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Sant Kabir Nagar News: आमी नदी को नमामि गंगे योजना में शामिल करने की शुरू हुई कवायद
Wed, 20 Dec 2023 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 20 Dec 2023 12:57 AM IST
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मगहर में स्थित आमीनदी।संवाद
संतकबीर से जुड़ी होने के कारण कबीर पंथियों के लिए गंगा समान पवित्र है आमी नदी
जिला प्रशासन ने योजना को अमल में लाने की शुरू की कवायद
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। संत कबीर से जुड़ी होने के कारण कबीर पंथियों के लिए गंगा समान आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो सफाई व जल प्रवाह बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिल जाएगा। यहां पर सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
सिद्धार्थनगर जिले के सिकोहरा ताल से निकली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में आता है। नदी के दोनों तरफ 100 से अधिक गांव बसे हुए हैं। महज तीन दशक पहले तक इस नदी के मीठे जल का उपयोग अगल-बगल के गांवों के लोग पीने व अन्य सिंचाई के लिए करते थे। लेकिन उद्योगों के रसायन युक्त पानी व शहरों के गंदे नालों के पानी ने इस नदी के निर्मल जल को प्रदूषित बना दिया। नदी का बहाव धीमा होने से इसमें गंदगी बढ़ती जा रही है।
इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इसके पुनरुद्धार की योजना तैयार की है। इसे केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने की कवायद की जा रही है। जिला प्रशासन जल्द ही इसके लिए प्रस्ताव भेजेगा। इसके तहत नदी में जलप्रवाह बनाए रखने एवं प्रदूषण समाप्त करने के लिए औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्र के सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
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पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी ने की थी पहल
आमी को नमामि गंगे योजना में शामिल करने के लिए पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी ने पहल की थी। उन्होंने तत्कालीन मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी से मिलकर पत्र सौंपा था। लेकिन उनके न रहने के बाद योजना को मूर्त रूप नहीं मिल पाया।
आमी नदी की साफ-सफाई के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। इसे नमामि गंगे योजना में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
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जिला प्रशासन ने योजना को अमल में लाने की शुरू की कवायद
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। संत कबीर से जुड़ी होने के कारण कबीर पंथियों के लिए गंगा समान आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो सफाई व जल प्रवाह बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिल जाएगा। यहां पर सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
सिद्धार्थनगर जिले के सिकोहरा ताल से निकली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में आता है। नदी के दोनों तरफ 100 से अधिक गांव बसे हुए हैं। महज तीन दशक पहले तक इस नदी के मीठे जल का उपयोग अगल-बगल के गांवों के लोग पीने व अन्य सिंचाई के लिए करते थे। लेकिन उद्योगों के रसायन युक्त पानी व शहरों के गंदे नालों के पानी ने इस नदी के निर्मल जल को प्रदूषित बना दिया। नदी का बहाव धीमा होने से इसमें गंदगी बढ़ती जा रही है।
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इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इसके पुनरुद्धार की योजना तैयार की है। इसे केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने की कवायद की जा रही है। जिला प्रशासन जल्द ही इसके लिए प्रस्ताव भेजेगा। इसके तहत नदी में जलप्रवाह बनाए रखने एवं प्रदूषण समाप्त करने के लिए औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्र के सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
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पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी ने की थी पहल
आमी को नमामि गंगे योजना में शामिल करने के लिए पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी ने पहल की थी। उन्होंने तत्कालीन मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी से मिलकर पत्र सौंपा था। लेकिन उनके न रहने के बाद योजना को मूर्त रूप नहीं मिल पाया।
आमी नदी की साफ-सफाई के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। इसे नमामि गंगे योजना में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम