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खेतों में पराली न जलाएं किसान
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खेतों में पराली न जलाएं किसान
एडीएम बोले, पराली जलाते हुए पाए गए तो होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। धान की कटाई के बाद किसान फसल के अवशेष न खेतों में न जलाएं। इससे खेतों की उर्वरता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यदि फसल अवशेष जलाते हुए पाए गए तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह कहना है एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार सिंह का।
उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने से लाभकारी सूक्ष्म जीव अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जाते हैं। मृदा में जैव पदार्थ की कमी हो जाती है। इस कारण पौधों के विकास एवं वृद्धि के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है। मृदा की जल धारण क्षमता घट जाती है।
परिणाम स्वरूप फसल की उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके साथ-ही पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिससे अत्यंत गंभीर बीमारियां होती हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि अपने धान की फसल कटाई के उपरांत पराली को खेत में मिलाकर बॉयो-डीकंपोजर का प्रयोग कर खेत में ही सड़ाकर खाद बना लें। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष को खाद के गड्ढे में भर कर बॉयो-डीकंपोजर का छिड़काव करें। यह कुछ समय बाद खाद का रूप ले लेगी, जिसका आप अपनी फसल में प्रयोग कर सकते है। जिससे फसल की उत्पादकता में वृद्धि होगी और मिट्टी की जल धारण क्षमता बढे़गी। एडीएम ने कहा कि यदि किसी के खेत में पराली जलाई जाती है तो संबंधित कृषक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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एडीएम बोले, पराली जलाते हुए पाए गए तो होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। धान की कटाई के बाद किसान फसल के अवशेष न खेतों में न जलाएं। इससे खेतों की उर्वरता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यदि फसल अवशेष जलाते हुए पाए गए तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह कहना है एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार सिंह का।
उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने से लाभकारी सूक्ष्म जीव अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जाते हैं। मृदा में जैव पदार्थ की कमी हो जाती है। इस कारण पौधों के विकास एवं वृद्धि के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है। मृदा की जल धारण क्षमता घट जाती है।
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परिणाम स्वरूप फसल की उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके साथ-ही पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिससे अत्यंत गंभीर बीमारियां होती हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि अपने धान की फसल कटाई के उपरांत पराली को खेत में मिलाकर बॉयो-डीकंपोजर का प्रयोग कर खेत में ही सड़ाकर खाद बना लें। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष को खाद के गड्ढे में भर कर बॉयो-डीकंपोजर का छिड़काव करें। यह कुछ समय बाद खाद का रूप ले लेगी, जिसका आप अपनी फसल में प्रयोग कर सकते है। जिससे फसल की उत्पादकता में वृद्धि होगी और मिट्टी की जल धारण क्षमता बढे़गी। एडीएम ने कहा कि यदि किसी के खेत में पराली जलाई जाती है तो संबंधित कृषक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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