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Sant Kabir Nagar News: 'परंपरागत नहीं, तकनीकी खेती करने की जरूरत'
Fri, 04 Aug 2023 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 04 Aug 2023 11:01 PM IST
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- कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर शुरू हुआ दो दिवसीय प्रशिक्षण
संवाद न्यूज़ एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर कृषि अभियांत्रिकी अनुभाग के जरिए शुक्रवार को दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। कृषक प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि लगभग धान की रोपाई समाप्त हो गई है। अब निराई गुड़ाई का कार्य प्रारंभ हो रहा है। आज भारत में अधिकतर किसान परंपरागत रूप से खेती करते आ रहे हैं। इससे उनको अधिक श्रम के साथ खर्चा भी अधिक होता है। आज अनेक प्रकार के कृषि यंत्र बाजार में उपलब्ध है। जो खेती के काम को आसान बनाने में मदद करते हैं । जिससे तकनीकी खेती करने की जरूरत है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ देवेश कुमार ने कहा कि जानकारी के अभाव में हमारे किसान भाई कृषि यंत्र का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। धान की फसल से खरपतवार नियंत्रण के लिए कोनो वीडर की तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस प्रकार कोनो वीडर के लाभ को देखते हुए कोनो वीडर मशीन धान और अन्य फसलों के बीच की पंक्तियों के खरपतवार हटाने के काम आता है। इससे निराई-गुड़ाई काम भी किया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने अगस्त और सितम्बर में होने वाले कृषि कार्य को बताया। कृषि विज्ञान केंद्र के समस्त वैज्ञानिक एवं कर्मचारी तथा जनपद के विभिन्न गांवों से आए हुए 25 चयनित कृषक एवं कृषक महिलाएं उपस्थित रहीं।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर कृषि अभियांत्रिकी अनुभाग के जरिए शुक्रवार को दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। कृषक प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि लगभग धान की रोपाई समाप्त हो गई है। अब निराई गुड़ाई का कार्य प्रारंभ हो रहा है। आज भारत में अधिकतर किसान परंपरागत रूप से खेती करते आ रहे हैं। इससे उनको अधिक श्रम के साथ खर्चा भी अधिक होता है। आज अनेक प्रकार के कृषि यंत्र बाजार में उपलब्ध है। जो खेती के काम को आसान बनाने में मदद करते हैं । जिससे तकनीकी खेती करने की जरूरत है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ देवेश कुमार ने कहा कि जानकारी के अभाव में हमारे किसान भाई कृषि यंत्र का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। धान की फसल से खरपतवार नियंत्रण के लिए कोनो वीडर की तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस प्रकार कोनो वीडर के लाभ को देखते हुए कोनो वीडर मशीन धान और अन्य फसलों के बीच की पंक्तियों के खरपतवार हटाने के काम आता है। इससे निराई-गुड़ाई काम भी किया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने अगस्त और सितम्बर में होने वाले कृषि कार्य को बताया। कृषि विज्ञान केंद्र के समस्त वैज्ञानिक एवं कर्मचारी तथा जनपद के विभिन्न गांवों से आए हुए 25 चयनित कृषक एवं कृषक महिलाएं उपस्थित रहीं।
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