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20 से अधिक मातृ शिशु कल्याण केंद्र खंडहर
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सेमरियावां ब्लाक के महुआरी गांव का एएनएम सेंटर बदहाल।
- फोटो : KHALILABAD
20 से अधिक मातृ शिशु कल्याण केंद्र खंडहर
संतकबीरनगर। मातृ और शिशु की सेहत का ख्याल रखने के लिए जिले में 183 मातृ शिशु कल्याण केंद्र स्थापित हैं। इनमें से 20 से अधिक केंद्र खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर भवन ही नहीं हैं। एक जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर पर टीकाकरण आदि कार्य होता है। एक सेंटर बंद मिला। मजबूरन गर्भवती व शिशुओं को लंबी दूरी तय कर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। पेश है ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट...
महुआरी में वर्षों से बदहाल है उपकेंद्र
सेमरियावां। ब्लॉक क्षेत्र के महुआरी में एएनएम सेंटर देखरेख व मरम्मत के अभाव में बदहाल है। गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर से एएनएम केंद्र संचालित होता है। गांव के रुआब अली, रामदीन, राम चंद्र, शमसुद्दीन, मो. ताहिर, लक्ष्मी, जलालुद्दीन आदि ने बताया कि एएनएम सेंटर कई साल से जर्जर हाल में है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष-2009 में कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने भवन को गिराकर फिर से पुरानी ईंट से निर्माण कराया। निर्माण के समय मानक के मुताबिक मोरंग सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया। बनते ही भवन पहले जैसी स्थिति में पहुंच गया। गांव वालों की शिकायत पर तत्कालीन नायब तहसीलदार राहुल देव भट्ट ने मौके की जांच की थी, लेकिन ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान में एएनएम सेंटर का फर्श पूरी तरह से टूटा है। दीवार से प्लास्टर उखड़ गया है। शौचालय, हैंडपंप नहीं है। एएनएम संगीता ने बताया कि वह वर्ष-2015 से तैनात हैं। भवन बदहाल होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विंदुमती व कुसुम के घर पर बैठ कर बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण व दवाएं दी जाती है। आसपास के गांव उसरा शहीद, मूड़ाडीहा खुर्द, पिपराडोमन, करमाडोमन, रसूलपुर में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जगदीश पटेल ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। एएनएम को साफ-सफाई करवाकर सेंटर को संचालित करने के लिए कहा जाएगा। जब भवन है तो किसी के घर से सेंटर संचालित नहीं करना चाहिए। जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
धौरापार उपकेंद्र पर लटका मिला ताला
मेंहदावल। ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत धौरापार अव्वल में स्थापित स्वास्थ्य विभाग के उपकेंद्र पर ताला लटकता मिला। वहीं महदेवा में केंद्र खुला था और वहां तैनात एएनएम मौजूद मिलीं। बेहतर स्वास्थ्य सेवा व टीकाकरण के लिए स्थापित उपकेंद्र हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों व गर्भवती महिलाओं की अपेक्षा पर खरा नहीं उतर पा रहा है।
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सेमरडाड़ी में न तो एएनएम थीं और न ही भवन मिला
धनघटा/ रोसया। विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में मातृ शिशु कल्याण केेंद्र बेमतलब साबित हो रहे हैं। कहीं भवन नही है तो कहीं पर एएनएम आती ही नहीं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए 15 से 20 किलोमीटर की यात्रा करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंसर बाजार या शनिचरा बाजार जाना पड़ता है। चकिया धुसवा के मातृ शिशु कल्याण केंद्र पर जाने पर रामवृक्ष, कौशल, पुष्पा, आरती, शंभू ने बताया कि दस वर्ष पहले ही भवन का निर्माण शुरू हुआ, जिसकी आधी दीवार चली। उसके बाद निर्माण कार्य बंद हो गया। गांव वालों का कहना है कि तभी से निर्माण नहीं हुआ और यहां के लोगों को इलाज के लिए 15 किलोमीटर की दूरी तय करके शनिचरा बाजार या हैंसर बाजार जाना पड़ता है। मातृ शिशु कल्याण केंद्र मड़पौना पर एएनएम बबिता और प्रियंका मौजूद मिलीं। यहां पर प्रसव कराने वाली महिला संध्या, शायरा खातून, आसमा खातून, सोनमती, बबिता का इलाज चल रहा था। परसा में एएनएम मिलीं और वहां मरीजों का इलाज भी होता दिखा। सेमरडाड़ी में न तो एएनएम थी और न ही भवन मिला। रामललित, दयाशंकर, दीनदयाल, घनश्याम आदि का कहना था कि 15 वर्ष पहले यहां पर एएनएम किराए के मकान में रह रही थी। उनका यहा से स्थानांतरण हुआ तो उसके बाद कौन एएनएम यहां तैनात है और कब आती जाती हैं इसका पता नहीं।
जिले में 183 मातृ शिशु कल्याण केंद्र है। इनमें से 20 से अधिक के भवन जर्जर अवस्था में है। जर्जर भवन की मरम्मत या फिर नया भवन बनाने के लिए शासन को अवगत करा दिया गया है। वैसे 70 जगहों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी अलग कमरे में संचालित हो रहा है। यहां भी लोगों को सुविधाएं मिल रही है। जैसे ही शासन से बजट जारी होगा, वैसे ही जर्जर भवनों को दुरुस्त करा दिया जाएगा।
डॉ. मोहन झा,अपर सीएमओ
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संतकबीरनगर। मातृ और शिशु की सेहत का ख्याल रखने के लिए जिले में 183 मातृ शिशु कल्याण केंद्र स्थापित हैं। इनमें से 20 से अधिक केंद्र खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर भवन ही नहीं हैं। एक जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर पर टीकाकरण आदि कार्य होता है। एक सेंटर बंद मिला। मजबूरन गर्भवती व शिशुओं को लंबी दूरी तय कर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। पेश है ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट...
महुआरी में वर्षों से बदहाल है उपकेंद्र
सेमरियावां। ब्लॉक क्षेत्र के महुआरी में एएनएम सेंटर देखरेख व मरम्मत के अभाव में बदहाल है। गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर से एएनएम केंद्र संचालित होता है। गांव के रुआब अली, रामदीन, राम चंद्र, शमसुद्दीन, मो. ताहिर, लक्ष्मी, जलालुद्दीन आदि ने बताया कि एएनएम सेंटर कई साल से जर्जर हाल में है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष-2009 में कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने भवन को गिराकर फिर से पुरानी ईंट से निर्माण कराया। निर्माण के समय मानक के मुताबिक मोरंग सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया। बनते ही भवन पहले जैसी स्थिति में पहुंच गया। गांव वालों की शिकायत पर तत्कालीन नायब तहसीलदार राहुल देव भट्ट ने मौके की जांच की थी, लेकिन ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान में एएनएम सेंटर का फर्श पूरी तरह से टूटा है। दीवार से प्लास्टर उखड़ गया है। शौचालय, हैंडपंप नहीं है। एएनएम संगीता ने बताया कि वह वर्ष-2015 से तैनात हैं। भवन बदहाल होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विंदुमती व कुसुम के घर पर बैठ कर बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण व दवाएं दी जाती है। आसपास के गांव उसरा शहीद, मूड़ाडीहा खुर्द, पिपराडोमन, करमाडोमन, रसूलपुर में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जगदीश पटेल ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। एएनएम को साफ-सफाई करवाकर सेंटर को संचालित करने के लिए कहा जाएगा। जब भवन है तो किसी के घर से सेंटर संचालित नहीं करना चाहिए। जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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धौरापार उपकेंद्र पर लटका मिला ताला
मेंहदावल। ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत धौरापार अव्वल में स्थापित स्वास्थ्य विभाग के उपकेंद्र पर ताला लटकता मिला। वहीं महदेवा में केंद्र खुला था और वहां तैनात एएनएम मौजूद मिलीं। बेहतर स्वास्थ्य सेवा व टीकाकरण के लिए स्थापित उपकेंद्र हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों व गर्भवती महिलाओं की अपेक्षा पर खरा नहीं उतर पा रहा है।
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सेमरडाड़ी में न तो एएनएम थीं और न ही भवन मिला
धनघटा/ रोसया। विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में मातृ शिशु कल्याण केेंद्र बेमतलब साबित हो रहे हैं। कहीं भवन नही है तो कहीं पर एएनएम आती ही नहीं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए 15 से 20 किलोमीटर की यात्रा करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंसर बाजार या शनिचरा बाजार जाना पड़ता है। चकिया धुसवा के मातृ शिशु कल्याण केंद्र पर जाने पर रामवृक्ष, कौशल, पुष्पा, आरती, शंभू ने बताया कि दस वर्ष पहले ही भवन का निर्माण शुरू हुआ, जिसकी आधी दीवार चली। उसके बाद निर्माण कार्य बंद हो गया। गांव वालों का कहना है कि तभी से निर्माण नहीं हुआ और यहां के लोगों को इलाज के लिए 15 किलोमीटर की दूरी तय करके शनिचरा बाजार या हैंसर बाजार जाना पड़ता है। मातृ शिशु कल्याण केंद्र मड़पौना पर एएनएम बबिता और प्रियंका मौजूद मिलीं। यहां पर प्रसव कराने वाली महिला संध्या, शायरा खातून, आसमा खातून, सोनमती, बबिता का इलाज चल रहा था। परसा में एएनएम मिलीं और वहां मरीजों का इलाज भी होता दिखा। सेमरडाड़ी में न तो एएनएम थी और न ही भवन मिला। रामललित, दयाशंकर, दीनदयाल, घनश्याम आदि का कहना था कि 15 वर्ष पहले यहां पर एएनएम किराए के मकान में रह रही थी। उनका यहा से स्थानांतरण हुआ तो उसके बाद कौन एएनएम यहां तैनात है और कब आती जाती हैं इसका पता नहीं।
जिले में 183 मातृ शिशु कल्याण केंद्र है। इनमें से 20 से अधिक के भवन जर्जर अवस्था में है। जर्जर भवन की मरम्मत या फिर नया भवन बनाने के लिए शासन को अवगत करा दिया गया है। वैसे 70 जगहों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी अलग कमरे में संचालित हो रहा है। यहां भी लोगों को सुविधाएं मिल रही है। जैसे ही शासन से बजट जारी होगा, वैसे ही जर्जर भवनों को दुरुस्त करा दिया जाएगा।
डॉ. मोहन झा,अपर सीएमओ