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Sant Kabir Nagar News: पहले दिन राम कथा के महात्म्य पर चर्चा
Tue, 16 Dec 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 16 Dec 2025 12:51 AM IST
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जिला मुख्यालय के गन्ना सहकारी समिति के प्रांगण में श्रीरामकथा कहते हुए आचार्य अवधेश जी महाराज ।
संतकबीरनगर। खलीलाबाद के गन्ना सहकारी समिति में स्थित शिव मंदिर प्रांगण में सोमवार को श्रीराम कथा शुरू हो गई। पहले दिन श्री अयोध्या धाम से आए आचार्य अवधेश ने राम कथा के कथा महात्म्य पर चर्चा की। कहा कि राम की महिमा अपरंपार है। प्रभु श्रीराम ने स्वयं कहा है कि राम से बड़ा राम का नाम है।
मुख्य यजमान पवन राय उर्फ गुल्लू तथा अन्य श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए उन्होंने आगे का कि राम नाम सबसे बड़ा मंत्र है। सदाशिव भोले शंकर भी श्रीराम नाम जपते रहते हैं। सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, वायु सभी में जो शक्ति है, वह राम नाम में समाहित है। बच्चे के जन्म में श्री राम के नाम का सोहर होता है। विवाह आदि मांगलिक कार्यों के अवसर पर श्री राम के गीत गाए जाते हैं। यहां तक कि मनुष्य की अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है। राम में शिव और शिव में राम विद्यमान हैं। ऐसे ही उनके सेवक हनुमान जी हैं। कलियुग में वे एक ऐसे देवता हैं जो भक्तों की तुरंत सहायता करते हैं। उन्होंने कभी भी अपने पराक्रम का श्रेय स्वयं नहीं लिया। सीता से लौटने के बाद उन्होंने कहा, “सो सब तब प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई।” यह सब तुम्हारा प्रताप है, प्रभु। इसमें मेरी प्रभुता कुछ नहीं है। जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं। भगवान भक्ति के अधीन होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई भक्ति के आगे वह विवश रहते हैं। भगवान का सच्चा भक्त उन्हें जिस रूप में याद करता है, वह उसी रूप में दर्शन देते हैं। रामकथा में मानस व्यास ने सुंदरकांड की कथा के साथ ही हनुमानजी की भगवान श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति की कथा सुनाई।
इस दौरान तितौवा हनुमानगढ़ी के महंत हरिनारायण उपाध्याय उर्फ गुड्डू बाबा, आनंद त्रिपाठी, अमित राय, गोलू लाला, गोरखनाथ मिश्र, मार्कंडेय उपाध्याय, दुर्गेश शर्मा, आनंद शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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मुख्य यजमान पवन राय उर्फ गुल्लू तथा अन्य श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए उन्होंने आगे का कि राम नाम सबसे बड़ा मंत्र है। सदाशिव भोले शंकर भी श्रीराम नाम जपते रहते हैं। सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, वायु सभी में जो शक्ति है, वह राम नाम में समाहित है। बच्चे के जन्म में श्री राम के नाम का सोहर होता है। विवाह आदि मांगलिक कार्यों के अवसर पर श्री राम के गीत गाए जाते हैं। यहां तक कि मनुष्य की अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है। राम में शिव और शिव में राम विद्यमान हैं। ऐसे ही उनके सेवक हनुमान जी हैं। कलियुग में वे एक ऐसे देवता हैं जो भक्तों की तुरंत सहायता करते हैं। उन्होंने कभी भी अपने पराक्रम का श्रेय स्वयं नहीं लिया। सीता से लौटने के बाद उन्होंने कहा, “सो सब तब प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई।” यह सब तुम्हारा प्रताप है, प्रभु। इसमें मेरी प्रभुता कुछ नहीं है। जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं। भगवान भक्ति के अधीन होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई भक्ति के आगे वह विवश रहते हैं। भगवान का सच्चा भक्त उन्हें जिस रूप में याद करता है, वह उसी रूप में दर्शन देते हैं। रामकथा में मानस व्यास ने सुंदरकांड की कथा के साथ ही हनुमानजी की भगवान श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति की कथा सुनाई।
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इस दौरान तितौवा हनुमानगढ़ी के महंत हरिनारायण उपाध्याय उर्फ गुड्डू बाबा, आनंद त्रिपाठी, अमित राय, गोलू लाला, गोरखनाथ मिश्र, मार्कंडेय उपाध्याय, दुर्गेश शर्मा, आनंद शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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