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18 परिवार एमबीडी बांध पर गुजार रहे जीवन
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18 परिवार एमबीडी बांध पर गुजार रहे जीवन
- घाघरा की जद में कभी भी आ सकते है 300 घर
- प्रशासन से नहीं मिली कोई मदद, बेहाल है बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा (संतकबीरनगर)। घाघरा नदी का कटान जारी है। कभी भी घाघरा की जद में गायघाट दक्षिणी के 300 मकान आ सकते हैं। प्रशासन की चेतावनी के बाद गांव के लोगों ने घर धीरे-धीरे पलायन शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष से 13 परिवार जहां बांध पर ही शरण लिए हुए है, वहीं पांच और परिवार एमबीडी बांध पर पहुंच गए हैं। प्लास्टिक की पन्नी तान कर बाढ़ पीड़ित परिवार के साथ जिंदगी गुजारने को विवश हैं।
गायघाट दक्षिणी से छह किलोमीटर दूर घाघरा पूर्व में बह रही थी। पिछले कुछ वर्षों से घाघरा कटान करती हुई गांव की ओर बढ़ रही थी, लेकिन गांव वालों को यह आभास नहीं था कि नदी गांव तक कटान करती पहुंच सकती है। लोगों के खेतों को नदी निगल चुकी है। धीरे- धीरे कटान करती हुई अब नदी गांव के मुहाने तक पहुंच चुकी है। गांव में कुल 300 घर हैं। पिछले वर्ष मकान नदी में विलीन हो जाने के कारण 13 परिवार एमबीडी बांध पर पहुंच गए और वह अभी तक बांध पर ही शरण लिए हुए हैं। इस साल कटान की गति को देखते हुए उत्पन्न खतरे की आशंका से प्रशासन ने गांव को खाली करने का फरमान जारी कर चुका है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे लोग अपने सामानों के साथ घर खाली करके बांध की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। अब तक पांच परिवार घर छोड़ कर बांध पर पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने तिघरा इंटर कॉलेज में बाढ़ शरणालय बनाया है। प्रधान बालेंद्र ने बताया कि गांव के लोग अपने घरों से सामान निकालकर तिघरा विद्यालय पर रख रहे हैं, लेकिन विद्यालय पर भी सबके लिए जगह प्रर्याप्त नहीं है, जो गांव के 18 परिवार बांध पर शरण लिए हुए हैं, उन्हें काफी द़ुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। उनके खाने-पीने का समुचित इंतजाम नहीं है। हल्की बारिश होने पर प्लास्टिक की पन्नी से पानी टपकता है और लोग रात में पूरी नीद सो नहीं पाते है। प्रशासन की ओर से उन्हें मदद की दरकार है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तिघरा इंटर कॉलेज में व्यवस्था की गई है। लोग अपने घरों को खाली करके विद्यालय पर पहुंच रहे हैं। सबके लिए रहने की प्रर्याप्त व्यवस्था है। बाढ़ पीड़ितों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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- घाघरा की जद में कभी भी आ सकते है 300 घर
- प्रशासन से नहीं मिली कोई मदद, बेहाल है बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा (संतकबीरनगर)। घाघरा नदी का कटान जारी है। कभी भी घाघरा की जद में गायघाट दक्षिणी के 300 मकान आ सकते हैं। प्रशासन की चेतावनी के बाद गांव के लोगों ने घर धीरे-धीरे पलायन शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष से 13 परिवार जहां बांध पर ही शरण लिए हुए है, वहीं पांच और परिवार एमबीडी बांध पर पहुंच गए हैं। प्लास्टिक की पन्नी तान कर बाढ़ पीड़ित परिवार के साथ जिंदगी गुजारने को विवश हैं।
गायघाट दक्षिणी से छह किलोमीटर दूर घाघरा पूर्व में बह रही थी। पिछले कुछ वर्षों से घाघरा कटान करती हुई गांव की ओर बढ़ रही थी, लेकिन गांव वालों को यह आभास नहीं था कि नदी गांव तक कटान करती पहुंच सकती है। लोगों के खेतों को नदी निगल चुकी है। धीरे- धीरे कटान करती हुई अब नदी गांव के मुहाने तक पहुंच चुकी है। गांव में कुल 300 घर हैं। पिछले वर्ष मकान नदी में विलीन हो जाने के कारण 13 परिवार एमबीडी बांध पर पहुंच गए और वह अभी तक बांध पर ही शरण लिए हुए हैं। इस साल कटान की गति को देखते हुए उत्पन्न खतरे की आशंका से प्रशासन ने गांव को खाली करने का फरमान जारी कर चुका है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे लोग अपने सामानों के साथ घर खाली करके बांध की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। अब तक पांच परिवार घर छोड़ कर बांध पर पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने तिघरा इंटर कॉलेज में बाढ़ शरणालय बनाया है। प्रधान बालेंद्र ने बताया कि गांव के लोग अपने घरों से सामान निकालकर तिघरा विद्यालय पर रख रहे हैं, लेकिन विद्यालय पर भी सबके लिए जगह प्रर्याप्त नहीं है, जो गांव के 18 परिवार बांध पर शरण लिए हुए हैं, उन्हें काफी द़ुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। उनके खाने-पीने का समुचित इंतजाम नहीं है। हल्की बारिश होने पर प्लास्टिक की पन्नी से पानी टपकता है और लोग रात में पूरी नीद सो नहीं पाते है। प्रशासन की ओर से उन्हें मदद की दरकार है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तिघरा इंटर कॉलेज में व्यवस्था की गई है। लोग अपने घरों को खाली करके विद्यालय पर पहुंच रहे हैं। सबके लिए रहने की प्रर्याप्त व्यवस्था है। बाढ़ पीड़ितों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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