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Sant Kabir Nagar News: भंडारण में दिक्कत के चलते घट गया आलू का रकबा
Sat, 24 Jan 2026 01:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 24 Jan 2026 01:39 AM IST
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खेत में आलू की फसल-संवाद
हरिहरपुर। भंडारण की परेशानी हुई तो किसानों ने आलू की बुआई से मुंह मोड़ लिया। स्थिति यह हुई कि अब क्षेत्र में आलू की फसल बमुश्किल दिखती हैं। आलू की फसल का रकबा घट जाने से किसानो की आमदनी भी काफी कम हो गई जिससे घर गृहस्थी चलाने में कठिनाई होने लगी।
नाथनगर ब्लाॅक क्षेत्र के परसुरामपुर, सिसवनियॉ, महुली, बौरिहवा, डिहवा, कुर्मियाना, ठाठर सहित कई गांवों के किसान आलू की बुआई करते थे। कई किसान आलू की पैदावार को बेचकर उसी खेत में गेहूं की बुआई भी कर देते थे, जिससे फसल चक्र पर भी कोई असर नहीं पड़ता था। आलू को किसान शीतगृह में उसका भंडारण कर देते थे।
बाद में जब आलू की कीमत अच्छी होती थी तब शीतगृह से निकालकर उसे बेच देते थे। आलू की उपज से मिले पैसे से किसान बच्चों की शिक्षा के साथ ही परिवार की परवरिश पर खर्च करते थे। लेकिन, आलू भंडारण की परेशानी ने किसानों को आलू की व्यावसायिक खेती से मुंह मोड़ने पर विवश कर दिया। किसान हनुमान पटेल, राम दास चौधरी, अंगद चौधरी, अशोक कुमार ने बताया कि दो दशक पहले महुली क्षेत्र में दो शीतगृह संचालित होते थे।
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कुछ साल संचालित होने के बाद दोनों कोल्ड स्टोरेज बंद हो गए उसके बाद किसान आलू की उपज को खलीलाबाद शीतगृह में जमा करने लगे। आलू भंडारण मंहगा होने के चलते किसानों को मुनाफे की जगह उपज में घाटा होने लगा। रही-सही कसर जंगली जानवरों ने पूरी कर दी। अब क्षेत्र में आलू के फसल की बुआई कुछ किसान इसलिए कर रहे हैं कि उसकी उपज बाजारों में बेचकर परिवार के भरण-पोषण पर खर्च करेंगे।
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नाथनगर ब्लाॅक क्षेत्र के परसुरामपुर, सिसवनियॉ, महुली, बौरिहवा, डिहवा, कुर्मियाना, ठाठर सहित कई गांवों के किसान आलू की बुआई करते थे। कई किसान आलू की पैदावार को बेचकर उसी खेत में गेहूं की बुआई भी कर देते थे, जिससे फसल चक्र पर भी कोई असर नहीं पड़ता था। आलू को किसान शीतगृह में उसका भंडारण कर देते थे।
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बाद में जब आलू की कीमत अच्छी होती थी तब शीतगृह से निकालकर उसे बेच देते थे। आलू की उपज से मिले पैसे से किसान बच्चों की शिक्षा के साथ ही परिवार की परवरिश पर खर्च करते थे। लेकिन, आलू भंडारण की परेशानी ने किसानों को आलू की व्यावसायिक खेती से मुंह मोड़ने पर विवश कर दिया। किसान हनुमान पटेल, राम दास चौधरी, अंगद चौधरी, अशोक कुमार ने बताया कि दो दशक पहले महुली क्षेत्र में दो शीतगृह संचालित होते थे।
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कुछ साल संचालित होने के बाद दोनों कोल्ड स्टोरेज बंद हो गए उसके बाद किसान आलू की उपज को खलीलाबाद शीतगृह में जमा करने लगे। आलू भंडारण मंहगा होने के चलते किसानों को मुनाफे की जगह उपज में घाटा होने लगा। रही-सही कसर जंगली जानवरों ने पूरी कर दी। अब क्षेत्र में आलू के फसल की बुआई कुछ किसान इसलिए कर रहे हैं कि उसकी उपज बाजारों में बेचकर परिवार के भरण-पोषण पर खर्च करेंगे।

खेत में आलू की फसल-संवाद

खेत में आलू की फसल-संवाद

खेत में आलू की फसल-संवाद

खेत में आलू की फसल-संवाद