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Sant Kabir Nagar News: अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की जांच अब क्राइम ब्रांच के हवाले
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संतकबीरनगर। जिले में चर्चित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की विवेचना अब क्राइम ब्रांच करेगी। अब तक मामले की जांच कोतवाली खलीलाबाद पुलिस कर रही थी।
नाथनगर स्थित स्वर्गीय रामसुभग चौधरी सरयूदेई इंटर कॉलेज, पूर्व माध्यमिक विद्यालय तिलठा और यशोदा देवी बालिका विद्यालय तिलठा के प्रधानाचार्य व संचालक देवव्रत चौधरी की गिरफ्तारी के बाद प्रकरण चर्चा में आया था। विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद अब जांच की दिशा पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
वर्ष 2025 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी की तहरीर पर छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें जिले के 46 विद्यालयों से जुड़े 98 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि विभिन्न विद्यालयों के प्रबंध तंत्र से जुड़े लोगों ने छात्रों के नाम पर मिलने वाली छात्रवृत्ति की धनराशि में अनियमितता की। मामले में सरकारी धन के दुरुपयोग और छात्रवृत्ति वितरण में गड़बड़ी के आरोपों की जांच की जा रही है।
क्राइम ब्रांच की जांच में विद्यालयवार छात्रवृत्ति आवेदन, छात्रों का विवरण, बैंक खातों में भेजी गई धनराशि, सत्यापन प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि छात्रवृत्ति की धनराशि वास्तविक पात्र छात्रों के खातों तक पहुंची थी या नहीं।
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हाईकोर्ट ने कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अम्रेंद्र भूषण पांडेय समेत अन्य याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। न्यायालय की खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र की पीठ ने आपराधिक विविध रिट याचिका संख्या 22657/2026 में की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनिंद्र मोहन पांडेय ने दलील दी कि इसी मामले से जुड़े कुछ सह-आरोपियों को न्यायालय पहले ही गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे चुका है। इस आधार पर वर्तमान याचिकाकर्ताओं ने भी राहत की मांग की। न्यायालय ने याचिका को पूर्व में दाखिल संबंधित मामले के साथ संबद्ध करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मिलेगा। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया है।
छात्रवृत्ति प्रकरण की विवेचना पहले कोतवाली पुलिस कर रही थी। वर्तमान में इसे क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया है। अब आगे की विवेचना क्राइम ब्रांच की टीम करेगी।
प्रियम राजशेखर पांडेय, सीओ खलीलाबाद
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नाथनगर स्थित स्वर्गीय रामसुभग चौधरी सरयूदेई इंटर कॉलेज, पूर्व माध्यमिक विद्यालय तिलठा और यशोदा देवी बालिका विद्यालय तिलठा के प्रधानाचार्य व संचालक देवव्रत चौधरी की गिरफ्तारी के बाद प्रकरण चर्चा में आया था। विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद अब जांच की दिशा पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
वर्ष 2025 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी की तहरीर पर छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें जिले के 46 विद्यालयों से जुड़े 98 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि विभिन्न विद्यालयों के प्रबंध तंत्र से जुड़े लोगों ने छात्रों के नाम पर मिलने वाली छात्रवृत्ति की धनराशि में अनियमितता की। मामले में सरकारी धन के दुरुपयोग और छात्रवृत्ति वितरण में गड़बड़ी के आरोपों की जांच की जा रही है।
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क्राइम ब्रांच की जांच में विद्यालयवार छात्रवृत्ति आवेदन, छात्रों का विवरण, बैंक खातों में भेजी गई धनराशि, सत्यापन प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि छात्रवृत्ति की धनराशि वास्तविक पात्र छात्रों के खातों तक पहुंची थी या नहीं।
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हाईकोर्ट ने कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अम्रेंद्र भूषण पांडेय समेत अन्य याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। न्यायालय की खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र की पीठ ने आपराधिक विविध रिट याचिका संख्या 22657/2026 में की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनिंद्र मोहन पांडेय ने दलील दी कि इसी मामले से जुड़े कुछ सह-आरोपियों को न्यायालय पहले ही गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे चुका है। इस आधार पर वर्तमान याचिकाकर्ताओं ने भी राहत की मांग की। न्यायालय ने याचिका को पूर्व में दाखिल संबंधित मामले के साथ संबद्ध करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मिलेगा। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया है।
छात्रवृत्ति प्रकरण की विवेचना पहले कोतवाली पुलिस कर रही थी। वर्तमान में इसे क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया है। अब आगे की विवेचना क्राइम ब्रांच की टीम करेगी।
प्रियम राजशेखर पांडेय, सीओ खलीलाबाद