वैशाली, रवनीत कौर आदि महिलाओं ने बताया कि परंपरा के अनुसार बृहस्पतिवार को दिनभर निर्जल व्रत करने के बाद आस-पास के लोग सौभाग्य सूचक वस्त्र एवं आभूषण धारण कर एक जगह एकत्र होते हैं। देवी-देवताओं के पूजन के बाद व्रत की महिमा की कथा सुनते हैं। उसके बाद सायंकाल चंद्रमा के निकलने अक्षत, लाल चंदन से अर्घ्य दिया। उसके बाद करवे में चावल, उड़द चूड़ी, कंघी, सिंदूर आदि भरकर सास के चरण छूकर दान किया। फिर पति के मुख का दर्शन कर जल ग्रहण किया। इसी तरह टीचर्स कॉलोनी में साधना पांडेय, रमा, सुमन आदि ने बताया कि पूरे दिन निराजल व्रत रखने के बाद देर शाम चंद्रमा का दर्शन किया और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।
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गौरी-शिव गणेश, कार्तिकेय के पूजन के बाद चंद्रमा को दिया अर्घ्य
संतकबीरनगर। करवाचौथ पर जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रहकर सायंकाल शिव गौरी, गणेश, कार्तिकेय का पूजन किया। उसके बाद देव मंदिरों में जाकर भगवान का दर्शन करने के बाद रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।
खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में शाम को एकत्र हुई अनुराधा खन्ना, पल्लवी, रानी, सलोनी, सोनी सिंह, पूजा छाबड़ा, नीतू, अनुराधा, अन्नू रूंगटा, पूजा रूंगटा, मनीषा रूंगटा, वैशाली, रवनीत कौर आदि महिलाओं ने बताया कि परंपरा के अनुसार बृहस्पतिवार को दिनभर निर्जल व्रत करने के बाद आस-पास के लोग सौभाग्य सूचक वस्त्र एवं आभूषण धारण कर एक जगह एकत्र होते हैं। देवी-देवताओं के पूजन के बाद व्रत की महिमा की कथा सुनते हैं। उसके बाद सायंकाल चंद्रमा के निकलने अक्षत, लाल चंदन से अर्घ्य दिया। उसके बाद करवे में चावल, उड़द चूड़ी, कंघी, सिंदूर आदि भरकर सास के चरण छूकर दान किया। फिर पति के मुख का दर्शन कर जल ग्रहण किया। इसी तरह टीचर्स कॉलोनी में साधना पांडेय, रमा, सुमन आदि ने बताया कि पूरे दिन निराजल व्रत रखने के बाद देर शाम चंद्रमा का दर्शन किया और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।
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