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Sant Kabir Nagar News: अधर में ई-अस्पताल बनाने की योजना
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जिला अस्पताल में मरीजो का ऑनलाइन पर्चा बनाते कर्मचारी।
- फोटो : KHALILABAD
अधर में ई-अस्पताल बनाने की योजना
सिर्फ पर्चा काउंटर पर ही लग पाए कंप्यूटर
कंप्यूटर के लिए चिकित्सकों को करना पडे़गा इंतजार
संतकबीरनगर। संयुक्त जिला अस्पताल को ई-अस्पताल बनाने की योजना अधर में लटक गई है। यहां पर ओपीडी की पर्चा बनाने के लिए दो कंप्यूटर लगाए गए हैं। चिकित्सकों को अब तक मरीजों की बीमारी से संबंधित ब्यौरा दर्ज करने के लिए कंप्यूटर नहीं मिल पाए हैं।
शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल को ई-अस्पताल बनाने की कवायद चल रही है। इसके लिए पर्ची काउंटर पर दो कंप्यूटर लगाए गए हैं। चिकित्सकों के कमरे में भी कंप्यूटर लगने थे, जिसमें मरीजों का विवरण और उपचार का रिकार्ड रखा जाना था। हालांकि टेलीमेडिसिन सेंटर में कंप्यूटर लग चुका है और ऑनलाइन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहां पर मरीजों का पूरा ब्यौरा दर्ज हो रहा है। कंप्यूटर लगने से मरीजों को फायदा होगा। चिकित्सक मरीज को कौन सी दवा लिख रहे हैं और पर्ची काउंटर से कौन सी दवा दी जा रही है, यह सब ब्यौरा कंप्यूटर में दर्ज रहेगा।
मरीज का एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाएगा तो वह एक साल तक मान्य रहेगा। शासन से अब तक कंप्यूटर लगाने के लिए बजट नहीं मिल पाया है। सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि पर्ची काउंटर पर दो कंप्यूटर लगाए जा चुके हैं। चिकित्सकों के कमरे में कंप्यूटर लगाने के लिए बजट नहीं है। शासन से जैसा निर्देश आएगा, उसके अनुुसार कार्यवाही की जाएगी।
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सिर्फ पर्चा काउंटर पर ही लग पाए कंप्यूटर
कंप्यूटर के लिए चिकित्सकों को करना पडे़गा इंतजार
संतकबीरनगर। संयुक्त जिला अस्पताल को ई-अस्पताल बनाने की योजना अधर में लटक गई है। यहां पर ओपीडी की पर्चा बनाने के लिए दो कंप्यूटर लगाए गए हैं। चिकित्सकों को अब तक मरीजों की बीमारी से संबंधित ब्यौरा दर्ज करने के लिए कंप्यूटर नहीं मिल पाए हैं।
शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल को ई-अस्पताल बनाने की कवायद चल रही है। इसके लिए पर्ची काउंटर पर दो कंप्यूटर लगाए गए हैं। चिकित्सकों के कमरे में भी कंप्यूटर लगने थे, जिसमें मरीजों का विवरण और उपचार का रिकार्ड रखा जाना था। हालांकि टेलीमेडिसिन सेंटर में कंप्यूटर लग चुका है और ऑनलाइन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहां पर मरीजों का पूरा ब्यौरा दर्ज हो रहा है। कंप्यूटर लगने से मरीजों को फायदा होगा। चिकित्सक मरीज को कौन सी दवा लिख रहे हैं और पर्ची काउंटर से कौन सी दवा दी जा रही है, यह सब ब्यौरा कंप्यूटर में दर्ज रहेगा।
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मरीज का एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाएगा तो वह एक साल तक मान्य रहेगा। शासन से अब तक कंप्यूटर लगाने के लिए बजट नहीं मिल पाया है। सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि पर्ची काउंटर पर दो कंप्यूटर लगाए जा चुके हैं। चिकित्सकों के कमरे में कंप्यूटर लगाने के लिए बजट नहीं है। शासन से जैसा निर्देश आएगा, उसके अनुुसार कार्यवाही की जाएगी।
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