{"_id":"60392a4d8ebc3ee91c8001b5","slug":"one-stop-center-giving-help-khalilabad-news-gkp3863159173","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदद-परामर्श से बिखरे परिवार जोड़ रहा वन स्टॉप सेंटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मदद-परामर्श से बिखरे परिवार जोड़ रहा वन स्टॉप सेंटर
विज्ञापन
जिलाअस्पताल में बने वन स्टाप सेंटर में काम करने वाली कर्मचारी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मदद-परामर्श से बिखरे परिवार जोड़ रहा वन स्टॉप सेंटर
एक ही छत के नीचे मिलती हैं पीड़ित महिलाओं को सभी सुविधाएं
11 नवंबर 2010 से सीएमओ कार्यालय के पीछे संचालित हो रहा केंद्र
केस नंबर- 1
काउंसिलिंग से सुलझा विवाद, महिला की हुई विदाई
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला को उसका पति शराब पीकर मारता-पीटता था। पति ने इतना प्रताड़ित किया कि महिला मायके चली गई। प्रकरण वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचा तो उसके पति को बुला कर काउंसिलिंग की गई। दोनों की सहमति बनी तो यहीं से उसे ससुुराल भेजवाया गया।
केस नंबर-2
माफी मांगने पर फौजी की बेटी ने कर दिया क्षमा
फौजी की बेटी के साथ मेंहदावल बाईपास के निकट बाइक सवार युवक ने छेड़छाड़ की थी। युवती ने मोबाइल में बाइक की फोटो खींच ली थी। पीड़िता प्रकरण लेकर वन स्टॉपसेंटर पर पहुंची। सीसीटीवी फुटेज की मदद से युवक को पकड़वा कर सेंटर लाया गया। युवक ने माफी मांगी युवती ने क्षमा कर दिया।
केस नंबर- 3
अफसर की पत्नी को फोन कर परेशान करता था शराबी युवक
दूसरे जनपद में तैैनात राजस्व विभाग के एक अफसर का परिवार खलीलाबाद में रहता है। उनकी पत्नी को फोन पर युवक परेशान करता था। प्रकरण वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचा तो फोन करने वाला बस्ती का निकला। शराब के नशे में युवक ऐसी हरकत करता था। माफीनामा लिखवाने के बाद युवक को छोड़ा गया।
विज्ञापन
केस नंबर-4
पत्नी को ढूंढकर पति से मिलाया
कोतवाली क्षेत्र का एक युवक पत्नी के लापता होने की शिकायत लेकर पहुंचा। इसी बीच पति के एटीएम से पत्नी ने रकम की निकासी की। स्टॉप सेंटर ने जांच की तो पता चला कि सिद्घार्थनगर के एटीएम से रकम निकली है। सिद्धार्थनगर में दूसरे शख्स के साथ महिला रह रही थी। काउंसिलिंग के बाद पति-पत्नी साथ रहने लगे।
संतकबीरनगर। घरेलू हिंसा से प्रताड़ित महिलाओं की मदद के साथ उचित परामर्श के जरिए परिवारों को टूटने से बचाने में वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां मदद और परामर्श से उनकी समस्याएं सुलझा दी जा रही हैं।
पीड़ित महिलाओं एवं 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों को एक ही छत के नीचे एकीकृत रूप से सहायता एवं सहयोग प्रदान करके उन्हें समाज की मुख्य धारा में फिर से लाना शासन की मंशा है। उसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए 11 नवंबर 2019 से जिले में सीएमओ कार्यालय के पीछे वन स्टॉप सेंटर संचालित हो रहा है। इस सेंटर के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता और कानूूनी सहायता उपलब्ध करा कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। इस केंद्र पर सेंटर मैनेजर ऋतुका दूबे और परामर्शदात्री प्रतिमा चंद व सुमन की तैनाती है। इसके अलावा कानूनी सहायता के लिए एसआई गौरी शुक्ला और दो महिला कांस्टेबल की तैनाती है। चिकित्सकीय सुविधा के लिए स्टॉप नर्स सुमित्रा, अल्पना राय और प्रियंका की तैनाती है। सेंटर मैनेजर ऋतुका दूबे बताती हैं कि महिला अपराध से जुड़े हर तरह के मामलों का निस्तारण कराया जाता है। यहां आने वाली पीड़ित महिलाओं और किशोरियों को जरूरत के मुताबिक ठहरने और भोजन आदि की भी व्यवस्था है। पीड़िता की मदद के लिए डॉयल 181 नंबर पर शिकायत दर्ज कराने की भी सुविधा शासन ने मुहैया कराई है। शिकायत के बाद संबंधित जिलों को केस ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद पीड़िता को जरूरत के हिसाब से सेवा मिलती है। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को वन स्टॉप सेंटर पर अधिकतम दो दिन तक रहने और खाने की सुविधा है। अगर पीड़िता आने में असमर्थ है तो टीम उसके घर तक पहुंचती है। काउंसिलिंग से यदि समस्या का निदान नहीं होता है तो केस दर्ज कराया जाता है। पीड़िता की इच्छा के अनुसार कोर्ट तक केस को ले जाने में वन स्टॉप सेंटर मदद करता है।
वन स्टॉप सेंटर पर 15 महीने में आ चुके हैं 234 मामले
वन स्टॉप सेंटर पर अब तक 19 पीड़िताओं को आश्रय दिया गया है। एक पीड़िता को नारी निकेतन अयोध्या भेजवाया गया, जबकि 18 पीड़िताओं को उसके परिवार के सुपुर्द किया गया। घरेलू हिंसा के 93 प्रकरण आए और सभी को सुलह-समझौते से निस्तारित किया गया। इसी तरह दहेज उत्पीड़न के 12 प्रकरण सुलह-समझौते से निपटाए गए। लैंगिंक उत्पीड़न से संबंधित नौ प्रकरण आए। इसमें से एक प्रकरण में केस दर्ज कराया गया और आठ मामले निस्तारित किए गए। मानसिक उत्पीड़न से संबंधित पांच प्रकरण आए और सभी को सुलह-समझौते से निस्तारित किया गया। इसके अलावा मारपीट, जमीन विवाद, आपसी विवाद, कन्या सुमंगला, साइबर क्राइम आदि से संबंधित 102 प्रकरण आए और सभी का निस्तारण कराया गया। वैसे 12 प्रकरण लंबित हैं। इनमें आठ प्रकरण घरेलू हिंसा, दो प्रकरण आपसी विवाद, एक प्रकरण दहेज उत्पीड़न और तीन प्रकरण मानसिक उत्पीड़न का लंबित है।
कोट
वन स्टाप सेंटर पर बेहतर ढंग से समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है। जो प्रकरण लंबित हैं, उन्हें भी काउंसिलिंग के जरिए निस्तारित किए जाने की कोशिश की जा रही है। वन स्टॉप सेंटर के खुद के भवन के लिए 48 लाख रुपये स्वीकृत हैं। सीएमओ कार्यालय परिसर में ही नया भवन बन रहा है। अभी तक भवन निर्माण में 24 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। उम्मीद है जल्द ही नया भवन बन कर तैयार हो जाएगा।
- श्वेता त्रिपाठी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
विज्ञापन
एक ही छत के नीचे मिलती हैं पीड़ित महिलाओं को सभी सुविधाएं
11 नवंबर 2010 से सीएमओ कार्यालय के पीछे संचालित हो रहा केंद्र
केस नंबर- 1
काउंसिलिंग से सुलझा विवाद, महिला की हुई विदाई
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला को उसका पति शराब पीकर मारता-पीटता था। पति ने इतना प्रताड़ित किया कि महिला मायके चली गई। प्रकरण वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचा तो उसके पति को बुला कर काउंसिलिंग की गई। दोनों की सहमति बनी तो यहीं से उसे ससुुराल भेजवाया गया।
केस नंबर-2
माफी मांगने पर फौजी की बेटी ने कर दिया क्षमा
फौजी की बेटी के साथ मेंहदावल बाईपास के निकट बाइक सवार युवक ने छेड़छाड़ की थी। युवती ने मोबाइल में बाइक की फोटो खींच ली थी। पीड़िता प्रकरण लेकर वन स्टॉपसेंटर पर पहुंची। सीसीटीवी फुटेज की मदद से युवक को पकड़वा कर सेंटर लाया गया। युवक ने माफी मांगी युवती ने क्षमा कर दिया।
विज्ञापन
केस नंबर- 3
अफसर की पत्नी को फोन कर परेशान करता था शराबी युवक
दूसरे जनपद में तैैनात राजस्व विभाग के एक अफसर का परिवार खलीलाबाद में रहता है। उनकी पत्नी को फोन पर युवक परेशान करता था। प्रकरण वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचा तो फोन करने वाला बस्ती का निकला। शराब के नशे में युवक ऐसी हरकत करता था। माफीनामा लिखवाने के बाद युवक को छोड़ा गया।
विज्ञापन
केस नंबर-4
पत्नी को ढूंढकर पति से मिलाया
कोतवाली क्षेत्र का एक युवक पत्नी के लापता होने की शिकायत लेकर पहुंचा। इसी बीच पति के एटीएम से पत्नी ने रकम की निकासी की। स्टॉप सेंटर ने जांच की तो पता चला कि सिद्घार्थनगर के एटीएम से रकम निकली है। सिद्धार्थनगर में दूसरे शख्स के साथ महिला रह रही थी। काउंसिलिंग के बाद पति-पत्नी साथ रहने लगे।
संतकबीरनगर। घरेलू हिंसा से प्रताड़ित महिलाओं की मदद के साथ उचित परामर्श के जरिए परिवारों को टूटने से बचाने में वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां मदद और परामर्श से उनकी समस्याएं सुलझा दी जा रही हैं।
पीड़ित महिलाओं एवं 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों को एक ही छत के नीचे एकीकृत रूप से सहायता एवं सहयोग प्रदान करके उन्हें समाज की मुख्य धारा में फिर से लाना शासन की मंशा है। उसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए 11 नवंबर 2019 से जिले में सीएमओ कार्यालय के पीछे वन स्टॉप सेंटर संचालित हो रहा है। इस सेंटर के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता और कानूूनी सहायता उपलब्ध करा कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। इस केंद्र पर सेंटर मैनेजर ऋतुका दूबे और परामर्शदात्री प्रतिमा चंद व सुमन की तैनाती है। इसके अलावा कानूनी सहायता के लिए एसआई गौरी शुक्ला और दो महिला कांस्टेबल की तैनाती है। चिकित्सकीय सुविधा के लिए स्टॉप नर्स सुमित्रा, अल्पना राय और प्रियंका की तैनाती है। सेंटर मैनेजर ऋतुका दूबे बताती हैं कि महिला अपराध से जुड़े हर तरह के मामलों का निस्तारण कराया जाता है। यहां आने वाली पीड़ित महिलाओं और किशोरियों को जरूरत के मुताबिक ठहरने और भोजन आदि की भी व्यवस्था है। पीड़िता की मदद के लिए डॉयल 181 नंबर पर शिकायत दर्ज कराने की भी सुविधा शासन ने मुहैया कराई है। शिकायत के बाद संबंधित जिलों को केस ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद पीड़िता को जरूरत के हिसाब से सेवा मिलती है। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को वन स्टॉप सेंटर पर अधिकतम दो दिन तक रहने और खाने की सुविधा है। अगर पीड़िता आने में असमर्थ है तो टीम उसके घर तक पहुंचती है। काउंसिलिंग से यदि समस्या का निदान नहीं होता है तो केस दर्ज कराया जाता है। पीड़िता की इच्छा के अनुसार कोर्ट तक केस को ले जाने में वन स्टॉप सेंटर मदद करता है।
वन स्टॉप सेंटर पर 15 महीने में आ चुके हैं 234 मामले
वन स्टॉप सेंटर पर अब तक 19 पीड़िताओं को आश्रय दिया गया है। एक पीड़िता को नारी निकेतन अयोध्या भेजवाया गया, जबकि 18 पीड़िताओं को उसके परिवार के सुपुर्द किया गया। घरेलू हिंसा के 93 प्रकरण आए और सभी को सुलह-समझौते से निस्तारित किया गया। इसी तरह दहेज उत्पीड़न के 12 प्रकरण सुलह-समझौते से निपटाए गए। लैंगिंक उत्पीड़न से संबंधित नौ प्रकरण आए। इसमें से एक प्रकरण में केस दर्ज कराया गया और आठ मामले निस्तारित किए गए। मानसिक उत्पीड़न से संबंधित पांच प्रकरण आए और सभी को सुलह-समझौते से निस्तारित किया गया। इसके अलावा मारपीट, जमीन विवाद, आपसी विवाद, कन्या सुमंगला, साइबर क्राइम आदि से संबंधित 102 प्रकरण आए और सभी का निस्तारण कराया गया। वैसे 12 प्रकरण लंबित हैं। इनमें आठ प्रकरण घरेलू हिंसा, दो प्रकरण आपसी विवाद, एक प्रकरण दहेज उत्पीड़न और तीन प्रकरण मानसिक उत्पीड़न का लंबित है।
कोट
वन स्टाप सेंटर पर बेहतर ढंग से समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है। जो प्रकरण लंबित हैं, उन्हें भी काउंसिलिंग के जरिए निस्तारित किए जाने की कोशिश की जा रही है। वन स्टॉप सेंटर के खुद के भवन के लिए 48 लाख रुपये स्वीकृत हैं। सीएमओ कार्यालय परिसर में ही नया भवन बन रहा है। अभी तक भवन निर्माण में 24 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। उम्मीद है जल्द ही नया भवन बन कर तैयार हो जाएगा।
- श्वेता त्रिपाठी, जिला प्रोबेशन अधिकारी