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Sant Kabir Nagar News: जिगिना ताल के आसपास बढ़ रहा मोरों का कुनबा, हरियाली में दिख रही अठखेलियां

Thu, 15 Oct 2026 12:30 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 12:30 AM IST
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Peacock population growing around Jigina Tal; playful antics visible amidst the greenery.
जिगिना ताल के पास विचरण करता मोर-संवाद
लोहरैया। प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के बीच राष्ट्रीय पक्षी मोर का कुनबा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। जिगिना ताल के आसपास के गांवों के बाग-बगीचे इन दिनों मोरों की मौजूदगी से गुलजार हैं। ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक दशक से इस क्षेत्र में मोरों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। सुबह और शाम के समय खेतों, बागों और पेड़ों के आसपास मोरों की चहलकदमी लोगों को आकर्षित कर रही है।
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संठी, खैराटी, रजनौली, बभनौली, बारीडीहा, भेड़ापाकड़, सिरसी, बैरहा, जिगिना, सेमरी और मुंडेरा राय सहित आसपास के गांवों के बागों में मोर दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पेड़-पौधों, बाग-बगीचों और खुले स्थानों की उपलब्धता के चलते मोरों को अनुकूल वातावरण मिल रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय पक्षी लंबे समय से इस इलाके में अपना बसेरा बनाए हुए है।
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मोरों को देखकर थम जाते हैं वाहनों के पहिये

सड़क से गुजरते समय जब लोगों की नजर खेतों या बागों में विचरण करते मोरों पर पड़ती है तो वे कुछ देर रुककर उनकी खूबसूरती निहारने लगते हैं। मोरों के पंख फैलाकर नृत्य करने का दृश्य लोगों को खासा आकर्षित करता है। कई लोग इन मनमोहक पलों को अपने मोबाइल फोन में तस्वीरों और वीडियो के रूप में कैद करते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में राष्ट्रीय पक्षी को करीब से देखने का उत्साह रहता है।
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हरियाली बचाने से सुरक्षित रहेगा मोरों का बसेरा

ग्रामीणों का कहना है कि मोरों की मौजूदगी से गांवों के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और आकर्षक हो गया है। जिगिना निवासी रवि कश्यप, खैराटी निवासी जितेंद्र यादव, रजनौली निवासी राममिलन साहनी, ददरवार निवासी अजय गौड़, बैरहा निवासी छोटेलाल, मनिकापार निवासी सचिन यादव और मुंडेरा निवासी सतीश राय ने कहा कि क्षेत्र में मोरों की चहलकदमी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मोरों के सुरक्षित बसेरे के लिए पेड़-पौधों और हरियाली को बचाए रखना जरूरी है। ग्रामीणों को भी इनके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। मोरों के बसेरे वाले स्थानों पर अनावश्यक शोर करने और उन्हें परेशान करने से बचना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी राष्ट्रीय पक्षी की खूबसूरती को करीब से देख सकें। जिगिना ताल के आसपास मोरों की मौजूदगी अब क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान बनती जा रही है।
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