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Sant Kabir Nagar News: पितरों के श्राद्ध का पर्व पितृपक्ष आज से
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संतकबीरनगर। पितरों के श्राद्ध और पिंडदान का पर्व पितृपक्ष शनिवार से शुरू हो रहा है। पितृपक्ष में श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। चार अक्तूबर को मातृ नवमी और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष समाप्त होगा।
ज्योतिषाचार्य सुजीत कुमार ने बताया कि वैदिक दर्शन में आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथियों को पितृ शांति और श्राद्ध दानादि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। पितृपक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है।
बताया कि श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। श्राद्ध के माध्यम से जो भी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं वह मूलरूप में नारायण को प्राप्त होती है। श्राद्ध के लिए श्रद्धा का होना अति आवश्यक है, अर्थात बिना श्रद्धा के किया गया श्राद्ध निष्फल होता है।
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शास्त्रों के अनुसार साल में कुल 96 दिन ऐसे अवसर प्राप्त होते हैं जिनमें श्राद्ध किए जाते हैं। उन सब अवसरों में पितृपक्ष सर्वोत्तम तिथि मानी गई है।
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पितृ पक्ष में अवश्य करें ये कार्य
समय माता मंदिर के पंडित बृजेश मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष में पशु पक्षियों को भोजन कराना और पितरों के निमित्त नित्य दोनियां रखना चाहिए। पितृ दोष निवारण यंत्र की गंध पुष्प अक्षत से नित्य पूजा करें। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक मधु, डेढ़ प्रहर तक दुग्ध, साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में पितरों को प्राप्त होता है। अंजलि में कुश के साथ तिल मिश्रित जल को अंगूठे की ओर से पृथ्वी पर छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है
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इन तिथियों में मनाया जाएगा श्राद्ध
- पूर्णिमा श्राद्ध - 26 सितंबर -
प्रतिपदा श्राद्ध - 27 सितंबर
- द्वितीया श्राद्ध - 28 सितंबर
- तृतीया श्राद्ध - 29 सितंबर
- चतुर्थी श्राद्ध - 30 सितंबर
- पंचमी व षष्ठी श्राद्ध - 1 अक्तूबर
- सप्तमी श्राद्ध 2 अक्तूबर
- अष्टमी श्राद्ध - 3 अक्तूबर
- नवमी श्राद्ध - 4 अक्तूबर
- दशमी श्राद्ध - 5 अक्तूबर
- एकादशी श्राद्ध - 6 अक्तूबर
- द्वादशी श्राद्ध - 7 अक्तूबर
- त्रयोदशी श्राद्ध- 8 अक्तूबर
- चतुर्दशी श्राद्ध - 9 अक्तूबर
- अमावस्या श्राद्ध - 10 अक्टूबर
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ज्योतिषाचार्य सुजीत कुमार ने बताया कि वैदिक दर्शन में आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथियों को पितृ शांति और श्राद्ध दानादि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। पितृपक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है।
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बताया कि श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। श्राद्ध के माध्यम से जो भी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं वह मूलरूप में नारायण को प्राप्त होती है। श्राद्ध के लिए श्रद्धा का होना अति आवश्यक है, अर्थात बिना श्रद्धा के किया गया श्राद्ध निष्फल होता है।
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शास्त्रों के अनुसार साल में कुल 96 दिन ऐसे अवसर प्राप्त होते हैं जिनमें श्राद्ध किए जाते हैं। उन सब अवसरों में पितृपक्ष सर्वोत्तम तिथि मानी गई है।
पितृ पक्ष में अवश्य करें ये कार्य
समय माता मंदिर के पंडित बृजेश मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष में पशु पक्षियों को भोजन कराना और पितरों के निमित्त नित्य दोनियां रखना चाहिए। पितृ दोष निवारण यंत्र की गंध पुष्प अक्षत से नित्य पूजा करें। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक मधु, डेढ़ प्रहर तक दुग्ध, साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में पितरों को प्राप्त होता है। अंजलि में कुश के साथ तिल मिश्रित जल को अंगूठे की ओर से पृथ्वी पर छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है
इन तिथियों में मनाया जाएगा श्राद्ध
- पूर्णिमा श्राद्ध - 26 सितंबर -
प्रतिपदा श्राद्ध - 27 सितंबर
- द्वितीया श्राद्ध - 28 सितंबर
- तृतीया श्राद्ध - 29 सितंबर
- चतुर्थी श्राद्ध - 30 सितंबर
- पंचमी व षष्ठी श्राद्ध - 1 अक्तूबर
- सप्तमी श्राद्ध 2 अक्तूबर
- अष्टमी श्राद्ध - 3 अक्तूबर
- नवमी श्राद्ध - 4 अक्तूबर
- दशमी श्राद्ध - 5 अक्तूबर
- एकादशी श्राद्ध - 6 अक्तूबर
- द्वादशी श्राद्ध - 7 अक्तूबर
- त्रयोदशी श्राद्ध- 8 अक्तूबर
- चतुर्दशी श्राद्ध - 9 अक्तूबर
- अमावस्या श्राद्ध - 10 अक्टूबर