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पहले जुमा पर मस्जिदों में उमड़े रोजेदार

Fri, 18 May 2018 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 18 May 2018 11:48 PM IST
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शहर के मोतीनगर मस्जिद में नमाज अदा करते रोजेदार। - फोटो : अमर उजाला
बाघनगर। पवित्र माहे रमजान के दूसरे दिन जुमा की नमाज में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने हिस्सा लिया। क्षेत्र के अधिकांश मस्जिदें नमाजियों से भरी रही। जामा मस्जिद सेमरियावां में कारी अख्तर अली नसीमी ने नमाजे जुमा की इमामत की। मदनी जामा मस्जिद इस्लामाबाद सेमरियावां कारी नसीरुद्दीन साहब ने नमाज पढ़ाई। 
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सेमारियावां दुधारा क्षेत्र स्थित सभी मस्जिदों में बड़े ही अदब व एहतराम के साथ नमाजे जुमा अदा की गई। मदरसा तालीमुल कुरान सेमारियावां के उस्ताद मौलाना महमूद अहमद कासमी ने नमाजे जुमा के पूर्व अपने संबोधन में कहा कि इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजानुल मुबारक है। इस पवित्र महीने का मुसलमानों को साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है।
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इस इबादत वाले महीने में पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान शरीफ अवतरित हुआ। यह महीना पापों से छुटकारा पाने, नेकियां कमाने वाला, हमदर्दी करने वाला, रिश्तेदारों पड़ोसियों की मदद करने वाला महीना है। कहा कि रोजा के तीस दिनों में रोजेदारों को ट्रेनिंग दी जाती है कि इबादत, दुआ करें, अल्लाह को याद करें, गुनाहों से बचें और नेक काम और भलाई का काम ज्यादा से ज्यादा करें।
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अल्लाह की की इबादत करें, अधिकाधिक कुरान शरीफ का पाठ करें और पांचों वक्त  की नमाज समय से पाबंदी के साथ अदा करें। क्योंकि रोजा ढाल है पापों से बचने के लिए। नमाज बाद रोजेदारों ने सेमारियावां, दुधारा, बाघनगर, उशराशहीद, लोहरौली, दनुकोइयां, करही आदि चैराहों पर इफ्तार से सजी दुकानों पर भीड़ लगी रही। सबसे अधिक खजूरों, फल, तरबूज, खरबूज, नींबू, ब्रेड, दूध, केला, सेब, सेवई की बिक्री जोरों पर रही। 

मदरसा अरबिया तालीमुल कुरान सेमारियावां के उस्ताद गुफरान नदवी और मदनी मस्जिद के इमाम कारी नसीरुद्दीन ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर के अनुसार माहे रमजान नौवां महीना सन 1439 हिजरी है। आज से 1437 साल पूर्व यानि दो हिजरी को मुसलमानों पर रोजा फर्ज अनिवार्य हुआ।

जब मुसलमान कलम ए तौहीद, नमाज और अन्य आदेशों उपदेशों का पूर्णत: पालन करने लगे तब रोजा रखने का हुक्म हुआ, इस महीने में की गयी इबादत अल्लाह को बहुत पसंद है। इसका बदला पुरस्कार खुद अल्लाह देंगे।


मौलाना गुफरान नदवी ने छात्रों और युवा वर्ग से अनुरोध किया है कि इस बरकत, रहमत और मगफिरत वाले पवित्र महीने में मोबाइल से दूर रहें। इसमें अपना कीमती वक्त बर्बाद न करें। अपना वक्त रोजा, नमाज, इबादत, दुआ, जिक्र, तिलावते कलाम पाक में लगाएं और समय का सदुपयोग करें। माता-पिता की खिदमत करें। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगे। 
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